आगरालीक्स…शारदीय नवरात्र में दुर्गा सप्तशती का पाठ. 9 दिन में 13 अध्याय. ज्योतिषाचार्य अंशु पारीक से जानें पाठ करते समय किन नियमों का रखें ध्यान…
शारदीय नवरात्र साल के सबसे भक्तिपूर्ण समय में से एक पर्व माना जाता है. इस दौरान लोग माता का आशीर्वाद पाने के लिए कई तरह के उपाय आजमाते हैं. इन उपायों में व्रत उपवास करना, अखंड ज्योति जगाना, कलश की स्थापना करना और दुर्गा सप्तशती का पाठ करना मुख्य हैं. नवरात्र में दुर्गा सप्तशती का पाठ करना मुख्य रूप से फलदायी माना जाता है. यही नहीं जो नियमित रूप से घर में विधि विधान के साथ यह पाठ करता है उसके ऊपर माता की कृपा दृष्टि सदैव बनी रहती है.
दुर्गा सप्तशती के 13 अध्यायों का पाठ के हैं ये नियम
नवरात्रि में लोग दुर्गा सप्तशति का पाठ पूरे 9 दिन करते हैं. दुर्गासप्तशति में 13 अध्याय हैं और माता के दिन 9 हैं. ऐसे में कई लोग अज्ञानतावश अपनी मर्जी से किसी भी दिन दो या तीन अध्याय और किसी-किसी दिन एक अध्याय का पाठ करते 9 दिन में पूरे 13 अध्याय का पाठ कर लेते हैं, परन्तु दुर्गा सप्तशति के इन 13 अध्यायों का पाठ करने का एक विशेष क्रम है. जिसमें किसी भी ऐसे अध्याय के बाद पाठ को ऐसी स्थिति में विश्राम नहीं दिया जाता जिसमें मां दुर्गा का दैत्यों के साथ युद्ध का वर्णन है. दैत्यों के वध या देवताओं की स्तुति वाले अध्याय के साथ ही प्रतिदिन के पाठ को विश्राम दिया जाता है. इसलिए यदि आप नवरात्रि पर्व में दुर्गा सप्तशति का पाठ करने जा रहे हैं तो इस क्रम को जानना आवश्यक है.
प्रथम दिन
कवच → अर्गला स्तोत्र → कीलक → अध्याय 1
दूसरा दिन
कवच → अर्गला → कीलक → अध्याय 2–3
तीसरा दिन
कवच → अर्गला → कीलक → अध्याय 4
चौथा दिन
कवच → अर्गला → कीलक → अध्याय 5–6
पांचवा दिन
कवच → अर्गला → कीलक → अध्याय 7
छठा दिन
कवच → अर्गला → कीलक → अध्याय 8
सातवां दिन
कवच → अर्गला → कीलक → अध्याय 9–10
अठवां दिन
कवच → अर्गला → कीलक → अध्याय 11–12
नवां दिन
कवच → अर्गला → कीलक → अध्याय 13