आगरालीक्स…शरद पूर्णिमा का चंद्रोदय सर्वार्थ सिद्धि योग में होगा. चंद्रमा 99.6% प्रकाशित रहेगा. जानिए चंद्रोदय का समय और चांदनी रात में खीर रखने का समय
पंचांग के अनुसार, शरद पूर्णिमा के लिए अश्विन शुक्ल पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर रविवार को दिन में 11 बजकर 55 मिनट पर शुरू होगी. इस तिथि का समापन 26 अक्टूबर सोमवार को सुबह 9 बजकर 41 मिनट पर होगा. ज्योतिषाचार्य हृदय रंजन शर्मा ने बताया की उदयातिथि के आधार पर अश्विन पूर्णिमा तिथि 26 अक्टूबर को होगी, उस दिन पूर्णिमा का स्नान और दान किया जाएगा, लेकिन शरद पूर्णिमा का पर्व एवं व्रत 25 अक्टूबर रविवार को ही रखा जाएगा।
शरद पूर्णिमा के दिन रवि योग सुबह में 6 बजकर 28 मिनट से शुरू होगा और शाम को 7 बजकर 22 मिनट तक रहेगा. वहीं उस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग शाम को 7 बजकर 22 मिनट से बनेगा और अगले दिन 26 अक्टूबर को सुबह 6 बजकर 29 मिनट तक रहेगा. शरद पूर्णिमा का चंद्रोदय सर्वार्थ सिद्धि योग में होगा. उस शाम 05:00 PM पर चंद्रोदय होगा. सुबह में हर्षण योग बनेगा, जो शाम 05:22 PM तक रहेगा, उसके बाद वज्र योग बनेगा. उस दिन रेवती नक्षत्र प्रात:काल से लेकर शाम 07:22 PM तक है, फिर अश्विनी नक्षत्र होगा. ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा ने बताया की 25 अक्टूबर रविवार को अलीगढ़ में चंद्रोदय शाम 4:53 बजे होगा। उस दिन चंद्रमा 99.6% प्रकाशित रहेगा, यानी लगभग पूर्णिमा का चाँद होगा।
शरद पूर्णिमा 2026 चांद में खीर रखने का समय –
शरद पूर्णिमा को चंद्रोदय शाम को जल्द ही हो जाएगा, लेकिन उस समय आप खीर बनाकर बाहर नहीं रख सकते हैं. शरद पूर्णिमा की रात उस समय खीर रखते हैं, जब चंद्रमा पूर्ण रूप से निकलकर चमक रहा हो और अपनी शीतलता से पृथ्वी को शीतल कर रहा हो. इसलिए सभी लोग 25 अक्टूबर रविवार को ही शरद पूर्णिमा पर आप रात 9 बजे के बाद खीर को चंद्रमा की चांदनी में रखें. खीर को इस तरह से रखें कि उसमें चंद्रमा की किरणें पड़ें. खीर को रातभर रखकर सुबह में उसका सेवन करते हैं.
शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की पूजा क्यों की जाती है ?
शरद पूर्णिमा को मां लक्ष्मी की आराधना के लिए भी विशेष माना जाता है. ज्योतिषाचार्य पं. प्रवेश रंजन शर्मा जी ने बतया की धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं, जागकर उनकी पूजा करने वाले भक्तों पर कृपा बरसाती हैं. इसी मान्यता से इस पर्व का एक नाम कोजागरी पूर्णिमा पड़ा है. कोजागरी शब्द का संबंध जागने से माना जाता है. इस दिन श्रद्धालु शाम के समय घर की साफ-सफाई करते हैं, पूजा स्थल सजाते हैं. दीपक जलाकर मां लक्ष्मी की आराधना करते हैं. मां लक्ष्मी को कमल का फूल, फल, मिठाई और खीर अर्पित की जाती है. इसके बाद लक्ष्मी मंत्र, लक्ष्मी चालीसा या अन्य धार्मिक पाठ किए जा सकते हैं. मां लक्ष्मी की पूजा के दौरान घर में सुख-समृद्धि, शांति और आर्थिक स्थिरता की कामना की जाती है. कई लोग इस दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान भी करते हैं. धार्मिक मान्यताओं में दान को पुण्य कर्म माना गया है.
अश्विन पूर्णिमा के अगले दिन से शुरु होगा पवित्र कार्तिक मास –
शरद पूर्णिमा के बाद कार्तिक का महीना शुरू होता है। इस पवित्र महीने में स्नान, दान, उपवास और पूजा-पाठ से जुड़ी कई परंपराएं हैं। इसमें भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कार्तिक के महीने में ये कार्य करने से शुभ फल मिलते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। कार्तिक महीने में आने वाली ‘देवोत्थान एकादशी’ के दिन ‘चातुर्मास’ का समापन होता है, जिसके साथ ही शुभ और मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाती है। ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा के अनुसार कार्तिक का पवित्र महीना 27 अक्टूबर से शुरू होगा और 24 नवंबर कार्तिक पूर्णिमा को समाप्त होगा।
