आगरालीक्स…आगरा पहुंची शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गविष्टि यात्रा. बोले—ऐसे लोगों को सत्ता में पहुंचाएं जो गाय को माता का दर्जा दिलाए. हर नेता और हर पार्टी की यही परीक्षा
गोवंश संरक्षण एवं गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने की मांग को लेकर बीते दिनों से ज्योतिष पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी के नेतृत्व में 81 दिवसीय गाविष्ट यात्रा निकाली जा रही है. यह देशव्यापी यात्रा 3 मई को गोरखपुर से प्रारंभ हुई थी जिसका मुख्य उद्देश्य देशवासियों में गोवंश के प्रति आस्था बढ़ाना और गौ हत्या जैसे अपराध पर विराम लगाकर गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करना है जिसके लिए देश के हर जनपद में पहुंचकर लोगों के दिलों और दिमाग में गौ माता के प्रति प्रेम और समर्पण का भाव जगाना है. रविवार को यह यात्रा आगरा के पहुंची.राजपुर चुंगी स्थित परशुराम मदिर पार्क में आयोजित कार्यक्रम में अविमुक्तेश्वरानंद ने संबोधित करते हुए कहा कि हमारी यात्रा किसी पार्टी के खिलाफ नहीं है, हमारा उद्देश्य इतना है कि गाय को माता घोषित किया जाए. हम एक सरकार को हटाकर दूसरी सरकार बनाने की बात नहीं कर रहे हैं, हम केवल कंधा बदलने के लिए नहीं आए हैं. हम यह नहीं कह रहे कि पहले नागनाथ थे, अब सांपनाथ को ले आई. आजादी के 78 साल बाद भी यह वादा पूरा नहीं हो सका. उन्होंने कहा कि इस समय देश के सभी नेताओं की परीक्षा है. सबसे पहले वे औपचारिक रूप से गाय को माता घोषित करें. जो सरकार में हैं, वे सरकारी स्तर पर गाय को माता घोषित करें और जो सरकार में नहीं है वे अपनी पार्टी मे प्रस्ताव पारित कर शपथपत्र जारी करें और गाय को माता कहकर दिखाएं. हर पार्टी और हर नेता के लिए यही परीक्षा है. जो इस परीक्षा में सफल होगा, उसका नाम हम बताएंगे.
भाजपा दो गुटों में बंटीस्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार को ही देख लीजिए. गौमाता की पीड़ा समझने में वे असफल रहे. मैं लोगों को इसी जालसाजी और ढोंग से सावधान करने आया हूं. शंकराचार्यों का सम्मान सभी करते हैं लेकिन एक व्यक्ति अहंकार में चूर होकर उनका अपमान कर रहा है. ऐसा अपमान तो मुगलों और अंग्रेजों ने भी नहीं किया था. उन्होंने कहा कि भाजपा अब दो भाजपा हो गई है. एक भाजपा गाय से प्रेम करती है जबकि दूसरी गाय को माता कहने के लिए भी तैयार नहीं है. एक भाजपा संतों का सम्मान करती है और दूसरी संतों का अपमान.