आगरालीक्स आगरा के आरआर मेडिकेयर एंड हार्टसेंटर कमला नगर के कार्डियोथोरेसिक वैस्कुलर सर्जन डॉ. सुशील सिंघल ने चार युवकों की बचाई जान, हार्ट अटैक के 36 साल के मरीज की बाईपास सर्जरी की। हैंडल सीने को चीरते हुए दिल तक पहुंचा, नस फटने से फेंफड़ों में भरा पांच लीटर खून, पैर कटने से बचाया। जानें जटिल सर्जरी के बारे में।
आगरा के आरआर मेडिकेयर एंड हार्ट सेंटर में पिछले 30 दिन में एक के बाद एक जटिल केस आए। कार्डियोथोरेसिक सर्जन डॉ. सुशील सिंघल के अनुसार, 18 साल के युवक का एक्सीडेंट हो गया। बाइक का हैंडल सीने को चीरते हुए दिल तक पहुंच गया, गंभीर हालत में मरीज को आरआर मेडिकेयर एंड हार्ट सेंटर में लेकर आए।
18 साल के मरीज की हार्ट सर्जरी
हाथरस रोड पर दुर्घटना में 18 साल के युवक का बाइक का हैंडल सीने को चीरते हुए दिल तक पहुंच गया। युवक के ब्लीडिंग हो रही थी, शॉक में था, मरीज को अस्पताल में भर्ती कर इमरजेंसी हार्ट सर्जरी की गई। मरीज पूरी तरह से ठीक है।

36 साल के युवक की हार्ट सर्जरी, दिन भी उड़ी रही
कार्डियोथोरेसिक सर्जन डॉ. सुशील सिंघल के अनुसार, 36 साल के युवक को हार्ट अटैक पड़ा, दिल की बड़ी नश ( बाएं तरफ मुख्य कोरोनरी धमनी) में लगभग 90 प्रतिशत ब्लॉकेज के साथ कई अन्य ब्लॉकेज थी, हार्ट अटैक पड़ने से दिल की पंपिंग क्षमता केवल 30% रह गई थी। हाई रिस्क बाईपास (कैब्ज ) की गई। नींद उड़ी रही, हार्ट सर्जरी सफल रही और मरीज पूरी तरह से ठीक
19 वर्षीय साल के युवक की खून की नस फटी, पांच लीटर निकला खून
19 साल के युवक को अचानक सांस फूलने पर जांच में हीामथोरेक्स मिला। एक्सरे सफेद हो चुका था और फेफड़े में खून भरा हुआ था। खून में आक्सीजन का स्तर 76 प्रतिशत था और बीपी कम, हीमोग्लोबिन कम होता जा रहा था। इमरजेंसी में अस्पताल में भर्ती कर छाती से भरा हुआ करीब पांच लीटर खून निकाला गया। इसके बाद छाती को खोला गया, खून की नस यानी एबरेंट आरर्टी फटी हुई थी उसे ठीक किया गया।
22 साल के युवक का पैर कटने से बचाया
22 साल के ट्रक ड्राइवर का एक्सीडेंट हो गया इससे पैर की खून की नस कट गई। तीन दिन बाद मरीज आया तो उसका पैर काला पड़ चुका था और जान बचाने के लिए पैर काटने की नौबत आ चुकी थी। मगर, पैर को बचाने के लिए प्रयास किए गए, इमरजेंसी वैस्कुलर सर्जरी प्लान की। दूसरे पैर की नस से इंटरपोजिशन ग्राफ्ट बाईपास किया गया। मरीज का पैर पूरी तरह से ठीक हो गया।
हर सेकंड कीमती, निर्णय लेना चुनौती से भरा
एक महीने में चार युवाओं की सर्जरी करने वाले आरआर मेडिकेयर एंड हार्टसेंटर कमला नगर के कार्डियोथोरेसिक वैस्कुलर सर्जन डॉ. सुशील सिंघल कहते हैं कि “कम उम्र के मरीज, अचानक आई जानलेवा बीमारी, परिवार की उम्मीदें और हर गुजरता हुआ सेकंड… ऐसे समय में निर्णय लेना किसी भी सर्जन के लिए बहुत बड़ी भावनात्मक और मानसिक चुनौती होता है।कई बार स्थिति ऐसी होती है कि अगर कुछ नहीं किया जाए तो मरीज की जान जा सकती है, लेकिन ऑपरेशन करना भी बहुत बड़ा जोखिम होता है।
ऐसे समय में मरीज और परिवार का विश्वास, पूरी टीम की मेहनत और सबसे बढ़कर ईश्वर और पूर्वजों का आशीर्वाद हमें हिम्मत देता है।
इन सभी चुनौतीपूर्ण मामलों में यथार्थ हॉस्पिटल की सीटीवीएस, ओटी, आईसीयू, वार्ड टीम और मैनेजमेंट का महत्वपूर्ण योगदान रहा।