आगरालीक्स… बुध पुष्य नक्षत्र का कल 24 मई को शुभ संयोग बन रहा है। मैरिज सीजन में सोना, जेवरात की खरीद करना शुभदायी होगा। जानें पुष्य नक्षत्र के बारे में..
पुष्य नक्षत्र होता है सर्वश्रेष्ठ

27 नक्षत्रों में से एक पुष्य नक्षत्र को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। पुष्य नक्षत्र संपन्नता का सूचक है। पुष्य नक्षत्र में सोना, चांदी की खरीदारी करने से परिवार में समृद्धि, संपन्नता बढ़ती है।
वर-वधू के लिए सोना खरीदना शुभ
24 मई को बुध पुष्य नक्षत्र का संयोग बन रहा है। इस दिन विवाह की तैयारी के लिए वर-वधु के लिए सोना, जेवरात की खरीद करना शुभदायी होगा।
29 जून से चातुर्मास, शुभ कार्यों पर रहेगी रोक

श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान एवं गुरु रत्न भंडार वाले ज्योतिषाचार्य पंडित हृदय रंजन शर्मा के अनुसार अगले महीने 29 जून से चातुर्मास प्रारंभ हो जाएगा। विवाह मुहूर्त पर रोक लग जाएगी। इससे पूर्व के मुहूर्तों में होने वाले विवाह के लिए 24 मई को पड़ रहे बुध पुष्य नक्षत्र में खरीदारी करना श्रेष्ठ होगा।
पुष्य नक्षत्र में की गई खरीदारी से समृद्धि बढ़ती है। चातुर्मास प्रारंभ होने से पहले पुष्य नक्षत्र में हर तरह का शुभ कार्य किया जा सकता है
बुध पुष्य नक्षत्र योग कब से कब तक
24 मई को 3.06 बजे से पुष्य नक्षत्र प्रारंभ होगा और 25 मई को 5.54 बजे तक रहेगा।
इन वस्तुओं की भी कर सकते हैं खरीद
इस दौरान सोना, चांदी, हीरा, मोती एवं अन्य जवाहरात, इलेक्ट्रानिक्स, तांबे की मूर्तियां फर्नीचर, किचन सामग्री की खरीदारी, गृह प्रवेश, व्यवसाय, जनेऊ संस्कार आदि संपन्न करना फलदायी होगा।
इस नक्षत्र में जन्मे लोग होते हैं परोपकारी
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुल 27 नक्षत्र होते हैं। इनमें से पुष्य नक्षत्र आठवें स्थान पर आता है। पुष्य नक्षत्र का स्वामी ग्रह बृहस्पति और स्वामी शनि है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले परोपकार स्वभाव के होते हैं, वे हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहते हैं। अपने पुरुषार्थ के बल पर सफलता प्राप्त करते हैं। भाग्यशाली होते हैं।
27 नक्षत्रों के बारे में जानें विस्तार से

इस फ़ोटो के चारों ओर तीन घेरे बने हुए हैं, जो सबसे पहला घेरा है उसमें 27 नक्षत्रों के नाम हैं और उनके पौधों के भी नाम साथ में लिखे हुए हैं। दूसरे घेरे में 12 राशियों के नाम लिखे हैं। साथ में उनके पौधों के नाम भी लिखे हुए हैं। तीसरे घेरे में नौ ग्रहों के नाम लिखे हैं और उनसे संबंधित पेड़ पौधों के नाम भी लिखे हुए हैं। जहाँ पर पेड़ पौधे जड़ी बूटी और वृक्ष के नाम लिखे हुए हैं तो उनमें उन नक्षत्रों का या उन राशियों का या उन ग्रहों का वास होता है। यदि हम उन पर पौधों जड़ी बूटियों या वृक्षों की पूजा करते हैं या उनको हम रतन की तरह धारण करते हैं, तब भी हमें वे जड़ी बूटियाँ पेड़ पौधे वृक्ष लाभ प्रदान करते हैं।
ये हैं 27 नक्षत्र

अश्विनी, भरणी, पूर्वा फाल्गुनी, मघा, रोहिणी, आर्द्रा, पुष्य, पुनर्वसु, उत्तर फाल्गुनी, चित्रा, अश्लेषा, हस्त, स्वाति, उत्तराषाढ़ा, ज्येष्ठा, अभिजीत, उत्तर भाद्रपद, विशाखा, शतिभिषा, कृतिका, मृगशिरा, श्रवण, रेवती, पूर्व भाद्रपद, धनिष्ठा, अनुराधा, मूला
इस साल के पुष्य नक्षत्र
इस साल 2023 में रवि पुष्य नक्षत्र 8 जनवरी, रवि पुष्य 5 फरवरी, शनि पुष्य 4 मार्च, शुक्र पुष्य 31 मार्च, शुक्र पुष्य 28 अप्रैल को पड़ा। अब अगले छह महीनों में बुध पुष्य 24-25 मई, बुध पुष्य 21 जून, बुध पुष्य 19 जुलाई, सोम पुष्य 11 सितंबर, रवि पुष्य 8 अक्टूबर, रवि पुष्य 5 नवंबर, शनि पुष्य 2 दिसंबर और शुक्र पुष्य का संयोग 29 दिसंबर को बनेगा।