आगरालीक्स…. देश के सर्वोच्च सम्मान पद्मश्री से सम्मानित प्रख्यात शास्त्रीय संगीत गायिका प्रो. मंगला कपूर के सुरों में पीड़ा की गहराई भी है और आत्मबल की ऊंचाई भी, एसिड अटैक सर्वाइवर जिनके राग ने घाव को पीछे छोड़ दिया, समाज के लिए प्रेरणा हैं प्रो. मंगला कपूर।
बीएचयू के महिला महाविद्यालय की संगीत विभाग में प्रो. मंगला कपूर को राष्ट्रपति ने द्रोपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में पद्मश्री से सम्मानित किया। प्रो. मंगला कपूर ने कहा कि यह सम्मान मेरे दायित्व को और बढ़ता है मैं उन सबको यह सम्मान समर्पित करती हूं जिससे हमको जीवन में स्नेह मिला और मैं समाज सेवा की दिशा में संगीत साधना में और राष्ट्र के निर्माण में अपना अधिक से अधिक योगदान दूंगी इस अवसर पर उनके भाई कैलाश कपूर दिव्याग बंधु डॉक्टर उत्तम ओझा डॉक्टर पूजा दुबे एवं अन्य लोग उपस्थित रहे।
बारह साल की उम्र में प्रो. मंगला कपूर पर हुआ एसिड अटैक
प्रो. मंगला कपूर का बचपन मंदिरों के शहर वाराणसी के एक संयुक्त परिवार में बीता। घर में शिक्षा और अनुशासन को महत्व दिया जाता था। तीन बच्चों में वे इकलौती बेटी थीं। पिता 250 रुपये का मामूली वेतन पाते थे, मां गृहिणी थीं, और सीमित साधनों के बावजूद घर में स्नेह की कमी नहीं थी। लेकिन जब वे सातवीं कक्षा में थीं, एक रात करीब ढाई बजे उन पर एसिड से हमला हुआ। व्यापारिक विवाद की आग ने उनके बचपन, चेहरे और आत्मविश्वास को झुलसा दिया। रात से सुबह तक उनकी दुनिया बदल चुकी थी। उस समय उनकी उम्र महज बारह वर्ष थी।

उनका जीवन साहस, संघर्ष और साधना का अद्भुत संगम है। बाल्यावस्था में हुई अकल्पनीय हिंसा ने उनके चेहरे और बचपन को झुलसा दिया, पर उनके भीतर के स्वर को नहीं जला सकी। वर्षों तक शारीरिक पीड़ा, सामाजिक उपेक्षा और मानसिक संघर्षों से गुजरते हुए भी उन्होंने हार नहीं मानी। संगीत उनके लिए केवल कला नहीं, पुनर्जन्म बना। उनके सुरों में पीड़ा की गहराई भी है और आत्मबल की ऊंचाई भी। समय के साथ लोगों का ध्यान उनके घावों से हटकर उनके रागों पर टिक गया। आज वे केवल एक प्रख्यात शास्त्रीय गायिका नहीं, बल्कि प्रेरणा का प्रतीक हैं।