पंचायत चुनाव का हो हल्ला बहुत है, लेकिन आरक्षित सीटों को सार्वजनिक नहीं किया गया है। आखिर ऐसा क्यों, हर बार आरक्षित सीटों की सूची की तिथि स्थगित की जा रही है, ऐसा तब हो रहा है जब सीटों का आरक्षण निर्धारित करने के लिए फॉर्मूला है, राजनैतिक गलियारों में यूपी के विधानसभा चुनाव से पहले पंचायत चुनाव रिहर्सल हैं, इसमें जरा सी चूक सीएम की कुर्सी हिला सकती है, सत्तारूढ सपा से लेकर केंद्र के बाद प्रदेश की सत्ता काबिज करने को उतावली भाजपा और पिछले चुनाव में सत्ता से बेदखल हुई बसपा से लेकर अपना बजूद तलाश रही कांग्रेस चुनावी गणित सेट करने में जुटे हैं। सत्ता सपा की है तो वे आरक्षण का रुख बदलकर पंचायत चुनाव जीतने में जुटे हैं, राजनीति के जानकारों का तो यही मानना है कि आरक्षित और सामान्य सीट का फॉर्मूला पंचायत चुनाव का समीकरण बदल सकता है। तभी तो सूची सार्वजनिक नहीं की जा रही है, इसका मतलब यह नहीं है कि इसे पब्लिक नहीं जानती है, ये जनता सब जानती है और वोट से जवाब देने को तैयार है।
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