आगरालीक्स….आगरा के गोकुलपुरा, राजामंडी में 380 वर्ष पुराने सिद्धि विनायक मंदिर से निकलेगी 66वें गणेशोत्सव की भव्य शोभायात्रा. सिंधिया राजघराने से जुड़ा है मंदिर का इतिहास, 140 वर्ष प्राचीन चंदन निर्मित गणपति प्रतिमा रहेगी आकर्षण का केंद्र
गोकुलपुरा, राजामंडी स्थित ऐतिहासिक श्री सिद्धि विनायक मंदिर में 10 दिवसीय 66वें गणेश चतुर्थी महोत्सव का शुभारंभ सोमवार को भगवान गणेश की भव्य शोभायात्रा के साथ होगा। लगभग 380 वर्ष पुराने इस प्राचीन मंदिर से निकलने वाली गणेश शोभायात्रा आगरा की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। श्री गणेश चतुर्थी महोत्सव सवारी मेला विकास कमेटी, गोकुलपुरा द्वारा निकाली जा रही शोभायात्रा का उद्घाटन केंद्रीय राज्यमंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल एवं कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय करेंगे। रविवार को मंदिर परिसर में गणेशोत्सव के आमंत्रण पत्र का विमोचन किया गया।
कमेटी अध्यक्ष रजत अस्थाना ने बताया कि गोकुलपुरा का गणेश महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी परंपरा है। छह दशक से अधिक समय से लगातार आयोजित हो रहा यह महोत्सव नई पीढ़ी को भी इस प्राचीन परंपरा से जोड़ रहा है। उन्होंने बताया कि गणेशोत्सव को लेकर क्षेत्र में विशेष सजावट की गई है। शोभायात्रा मार्ग पर चार भव्य स्वागत द्वार बनाए गए हैं और रंग-बिरंगी रोशनी से पूरा क्षेत्र जगमगा रहा है। इस बार शोभायात्रा को पहले से अधिक भव्य स्वरूप देते हुए भगवान के विभिन्न स्वरूपों की आकर्षक सवारियां भी शामिल की गई हैं।
मंदिर के महंत पंडित मनीष शर्मा ने बताया कि श्री सिद्धि विनायक मंदिर का इतिहास आगरा के साथ-साथ ग्वालियर के सिंधिया राजघराने से भी जुड़ा हुआ है। भगवान गणेश का विग्रह खुदाई के दौरान एक कुएं से प्राप्त हुआ था। मंदिर की स्थापना लगभग 380 वर्ष पूर्व संवत 1700 अर्थात 1646 ईस्वी में किए जाने का उल्लेख मिलता है।
बाद में मराठा सरदार महादजी सिंधिया द्वारा वर्ष 1760 में मंदिर का पुनः जीर्णोद्धार एवं स्थापना कराई गई। महादजी सिंधिया के आगरा प्रवास के दौरान मंदिर में नियमित रूप से पूजा-अर्चना होती थी। उन्होंने मंदिर परिसर में पीपल का वृक्ष भी लगाया था। इसी कारण यह मंदिर मराठा और गुजराती (नागर) समाज के परिवारों की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया।
मंदिर की सेवा-पूजा एवं नियमित खर्च के लिए सिंधिया शासन की ओर से प्रतिदिन आठ आना की व्यवस्था किए जाने संबंधी ऐतिहासिक सनद भी मंदिर के पुजारी के पास सुरक्षित होने की जानकारी दी जाती है। मंदिर की सबसे खास परंपराओं में गणेश चतुर्थी की शोभायात्रा शामिल है। बताया जाता है कि महादजी सिंधिया ने शाही संरक्षण में गणेश चतुर्थी के अवसर पर गणेश शोभायात्रा की शुरुआत कराई थी। यह परंपरा वर्ष 1860 तक जारी रही। बाद में एक हमले के कारण शोभायात्रा बंद हो गई, जिसे स्वतंत्रता के बाद वर्ष 1959 में पुनः प्रारंभ किया गया। तभी से यह परंपरा लगातार आगे बढ़ रही है।
मंदिर के महंत पं. मनीष शर्मा ने बताया कि पिछले 65 वर्षों से लगातार मंदिर से गणेशजी की भव्य शोभायात्रा निकाली जा रही है। शोभायात्रा में शामिल होने वाली चंदन निर्मित गणपति प्रतिमा लगभग 140 वर्ष प्राचीन है। 66वें वर्ष में शोभायात्रा को और आकर्षक बनाने के लिए विभिन्न देवी-देवताओं की सवारियों को भी शामिल किया गया है। उन्होंने बताया कि गणेश महोत्सव के दौरान मंदिर परिसर में 10 दिन तक धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम, भजन संध्या सहित विभिन्न आयोजन होंगे। 15 सितंबर को विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रसादी ग्रहण करेंगे। 25 सितंबर को भगवान गणेश की प्रतिमा का विधि-विधान से विसर्जन किया जाएगा। आमंत्रण पत्र विमोचन के अवसर पर पं. नरेश शर्मा, जितेंद्र प्रताप सिंह सेंगर, उमेश उपाध्याय, सौरभ वर्मा, अतुल गौतम, आशु अग्रवाल, विजय यादव, प्रमोद गौतम, कृष्णा वर्मा, कृष्णकांत शास्त्री आदि उपस्थित रहे।