आगरालीक्स…आपके हाथ में जो झुनझुना (मोबाइल फोन) है, वह आज 50 साल का हो गया है, जानें आगरा तक आने का इसका सफर, कॉल सुनने और करने तक चार्ज।
जिंदगी का आवश्यक हिस्सा बना मोबाइल फोन

मोबाइल फोन आज लगभग हर व्यक्ति की जिंदगी का एक आवश्यक हिस्सा बन गया है। बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक को इसकी लत गई है। युवा पीढ़ी तो बिना मोबाइल के एक घंटे तक नहीं रह सकती, खासकर महानगरों में। यह झुनझुना 15 से 20 घंटे हाथ में रहता है। सुबह उठने से लेकर रात में सोने से पहले लोग एक बार इसे जरूर देखते हैं।
तीन अप्रैल 1973 में लांच हुआ एक किलो वजन का मोबाइल
दुनिया में सबसे पहला मोबाइल फोन तीन अप्रैल 1973 में अमेरिका के न्यूयार्क शहर में आया था। मोबाइल फोन की निर्माता कंपनी मोटोरोला ने इसे लांच किया था, जो एक किलो का था।
भारत में आने में लगे 22 साल, ऐसे हुआ लांच
भारत में इसे आने में 22 साल का लंबा समय लगा। भारत मे पहला मोबाइल फोन 1995 में आया था, जिसे मोदी ग्रुप और ऑस्ट्रेलिया की टेलीकॉम कंपनी टेलस्ट्रॉ ने जॉइंट वेंचर के रूप में मोदी टेलस्ट्रॉ द्वारा लॉन्च किया गया था। यह उस समय भारत की सबसे बड़ी मोबाइल ऑपरेटर कंपनी थी, जिसके संस्थापक भारत के उद्योगपति भूपेंद्र कुमार मोदी थे।
जल्द ही आम लोगों तक पहुंच गया
भारत में आने के बाद भी इस झुनझुने (मोबाइल फोन) का इस्तेमाल जल्द ही भारतीयों के हाथों में पहुंचना शुरू हो गया।
आगरा में लगे एस्कोटेल कंपनी के टावर

आगरा की दयालबाग स्थित राम मोहन विहार कॉलोनी निवासी कारोबारी अनिल कुमार अग्रवाल बताते हैं कि उन्होंने सन् 1996 में एस्कोटेल कंपनी के टावर लगने के बाद उन्होंने मोटरोला का मोबाइल लिया था और जो जिसका नंबर अभी तक चल रहा है। हालांकि वह कंपनी बदल गई है।
सुनने का चार्ज 5.25 रुपये प्रति मिनट
उन्होंने बताया कि उस समय उनके मोबाइल पर कोई फोन आता था तो उसके सुनने का चार्ज रात के समय 4.50 रुपये (चार रुपये पचास पैसे) प्रति मिनट और पीक आवर्स में 5.25 रुपये (पांच रुपये पच्चीस पैसे) प्रति मिनट लगते थे।
मोबाइल करने का चार्ज 11 रुपये प्रति मिनट
मोबाइल फोन करने पर रात में नौ रुपये प्रति मिनट और पीक आवर्स में 11 रुपये प्रति मिनट का चार्ज लिया जाता था। बाद में रिलाइंस कंपनी का मोबाइल फोन आने के बाद रेटों में गिरावट आना शुरू हो गया था।