आगरालीक्स…शारदीय नवरात्र में शनिवार और रविवार को मनाई जाएगी सप्तमी. रविवार को होगा अष्टमी का व्रत. जानिए माता के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा पाठ व महिमा के बारे में
आश्विन शुक्ल पक्ष सप्तमी (7) दिन शनिवार /रविवार मूल नक्षत्र अतिगंड़ योग गर करण के शुभ संयोग में 17/18 अक्टूबर 2026 को मां कालरात्रि की पूजा घर घर होगी. जिन लोगों के यहां माताएं बहने या लोग अष्टमी का पूजन करते हैं (पूजीजातीहै) वह लोग (सप्तमी 18 अक्टूबर 2026 दिन रविवार) को ही अष्टमी के लिए व्रत रखेंगे और फिर 19 अक्टूबर 2026 दिन सोमवार को पूजा पाठ, हवन यज्ञ ,कन्या लागुरा जमाने के बाद ही व्रत का पारण करेंगे.
माता का चोला (हरा) शुभ रंग (गहरा नीला ) भोग गुड़ और चने का भोग
माँ दुर्गा की सातवी शक्ति कालरात्रि के नाम से जानी जाती है. देवी भगवती का यह है यह हर स्वरुप अनंत है. मां कालरात्रि का स्वरूप देखने में अत्यंत भयानक है लेकिन यह सदैव शुभ फल देने वाली है. इसी कारण उनका नाम शुभंकरी भी है. काल को जीतने वाली काली जी देवियों की केंद्रीय सत्ता है भगवान शंकर की शक्ति के रूप में वह कभी रुद्राणी बनकर भक्तों का कल्याण करती हैं तो कभी चंडिका बनकर चंड मुंड का संहार करती हैं. वह रक्तदंतिका बंद कर रक्तबीज का वध करती हैं. देवासुर संग्राम में दैत्यों का सर्वनाश करती है. सांसारिक प्राणी जिन-जिन चीजों से दूर भागता है वह सब शंकर जी और काली जी को प्रिय है. वह नर मुंडो की माला पहनती हैं.
भस्म, श्मशान और बलि मां काली को प्रिय है. दुर्गा पूजा के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा और आराधना की जाती है. मां कालरात्रि दुष्टों का नाश करने वाली है. दैत्य, दानव, राक्षस, भूत -प्रेत आदि इनके स्मरण मात्र से ही भयभीत होकर भाग जाते हैं. यह सभी ग्रह बाधाओं को भी दूर करने वाली हैं. एक बार गौर वर्णा देवी जी को शंकर जी ने काली कह दिया. तब से मं काली नाम से वह लोक प्रसिद्ध हो गई. अखंड ज्योति जला कर काले तिलों से पूजा करने और रात्रि जप तप करने से मां काली प्रसन्न होती है. सप्तमी को रात्रि यज्ञ करने से साधक के सारे मनोरथ पूर्ण हो जाती हैं. इस दिन साधक का मन सहस्त्रार चक्र में होता है. मां के इस स्वरूप को अपने हृदय में अवास्थिकर साधक को एक निष्ठ भाव से उनकी आराधना करने से विशेष लाभ होता है.
वह घने अंधेरे की तरह एकदम गहरे काले रंग वाली है. सिर के बाल बिखरे रहने वाली माता के तीन नेत्र हैं तथा इनके स्वास से अग्नि निकलती है. कालरात्रि मां दुर्गा का सातवां विग्रह स्वरूप हैं. इनके तीनों नेत्र ब्रह्मांड के गोलों की तरह गोल हैं. इनके गले में विद्युत जैसी छटा देने वाले सफेद माला सुशोभित रहती है. इनके चार हाथ हैं. मां कालरात्रि का भयानक रूप है लेकिन भक्तों को शुभ फल देती हैं. इनका वाहन गधा है. वे अपने भक्तों की रक्षा के लिए हथियार भी रखती हैं. कालरात्रि मां के चारों हाथों में से दो हाथों में शस्त्र रहते हैं. एक हाथ अभय मुद्रा में है तथा एक वर मुद्रा में रहता है. मां का ऊपरी तन लाल रक्तिम रक्तिम वस्त्र से तथा नीचे का आधा भाग बाघ के चमड़े से ढका रहता है. मां की भक्ति से दुष्टों का नाश होता है और ग्रह बाधाएं अवश्य दूर होती हैं.
प्राचीन मंत्र
ॐ ऐंग हिलीम क्लीम चामुंडायै विच्चे
प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य परमपूज्य गुरुदेव पंडित हृदय रंजन शर्मा अध्यक्ष श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भंडार वाले पुरानी कोतवाली सर्राफा बाजार अलीगढ़ यूपी WhatsApp नंबर-9756402981,8272809774