आगरालीक्स…दशहरा पर शस्त्र पूजा और नीलकंठ पक्षी के दर्शन का महत्व…जानिए क्यों नया कार्य प्रारंभ करने के लिए होता है यह शुभ दिन..
20 अक्टूबर दिन मंगलवार को दशहरा अर्थात विजयदशमी का पर्व भगवान राम द्वारा रावण का वध करने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है. ज्योतिष और पुराणों में विजयदशमी का बड़ा महत्व है. दशहरे पर नीलकंठ पक्षी के दर्शन की परंपरा काफी प्राचीन समय से चली आ रही है. बताया जाता है भगवान श्री राम ने रावण के वध से पहले नीलकंठ पक्षी के दर्शन किए थे. इसके पश्चात उन्होंने रावण का वध किया. भगवान राम ने रावण की मृत्यु के पश्चात जो ब्रह्म हत्या का पाप लगा था उसके पश्चाताप के लिए अपने भाई लक्ष्मण के साथ मिलकर भगवान शिव की पूजा अर्चना की और ब्रह्म हत्या के पाप से खुद को मुक्त कराया. तब भगवान शिव ने उन्हे नीलकंठ पक्षी के रूप में प्रभु श्री राम को दर्शन दिए.
देवी दुर्गा ने नवरात्रि एवं 10 दिन के युद्ध के पश्चात महिषासुर पर विजय प्राप्त की थी. इस दिन को असत्य पर सत्य की विजय पर्व के रूप में मनाया जाता है इसलिए इस दशमी को विजयदशमी के नाम से जाना जाता है. इस दिन लोग शस्त्र पूजा करते हैं और नया कार्य प्रारंभ करते हैं. जैसे अक्षर लेखन का आरंभ, नये उद्योग का आरंभ, बीज बोना गृह प्रवेश करना, विवाह शादी इत्यादि हेतु खरीद करना. ऐसा विश्वास है कि इस दिन जो भी कार्य आरंभ किया जाता है उसमें अत्यंत विजय प्राप्त होती है. इसी दिन रावण का विशाल पुतला बनाकर उसे जलाने की प्रथा पूरे भारतवर्ष में है. दशहरा एवं विजयदशमी भगवान राम की विजय के रूप में मनाया जाता है अथवा दुर्गा पूजा के रूप में दोनों ही रूपों में यह शक्ति पूजा का पर्व है.
रावण दहन शुभ मुहूर्त
दशहरा के दिन शाम 5 बजकर 47 मिनट के बाद रावण दहन का शुभ मुहूर्त प्रारंभ हो रहा है जो रात 08:30 बजे प्रदोष काल की समाप्ति तक रहेगा।
इस दिन ही होगा शस्त्र पूजा –
विजयादशमी के दिन शस्त्र पूजा का भी विधान है. ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी ने बताया की धार्मिक कथाओं के अनुसार, महाभारत काल में पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान अपने अस्त्र-शस्त्र शमी के वृक्ष में छिपाए थे. अज्ञातवास पूरा होने के बाद उन्होंने आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को अपने शस्त्रों को निकालकर उनकी पूजा की थी. इसलिए इस दिन शस्त्र पूजा की भी परम्परा है. इसके अलावा इस दिन नीलकंठ पक्षी का दर्शन करना भी बेहद शुभकारी माना जाता है. इससे मनुष्य को धन धान्य की प्राप्ति होती है.
शस्त्र पूजा के लिए विजय मुहूर्त : दोपहर 1:59 बजे से 2:45 बजे तक
पंचांग के अनुसार 20 अक्टूबर 2026 को रवि योग पूरे दिन यानी सुबह 06:25 बजे से शुरू होकर अगले दिन 21 अक्टूबर को सुबह 06:25 बजे तक (अर्थात पूरे 24 घंटे) रहेगा।
प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य परम पूज्य गुरुदेव पंडित हृदय रंजन शर्मा अध्यक्ष श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भंडार वाले पुरानी कोतवाली सराफा बाजार अलीगढ़ यूपी व्हाट्सएप नंबर.9756402981,8272809774