आगरालीक्स…आगरा में महागणपति को भोग में लगाया 101 किलो का मेवा मोदक. श्री वरद वल्लभा महागणपति ने के मंदिर की उत्तर भारत में इस तरह का अनूठा प्रयास, मंदिर की रसोई में शुद्ध मेवा से तैयार विशाल मोदक
छलेसर रोड स्थित श्री वरद वल्लभा महागणपति मंदिर में चल रहे 12 दिवसीय पंचम गणेश महोत्सव में 101 किलो का मेवा मोदक श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मंदिर प्रबंधन के अनुसार उत्तर भारत में इस प्रकार का यह एकमात्र प्रयास है, जिसमें भगवान श्री महागणपति के लिए इतना विशाल मोदक तैयार किया गया है। इस विशेष मोदक की सबसे खास बात यह है कि इसे बाहर से तैयार नहीं कराया गया, बल्कि मंदिर की रसोई में ही शुद्ध मेवा से तैयार किया गया है। इसकी शुद्धता और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। मोदक को जालीदार स्वच्छ वस्त्र से ढककर सुरक्षित रखा गया है, ताकि इसकी पवित्रता और स्वच्छता बनी रहे। इसे आकर्षक ढंग से सजाया गया है, जिससे दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु भी इसकी भव्यता को निहार रहे हैं।
मंदिर के संस्थापक हरिमोहन गर्ग ने बताया कि 101 किलो का मेवा मोदक केवल आकार में बड़ा बनाने का प्रयास नहीं है, बल्कि इसके निर्माण में शुद्धता, स्वच्छता और धार्मिक परंपराओं का विशेष ध्यान रखा गया है। मंदिर की रसोई में इसे तैयार कराना इसी भावना का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि भगवान गणपति को मोदक प्रिय है और इसी भाव को केंद्र में रखते हुए इस विशेष प्रसाद को तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि मोदक को आकर्षक तरीके से सजाया गया है और श्रद्धालुओं के लिए इसके दर्शन की विशेष व्यवस्था की गई है। 12 दिवसीय महोत्सव में प्रतिदिन भगवान महागणपति का अलग-अलग स्वरूप में श्रृंगार और फूल बंगला दर्शन कराया जा रहा है।
महोत्सव के छठवें दिवस वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष हवन का आयोजन किया गया। हवन में किशोर नारायण खन्ना ने परिवार सहित आहुति अर्पित कर भगवान श्री महागणपति की पूजा-अर्चना की। श्रद्धालुओं ने हवन में सहभागिता कर सुख-समृद्धि और मंगलकामना की। मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित लखन दीक्षित और प्रबंधक नितिन शर्मा ने बताया कि महोत्सव में प्रतिदिन प्रातः 7:30 बजे नित्य अभिषेक, वस्त्र श्रृंगार एवं फल सेवा होती है। प्रातः एवं सायंकाल महागणपति हवन, शाम 6 बजे सहस्रनाम अर्चना, 7 बजे महाआरती और रात्रि 9 बजे शयन आरती संपन्न होती है। महोत्सव के दौरान मंदिर परिसर में भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण बना हुआ है।