आगरालीक्स…25 जुलाई से शुरू हो रहे चातुर्मास. 119 दिन तक भगवान विष्णु करेंगे योगनिद्रा. जानिए कब से शुरू होगा सावन का महीना, रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी, पितृपक्ष, नवरात्रि, दशहरा की तारीखें भी जानें
ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी के अनुसार सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र माने जाने वाले चतुर्मास की शुरुआत संवत 2083 आषाढ़ शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि 25 जुलाई 2026, शनिवार से हो रही है। आषाढ़ शुक्ल देवशयनी एकादशी के दिन से शुरू होकर यह अवधि कार्तिक शुक्ल पक्ष दशमी 20 नवंबर 2026, शुक्रवार को कार्तिक शुक्ल देवउठनी एकादशी तक रहेगी। इस तरह इस बार चतुर्मास कुल 119 दिनों का होगा।क्या है चतुर्मास और क्यों है इसका महत्व ?
'चतुर्मास' का शाब्दिक अर्थ है 'चार महीने'। हिंदू कैलेंडर के अनुसार इसमें श्रावण, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक मास शामिल होते हैं। पौराणिक मान्यता है कि देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु राजा बलि के आग्रह पर पाताल लोक में जाकर चार महीने के लिए योगनिद्रा में लीन हो जाते हैं। इस दौरान सृष्टि का संचालन भगवान शिव के हाथों में रहता है।
इन्हीं कारणों से चतुर्मास में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, जनेऊ जैसे सभी मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। यह समय पूरी तरह से भक्ति, साधना, जप-तप, व्रत और दान-पुण्य के लिए समर्पित होता है। शास्त्रों के अनुसार इस दौरान किए गए शुभ कार्यों का फल सामान्य दिनों से कई गुना मिलता है।
चतुर्मास 2026: प्रमुख व्रत-त्योहारों की पूरी लिस्ट-
ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी ने बताया की इन 4 महीनों में सावन से लेकर कार्तिक तक साल के कई बड़े पर्व आएंगे
सावन सोमवार व्रत: पूरे माह भगवान शिव की विशेष पूजा
हरियाली तीज: 30 जुलाई 2026
नाग पंचमी: 17 अगस्त 2026
रक्षाबंधन: 28 अगस्त 2026
भाद्रपद मास - उत्सवों का महीना -
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी: 4 सितंबर 2026
गणेश चतुर्थी: 14 सितंबर 2026 से 10 दिन का गणेशोत्सव • अनंत चतुर्दशी: 27 सितंबर 2026
आश्विन मास - शक्ति उपासना -
पितृ पक्ष/श्राद्ध: 28 सितंबर से 12 अक्टूबर 2026
शारदीय नवरात्रि: 11 अक्टूबर से 19 अक्टूबर 2026
दशहरा/विजयादशमी: 20 अक्टूबर 2026
करवा चौथ: 1 नवंबर 2026
कार्तिक मास - दीपोत्सव -
धनतेरस: 6 नवंबर 2026
दीपावली: 8 नवंबर 2026
गोवर्धन पूजा: 9 नवंबर 2026
भाई दूज: 10 नवंबर 2026
छठ पूजा: 15 नवंबर 2026
देवउठनी एकादशी: 20 नवंबर 2026
20 नवंबर से शुरू होंगे मांगलिक कार्य -
देवउठनी एकादशी स्मार्त (गृहस्थ) वालो के लिए 20 नवंबर 2026 को है तथा 21 नवंबर को वैष्णव निम्बार्क वालो के लिए है, इस दिन भगवान विष्णु के जागने के साथ ही चतुर्मास समाप्त होगा और मांगलिक कार्यों पर लगी रोक हट जाएगी।
चतुर्मास के बाद पहला विवाह मुहूर्त:
20 नवंबर 2026, शुक्रवार से शहनाइयां बजनी शुरू हो जाएंगी। पंचांग के अनुसार नवंबर के अंत और दिसंबर में विवाह के कई शुभ लग्न हैं। ज्योतिषाचार्य हृदय रंजन शर्मा जी के अनुसार सटीक मुहूर्त के लिए वर-वधू की कुंडली मिलान कराना आवश्यक है।
चतुर्मास में क्या करें, क्या न करें -
करें: मंदिर में झाडू लगाना, दीप-धूप करना, तुलसी पूजन, पीपल पर जल चढ़ाना, ब्राह्मणों को दान, व्रत-उपवास।
न करें: विवाह आदि शुभ कार्य, नई मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा, तामसिक भोजन