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Agra News: There should be electronic monitoring of roads : Supreme Court

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आगरालीक्स…ओवर स्पीडिंग से होती हैं 70% से अधिक एक्सीडेंट में मौतें. अच्छे एक्सप्रेसवे ओर हाईवे भी बन रहे हैं जानलेवा…सुप्रीम कोर्ट ने कहा—सड़कों की होगी अब इलैक्ट्रोनिक निगरानी. आगरा के वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन ने पेश की थी सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट पेश

देश में होने वाली एक्सीडेंट्स में मौत के मामले में 70 प्रतिशत से अधिक मौतें ओवर स्पीडिंग से होती हैं. यमुना एक्सप्रेस वे और आगरा—लखनऊ एक्सप्रेस वे जैसे बेहतरीन हाइवों पर भी एक्सीडेंट्स में मौतों की संख्या सबसे अधिक ओवर स्पीडिंग के कारण है, इन मार्गों पर इलैक्ट्रॉनिक निगरानी होने के बावजूद वाहनों के चालान नहीं किए जाते. आगरा के सीनियर अधिवक्ता केसी जैन द्वारा सुप्रीम कोर्ट में वर्ष 2021 में एक्सीडेंट को लेकर रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी जिस पर सुपी्रम कोर्ट ने अपना आदेश सुनाया.

सीनियर अधिवक्ता केसी जैन

वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन द्वारा वर्ष 2021 में एक्सीडेंट की रिपोर्ट पेश करने वाले प्रार्थना पत्र आईए सं 33035 पर 6 जनवरी 2023 को पारित अपने आदेश में कहा कि ”धारा 136ए के प्रावधानों को शामिल करने के लिए मोटर वाहन अधिनियम 1988 को 2019 के अधिनियम द्वारा संशोधित किया गया था. धारा 136ए के द्वारा इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और सड़क सुरक्षा के लिए प्रावधान किए गए हैं. राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य राजमार्गों, सड़कों या राज्य के भीतर किसी शहरी शहर में सड़क सुरक्षा को लागू करना. धारा 136ए की उपधारा (2) के प्रावधानों के अनुसरण में केंद्र सरकार द्वारा नियम बनाए गए हैं जो कि 11 अगस्त 2021 से लागू हो गए हैं. मुद्दा अब राज्य विशिष्ट कार्यान्वयन दिशानिर्देशों को तैयार करके धारा 136ए के प्रावधानों के उचित रूप से लागू करने के बारे में है.”

न्यायालय ने सड़क सुरक्षा कमेटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति सप्रे से भी अनुरोध किया कि वह दो सप्ताह की अवधि के भीतर एक बैठक बुलाएं. न्यायमित्र द्वारा उसके बाद न्यायालय को रिपोर्ट प्रस्तुत की जाये ताकि धारा 136ए के प्रावधानों को प्रत्येक राज्य की आवश्यकताओं और अत्यावश्यकता को ध्यान में रखते हुए देश भर में लागू किया जा सके. याचिकाकर्ता अधिवक्ता जैन को कमेटी के समक्ष भी प्रस्तुत होने का अवसर मौखिक रूप से दिया गया.

याचिकाकर्ता अधिवक्ता केसी जैन द्वारा सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा गया कि इलैक्ट्रोनिक निगरानी के माध्यम से राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य के राजमार्गों और शहरों की सड़क सुरक्षा सुगमता से सम्भव हो सकेगी. केन्द्र सरकार के सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय द्वारा अभी हाल में दिनांक 12 दिसम्बर 2022 को जारी की गयी रोड एक्सीडेन्ट रिपोर्ट-2021 से यह खुलासा हुआ है कि ओवर स्पीडिंग के कारण हुये हादसों में वर्ष 2021 में 40,450 व्यक्तियों की मौत हो गयी जो कि सड़क हादसों में हुयी कुल मौतों का 72.2 प्रतिशत था. यही नहीं, वर्ष 2021 में राष्ट्रीय राजमार्गों और राज्य के राजमार्गों में हादसों में मृत्यु हुयी, जो कि कुल हुयी मौतों का 60 प्रतिशत थीं. इस प्रकार ओवर स्पीडिंग और राष्ट्रीय राजमार्ग व राज्य के राजमार्ग ही मौत के कारण बने जिन पर इलैक्ट्रोनिक निगरानी हादसों को कम कर सकती है.

अधिवक्ता जैन द्वारा यह भी कहा गया कि जहां एक ओर वर्ष 2020 में रजिस्टर्ड मोटर वाहनों की संख्या 32 करोड़ 63 लाख हो गयी और सड़कों की कुल लम्बाई 63 लाख 31 हजार किलोमीटर हो गयी, ट्रैफिक कर्मियों की संख्या वर्ष 2017 की रिपोर्ट के अनुसार पूरे देश में 72 हजार से कुछ ही अधिक थी. केवल टैक्टनोलॉजी ही सड़क हादसों को रोकने के लिए कारगर हो सकती है लेकिन उसके लिए भी यह जरूरी होगा कि ओवर स्पीडिंग के डाटा के आधार पर शत प्रतिशत चालान हों. अधिवक्ता जैन द्वारा सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त न्यायमूर्ति सप्रे की कमेटी के समक्ष यमुना एक्सप्रेसवे व लखनऊ एक्सप्रेसवे के उदाहरणों को भी शीघ्र ही प्रस्तुत किया जायेगा जहां इलैक्ट्रोनिक निगरानी होने के बावजूद भी वाहन 150-160 किलोमीटर की स्पीड से दौड़ते हुए आप कभी भी देख सकते हैं. उन्होंने प्रश्न उठाया कि आखिर क्यों नहीं होते हैं वहां चालान? अच्छे एक्सप्रेसवे ओर हाईवे आखिर क्यों बन रहे हैं जानलेवा?

सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपने आदेश में धारा 215-बी का भी उल्लेख किया गया जिसके द्वारा राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड के गठन का प्रावधान है जिसकी सलाहकार क्षमता है। न्यायालय द्वारा इस मामले में अब 6 फरवरी 2023 सुनवाई हेतु लगायी गयी है।

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