आगरालीक्स…आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में नई तकनीक से बचाई एक मां की जान. 25 साल की गर्भवती महिला का नाल गर्भाशय से बढ़ गया था आगे…अधिक रक्तस्राव का था खतरा…इस तकनीक से एसएन में मिली नई जिंदगी
आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग (OBGY) ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. विभाग की डॉक्टरों की टीम ने अपने कुशल नेतृत्व और सूझबूझ से एक बहुत ही गंभीर और जोखिम भरी गर्भावस्था की सर्जरी सफलतापूर्वक करके एक मां की जान बचाई. यह मामला था ‘प्लेसेंटा परक्रेटा’ नाम की बीमारी का, जो बच्चे के जन्म के दौरान सबसे खतरनाक स्थितियों में गिनी जाती है. इस पूरे ऑपरेशन की योजना और नेतृत्व OBGY विभाग की टीम ने ही किया, जिन्होंने ज़रूरत पड़ने पर अन्य विभागों की मदद लेकर मरीज़ की जान बचाई.
मथुरा से रेफर होकर आई थी महिला
25 वर्षीय रोगी महिला द्वितीय गर्भवती (G2), पूर्व में एक बार सिजेरियन सेक्शन की हिस्ट्री के साथ, 34 सप्ताह की गर्भावस्था में योनि मार्ग से रक्तस्राव/स्पॉटिंग की शिकायत के साथ जिला महिला चिकित्सालय (DWH), मथुरा से रेफर होकर आई. इस मरीज़ में स्थिति और भी जटिल थी क्योंकि नाल गर्भाशय से आगे बढ़कर पास के अंगों और मूत्राशय (ब्लैडर) तक पहुंच चुकी थी. भारी खून बहने का खतरा पहले ही भांपते हुए OBGY विभाग की टीम ने पूरी सर्जिकल योजना तैयार की और मामले की पूरी बागडोर संभाली. ऑपरेशन के सबसे नाज़ुक पल में OBGY टीम ने हृदय रोग विशेषज्ञों की मदद से एक खास तकनीक अपनाई, जिसे ‘एऑर्टिक कंप्रेशन’ जिसमें रक्तस्राव को नियंत्रित करने हेतु महाधमनी पर क्लैम्प लगाया गया. इसमें शरीर की मुख्य रक्त वाहिनी (एऑर्टा) को कुछ समय के लिए दबाकर पेल्विक हिस्से में खून के बहाव को नियंत्रित किया गया. इस सूझबूझ भरी रणनीति से OBGY टीम को बिना ज्यादा खून बहे, आराम से ऑपरेशन पूरा करने का मौका मिला। नतीजा यह हुआ कि मां की जान सुरक्षित बच गई और यह ऑपरेशन कामयाब रहा.
क्या होता है ‘प्लेसेंटा परक्रेटा’
गर्भावस्था के दौरान बच्चे को पोषण देने वाली नाल (प्लेसेंटा) को गर्भाशय की दीवार से जुड़ा होना चाहिए. लेकिन कुछ मामलों में यह नाल गर्भाशय में बहुत गहराई तक धंस जाती है और आसपास के अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकती है. इससे डिलीवरी के समय भारी रक्तस्राव होने का खतरा रहता है, जो मां की जान के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है. ‘प्लेसेंटा परक्रेटा’ नाम की बीमारी कहा जाता है.दुनियाभर में मातृ मृत्यु के कारणों में से लगभग 7% मामले प्लेसेंटा एक्रेटा स्पेक्ट्रम से जुड़े होते हैं.
इस टीम ने किया आपरेशन
प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग (OBGY) — मुख्य सर्जिकल टीम: प्रो. रिचा सिंह, प्रो. पूनम यादव, डॉ. अभिलाषा यादव
सहयोगी विभाग — हृदय शल्य चिकित्सा (CTVS): प्रो. अतुल गुप्ता. यूरोलॉजी: डॉ. अभिषेक पाठक, डॉ. विजय त्यागी. एनेस्थीसिया: प्रो. राजीव पुरी, डॉ अतिहर्ष मोहन अग्रवाल, डॉ. विनीता, डॉ. अमिता सिंह. टीम ने OBGY विभागाध्यक्ष (HOD) प्रो. शिखा सिंह के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया. यह सफलता दिखाती है कि प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग (OBGY) की टीम अपनी विशेषज्ञता, तैयारी और सही समय पर लिए गए फैसलों से कैसे एक मां की जान बचा सकती है। टीम ने संस्थान के प्रमुख, प्राचार्य एवं डीन प्रो. प्रशांत गुप्ता कि उनके संकाय सदस्यों को निरंतर प्रोत्साहन, मार्गदर्शन एवं सहयोग देने के लिए हृदय से आभारी है.