आगरालीक्स …आगरा में एडीए ने बुनियादी सुविधाएं विकसित किए बिना बिल्डर को कॉलोनी विकसित करने की अनुमति दे दी, एडीए पर 10 लाख का जुर्माना, सर्वे में 62 कॉलोनियों में न सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट हैं, न सड़क और न कॉलोनी।
शमसाबाद रोड स्थित नालंदा टाउन का सीवेज खुले में बहाए जाने पर एनजीटी ने देवांशु बोस की याचिका पर एडीए ने 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था, एडीए ने 25 लाख रुये जमा कर दिए थे, देवांशु बोस ने नालंदा टाउन के अलावा बरौली अहीर और रजरई की 62 कॉलोनियों की सूची भी एनजीटी को उपलब्ध कराई थी, इस पर एनजीटी ने एडीए पर दो करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था, जुर्माने से राहत पाने के लिए एडीए ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
एडीए को 10 लाख रुपये जुर्माना जमा करने के आदेश
इस मामले में जुर्माना जमा न करने के लिए एडीए ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की बेंच ने शुक्रवार को सुनवाई की, कोर्ट ने एडीए को राहत देने से इन्कार कर दिया। दो सप्ताह में 10 लाख रुपये जमा करने के आदेश दिए हैं। इससे पहले 25 लाख रुपये जमा किए गए थे, इस तरह 35 लाख रुपये से इन कॉलोनियों में सीवेज ट्रीटमेंट की सुविधा विकसित की जाएगी। एडीए को इन कॉलोनियों की बुनियादी सुविधाएं विकसित करने के लिए लिए भी प्लान देना होगा।