आगरालीक्स…आगरा में नीले वस्त्रों में सजे महागणपति, केसर सूर्य तिलक ने बढ़ाई दिव्यता. पंचम गणेश महोत्सव के नवम दिवस दक्षिण भारतीय पूजा पद्धति से हुई आराधना, कुणाल जैन ने की वस्त्र श्रृंगार सेवा
छलेसर रोड स्थित श्री वरद वल्लभा महागणपति मंदिर में चल रहे 12 दिवसीय पंचम गणेश महोत्सव के नवम दिवस भगवान श्री वरद वल्लभा महागणपति का आकर्षक श्रृंगार किया गया। भगवान को नीले रंग के मनोहारी वस्त्र धारण कराए गए। स्वर्ण मुकुट एवं आभूषणों से सुसज्जित महागणपति के मस्तक पर केसर से बना सूर्य तिलक उनकी दिव्य आभा को और निखार रहा था। फूल बंगले में विराजमान भगवान के इस मनोहारी स्वरूप के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हुए। नवम दिवस भगवान की वस्त्र श्रृंगार सेवा कुणाल जैन द्वारा की गई। उन्होंने विधि-विधान के साथ भगवान का वस्त्र श्रृंगार कर पूजा-अर्चना की। इस दौरान श्रद्धालुओं ने गणपति महाराज के समक्ष शीश नवाकर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।
महोत्सव की विशेषता यह है कि भगवान श्री वरद वल्लभा महागणपति की आराधना में दक्षिण भारतीय पूजा पद्धति का भी समावेश किया गया है। पूजा-विधि में वैदिक मंत्रोच्चार, अभिषेक, हवन और पारंपरिक धार्मिक विधानों के साथ दक्षिण भारतीय परंपरा की झलक श्रद्धालुओं को देखने को मिल रही है। इससे महोत्सव में देश की विविध धार्मिक परंपराओं का सुंदर समागम दिखाई दे रहा है। मंदिर के संस्थापक हरिमोहन गर्ग ने कहा कि महोत्सव के प्रत्येक दिवस भगवान का अलग रंग, अलग श्रृंगार और अलग भाव श्रद्धालुओं के सामने प्रस्तुत किया जा रहा है। नीले वस्त्रों में केसर सूर्य तिलक से सुसज्जित आज का स्वरूप शांति, ऊर्जा और आध्यात्मिक चेतना का भाव प्रस्तुत करता है। दक्षिण भारतीय पूजा पद्धति को आयोजन से जोड़ने का उद्देश्य श्रद्धालुओं को पूजा की विविध परंपराओं से परिचित कराना भी है।

मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित लखन दीक्षित ने कहा कि गणपति आराधना में विधि के साथ भाव का विशेष महत्व है। दक्षिण भारतीय पूजा पद्धति के मंत्रोच्चार और पारंपरिक विधानों के साथ भगवान की आराधना करने से पूजा का वातावरण और अधिक आध्यात्मिक बनता है। उन्होंने बताया कि महोत्सव में प्रतिदिन भगवान के स्वरूप के अनुरूप पूजा एवं श्रृंगार किया जा रहा है। मंदिर के प्रबंधक नितिन शर्मा ने कहा कि महोत्सव में आने वाले श्रद्धालुओं को प्रतिदिन कुछ नया देखने और अनुभव करने का अवसर मिल रहा है। नित्य अभिषेक, श्रृंगार, हवन, सहस्रनाम अर्चना और आरती की व्यवस्थाओं के साथ दक्षिण भारतीय पूजा पद्धति को भी विशेष रूप से शामिल किया गया है।
महोत्सव का प्रमुख आकर्षण 101 किलो का मेवा मोदक भी बना हुआ है। इसे मंदिर की रसोई में शुद्ध मेवा से तैयार किया गया है।