आगरालीक्स…आगरा में नकली व अवैध दवाओं के सिंडिकेट पर बड़ा एक्शन. 13 बड़ी फर्मों पर शिकंजा, 58 थोक लाइसेंस निरस्त/निलंबित, तीन नई एफआईआर की प्रक्रिया शुरू. अब तक कुल 9 मुकदमे दर्ज
आगरा के फव्वारा दवा बाजार में शुक्रवार दोपहर में प्रदेश के 15 दर्जन ड्रग इंस्पेटरों की टीम ने आयुक्त खाद्य सुरक्षा औषधि प्रशासन डॉ. रोशन जैकब के निर्देशन में छापेमारी की. टीमों द्वारा आगरा के कम्बूटोला, मुबारक महल, जूता बाजार (शू मार्केट) तथा नवबिया मार्केट सहित विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में 13 संदिग्ध फर्मों पर औचक छापेमारी की गई. मोहन ट्रेडर्स, कम्बूटोला,मनी मेडिकल, मुबारक महल, नीलकंठ, कृष्णा कॉम्प्लेक्स, वंश फार्मा ,कम्बूटोला, प्रशांत मेडिकल, कम्बूटोला, पोरवाल मेडकेयर, शू मार्केट, एपी फार्मा, एचएमजी ड्रग हाउस, मुबारक महल, डॉली ड्रग हाउस, कम्बूटोला, मनु फार्मा, कोतवाली के सामने, आरडीएम फार्मास्युटिकल्स, नवबिया मार्केट, इनाया फार्मा, कम्बूटोला, नूर फार्मा, कम्बूटोला जिसमें फर्म मोहन ट्रेडर्स, कम्बूटोला,मनी मेडिकल, के परिसर पूरी तरह सील किये, तथा नीलकंठ, कृष्णा कॉम्प्लेक्सएवं मनु फार्मा, धारा 22(1)(d) के अंतर्गत रोक लगाई गई. छापे में कुल 35 संदिग्ध औषधियों के नमूने जांच एवं विश्लेषण हेतु संग्रहीत किये गए एवं नकली ड्रग सिंडिकेट में सम्मिलित फ़र्मों के कुल 14 संचालकों के विरुद्ध 03 नई प्राथमिकी दर्ज कराये जाने हेतु कोतवाली फव्वारा, आगरा में विभाग द्वारा तहरीर दी गई.मेसर्स विभोर मेडिकल ऐजेन्सी एवं सहयोगी फर्मों का संगठित गिरोह बनाकर दवा रैकेट
मेसर्स टोरेन्ट फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड द्वारा उनके बहुचर्चित उत्पाद 'Tab. Chymoral Forte' व Shelcal के नकली (Counterfeit) होने की गोपनीय शिकायत के क्रम में 7 नवंबर 2025 को मेसर्स अंशिका फार्मा (आगरा) के प्रो0 मनोज गुप्ता की जांच में पाया गया की उन्होंने विभोर मेडिकल एजेंसी से Chymoral Forte की भारी खेप (बैच नंबर 2KU6L055) खरीदी थी, जिसे कोलकाता के पाल ब्रदर्स को बेच दिया था. विभोर मेडिकल एजेंसी के मालिक संजीव कुमार गुप्ता के प्रतिष्ठान की जांच की गई , तो उनके स्टॉक रजिस्टर में अंशिका फार्मा को बेची गई दवाओं का रिकॉर्ड तो मिला, लेकिन जब इन दवाओं की खरीद के बिल देखे गए, तो वे पूरी तरह फर्जी पाए गए. विभोर मेडिकल ने कागजों में दावा किया था कि उसने ये दवाएं गोरखपुर की गुप्ता मेडिकल एजेंसी और आगरा के हर्षित ट्रेडर्स से खरीदी हैं. हालांकि, इन दोनों ही फर्मों ने किसी भी ऐसे बिल को जारी करने या दवा बेचने से साफ इनकार कर दिया. इससे यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया कि विभोर मेडिकल द्वारा प्रस्तुत किए गए खरीद के बिल जाली थे व अवैध कारोबार पर पर्दा डालने के लिए बनाया गया था.

नॉट फॉर सेल की दवाएं मिलीं
टीम ने आगरा की ही एक अन्य फर्म, वरदान मेडिकल एजेंसी की भी जांच की। इस दौरान वहां 'ज़ोस्टम-ओ' (ZOSTUM-O) टैबलेट का ऐसा बड़ा स्टॉक मिला जिस पर स्पष्ट रूप से 'ईएसआई सप्लाई नॉट फॉर सेल' (ESI SUPPLY NOT FOR SALE) लिखा था. जिसे मेडिकल स्टोर पर रखकर खुले बाजार में बेचना एक बहुत ही गंभीर कानूनी अपराध है. इसके अलावा, वरदान मेडिकल से जांच के लिए गए दवाओं के नमूनों की जब राजकीय विश्लेषक प्रयोगशाला उ0प्र0 से जांच कराई गई, तो बेहद चौंकाने वाले नतीजे सामने आए। वहां से लिए गए Chymoral Forte के एक बैच को गुणवत्ता में अधोमानक और 'एसिलॉक' (ACILOC) दवा को पूरी तरह से नकली (SPURIOUS) घोषित किया गया. निर्माता कंपनी टोरेंट फार्मा ने भी अपनी जांच के बाद लिखित रूप से पुष्टि कर दी कि ये दोनों दवाएं उनके द्वारा निर्मित नहीं हैं और ये पूरी तरह से नकली हैं.
संगठित गिरोह का हुआ पर्दाफाश
प्रकरण में वरदान मेडिकल के प्रोपराइटर अंकुर अग्रवाल ने स्वीकार किया कि उसने ये सभी नकली दवाएं विभोर मेडिकल एजेंसी के संजीव कुमार गुप्ता से बेहद कम दामों पर खरीदी थीं, जिसका उसे कोई पक्का बिल भी नहीं दिया गया था. उपरोक्त के आधार पर मेसर्स विभोर मेडिकल एजेंसी, वरदान मेडिकल एजेंसी, हर्षित ट्रेडर्स, गुप्ता मेडिकल एजेंसी और कोलकाता के पाल ब्रदर्स आपस में मिलकर एक संगठित गिरोह का खुलासा हुआ. इनके द्वारा मेडिकल स्टोर की आड़ में नकली और सरकारी कोटे की दवाओं का अवैध भंडारण व क्रय-विक्रय करके सीधे तौर पर आम जनता और मरीजों के जीवन के साथ खिलवाड़ किये जाने के दृष्टिगत मेसर्स विभोर मेडिकल ऐजेन्सी प्रो. संजीव कुमार गुप्ता, वरदान मेडिकल एजेन्सीस प्रो अंकुर अग्रवाल, हर्षित ट्रेडर्स प्रो प्रियंका बंसल, गुप्ता मेडिकल एजेन्सीस प्रो.अरुण कुमार गुप्ता व पाल ब्रदर्स, कोलकाता, के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 276, 277, 278, 316, 318 के तहत एफआईआर दर्ज की जा रही है.
21 मई 2026 को छापे के समय 'मेसर्स युग फार्मा' प्रो0 सचिन गुप्ता का औचक निरीक्षण किया गया. जांच के दौरान दुकान में इंसुलिन के इंजेक्शन बिना कोल्ड चेन के बाहर असुरक्षित पाए गए, जिन पर से मूल विवरण मिटाकर अवैध रूप से री-लेबलिंग (Re-labeling) की गई थी. युग फार्मा के संचालक से पूछताछ करने पर उसने यह माल 'शारदा फार्मा' से बिना बिल के खरीदना स्वीकार किया. जब टीम 'शारदा फार्मा' संचालक शिवम गुप्ता पर पहुंची, तो दुकान बंद मिली. प्रोपराइटर को बुलाकर जांच करने पर उसने बताया कि उसने यह माल 'आरएमडी (RMD) फार्मा' संचालक राजेश गुप्ता से लिया था. साक्ष्य छुपाने और संदिग्धता के आधार पर विभाग द्वारा उसी दिन इन तीनों दुकानों को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया था. तीनों दुकानों के स्वामियों द्वारा दी गई अर्जियों के आधार पर जब जांच हेतु इनके ताले खोले गए और 'शारदा फार्मा' के CCTV फुटेज की गहन स्क्रूटनी की गई, तो एक गंभीर वित्तीय और औषधीय अपराध सामने आया. फुटेज में साफ देखा गया कि छापे की भनक लगते ही शारदा फार्मा के प्रोपराइटर का भाई और उसका लड़का नबील खान और सोनू बघेल दुकान से भारी मात्रा में संदिग्ध दवाओं के डिब्बे और स्टॉक समेटकर पिछले दरवाजे से फरार हो गए थे. फरार चल रहे आरोपियों को एसटीएफ (STF) गाजियाबाद की टीम द्वारा धर-दबोचा गया. पूछताछ में पकड़े गए लड़कों ने स्वीकार किया की वे अस्पताल की दवाओं की चोरी मोहित गुप्ता प्रो0 महादेव गुप्ता' से अस्पताल आपूर्ति (Hospital/Government Supply) की औषधियां बिना बिल के सस्ते दामों पर अवैध रूप से खरीदते थे और इन दवाओं पर सरकारी/अस्पताल की जो पहचान 'चिप (Chippi)' या मुहर लगी होती थी, उसे ये लोग केमिकल व गोंद की मदद से मिटा देते थे. इसके बाद उन पर नया फर्जी लेबल और मनमानी एमआरपी (MRP) अंकित करके खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बिना बिल के बेच देते थे. अतः उपरोक्त 'मेसर्स युग फार्मा' प्रो0 सचिन गुप्ता, 'शारदा फार्मा' संचालक शिवम गुप्ता व नितिन गुप्ता 'आरएमडी (RMD) फार्मा' संचालक राजेश गुप्ता, मोहित गुप्ता प्रो0 महादेव फार्मा' व हितेन्द्र अग्रवाल के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 276, 277, 278, 316, 318 के तहत एफआईआर दर्ज की जा रही है.
मेसर्स वी.ए. मेडिकोज, रुद्रा एवं भगवती मेडिकल द्वारा नकली दवाओं का विक्रय व री-लेबलिंग किया जाना
01 जुलाई से 3 जुलाई तक निम्न फ़र्मों का निरीक्षण औषधि निरीक्षकों द्वारा किया गया । मेसर्स वी.ए. मेडिकोज के निरीक्षण के दौरान बहुचर्चित कंपनियों की गंभीर औषधियां—Tab. Jardiance, Telma-H, Thyrox Tab. एवं Gluconorm PG-2 भंडारित पाई गईं, जिनके क्रय बिल (बीजक) पार्टनर शोभित अग्रवाल प्रस्तुत नहीं कर सके. सघन अवलोकन में पाया गया कि इन दवाओं के मूल लेबल हटाकर पुनः नए लेबल लगाए गए थे. सुरक्षा जांच के तहत Telma-H दवा पर UV Light Reflect नहीं हुई, जिससे प्रथम दृष्टया इसके पूर्णतः नकली (Counterfeit) होने की पुष्टि हुई। इसके अतिरिक्त दुकान के कोने से फटे गत्तों में पुरानी व खुली हुई (ओपन मोनोकार्टन) दवाएं बरामद हुईं. शोभित अग्रवाल प्रो0 मेसर्स वी.ए. मेडिकोज ने दावा किया कि ये दवाएं उसे मेसर्स हर्षित ट्रेडर्स ने बिना बिल के दी थीं, जबकि विभाग नकली दवाओं के चलते 16.06.2026 को ही हर्षित ट्रेडर्स का लाइसेंस निरस्त कर चुका था. प्रकरण में बिलों के सत्यापन में यह ज्ञात हुआ कि इस सिंडिकेट द्वारा 30.01.2026 को नकली दवाओं के कारण विभाग द्वारा निरस्त की जा चुकी मेसर्स वरदान मेडिकल ऐजेन्सी जिसके स्वामी अंकुर अग्रवाल है, के पुराने बिलों का अवैध इस्तेमाल किया जा रहा था. अंकुर अग्रवाल ने निरस्तीकरण के बाद भी रु1 करोड़ 88 लाख की दवाओं की कागजी बिलिंग की. उसने पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने पूर्व में विभोर मेडिकल ऐजेन्सी के प्रो0 संजीव गुप्ता से बिना बिल के नकली Chymoral Forte दवाएं कम दाम में खरीदी थीं. विधिक जांच से बचने के लिए उसने जानबूझकर अपने लैपटॉप को ट्रक के नीचे कुचलकर साक्ष्य नष्ट करने का झूठा बहाना बनाया. दवाओं का भौतिक रूप से कोई परिवहन नहीं किया गया.
आगरा में नकली व अवैध दवा सिंडिकेट पर कार्रवाई में अब तक की गई कार्यवाही:-
जनपद आगरा में अबतक रु 3.63 करोड़ से अधिक मूल्य की अवैध, नकली और सरकारी/डिफेन्स सप्लाई की औषधियां सीज की गई जिसमें मई 2026 में अभियान में 'ज्योति ड्रग हाउस' के अवैध गोदामों से रु 2.5 करोड़ की इंसुलिन, वैक्सीन व डिफेन्स/ESI सप्लाई की दवाएं बिना कोल्ड-चेन के भंडारित मिलीं. वहीं, 'श्री मेडिकल एजेंसीज' से रु 50 लाख की नकली 'Oxalgin DP' जब्त हुई. इसका अंतर-राज्यीय नेटवर्क अलीगढ़ होते हुए रुड़की (उत्तराखंड) की 'Leroi Pharmaceuticals' तक जुड़ा मिला, जहां छापा मारकर नकली पैकेजिंग सामग्री जब्त की गई। जून 2026 अभियान में 'ब्राइट फार्मा' संचालक के आवास पर रु 5.20 लाख की जीवनरक्षक व सरकारी दवाओं पर अवैध री-लेबलिंग (मूल्य री-प्रिंट) पकड़ी गई। इसके अलावा सी.एफ. इंटरप्रयसीस (स्वतः निरस्त गोदाम का उपयोग), सुमित माधवानी और सुमित गुप्ता के अवैध गोदामों पर छापेमारी कर कुल रु 67 लाख मूल्य की अवैध दवाएं व फिजिशियन सैंपल्स जब्त किए गए.
जांच में अनियमितता एवं अवैध कारोबार में संलिप्तता के आधार पर 58 थोक फर्मों के लाइसेंस निरस्त/निलंबन की कार्यवाही की गई. इस पूरे सिंडिकेट के खिलाफ कुल 06 नामजद एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं तथा उपरोक्त वर्णित 03 एफआईआर आज दर्ज कराई जा रही है.