आगरालीक्स…आगरा के शांति सभागार में शुरू हुआ गणधर वलय विधान. पहले दिन घटयात्रा निकली. भगवान महावीर के जयकारों से गूंजा मार्ग
दिगंबर जैन परिषद के तत्वाधान मे एमडी जैन इन्टर कालेज के श्री शान्ति सभागार में आचार्य 108 श्री इन्द्रनंदी जी महाराज ससंघ एवं 57 वर्षीय संयम साधना से साधित, प.पू. सिद्धांत रत्न, भारत गौरव, गणिनी शिरोमणि आर्यिका 105 श्री विशुद्धमति माताजी, विज्ञमति माताजी ससंघ के मंगल सानिध्य में आगरा के इतिहास में गणधर वलय विधान का भव्य शुभारंभ हुआ. पल्लीवाल दिगम्बर जैन मन्दिर धूलियागंज से आज भव्य घटयात्रा का शुभारम्भ भगवान महावीर के जयकारों के साथ किया गया. धूलियागंज से प्रारम्भ होकर घटिया होते एम.डी. जैन, हरिपर्वत पर समाप्त हुई. सबसे पहले ढोल-नगाडा महिलायें 200 कलश लेकर चल रही थी और सभी इन्द्र - इंद्राणी के साथ बग्गियों पर सवार होकर सौधर्म इन्द्र यतेंद्र कुमार-अभिलाषा जैन, कुबेर राजेंद्र कुमार जैन-नीलम जैन लुहाड़िया,यज्ञनायक इन्द्र सुरेश कुमार-माया जैन, ईशान इन्द्र जिनेन्द्र कुमार-अनीता जैन, चक्रवर्ती इन्द्र सुबोध पाटनी-शची पाटनी, मोहन स्वरुप-नूतन जैन, रवि कुमार-बीना जैन, पदम चंद-प्रेमलता जैन, इन्द्र जितेंद्र कुमार-अंशु जैन, रमेश चंद-मधुलता जैन, वीरेन्द्र कुमार-पूनम जैन, राजेंद्र कुमार-विमलेश जैन थी.किशोर बैंड अपनी मधुर ध्वनि से तुम से लगी लगन भजन पर नृत्य व संगीत पर महिलाएं झूम रही थी. इसके बाद बाल ब्रह्मचारी आशीष भैया ने धार्मिक क्रियाए एवं ध्वजारोहण प्रदीप जैन और पंडाल उद्घाटन विमलेश कुमार-उषा जैन मार्शन्स, हीरालाल बैनाड़ा-बीना बैनाड़ा परिवार ने किया. मंडप उद्घाटन निर्मल मोठ्या-विमल जैन मोठ्या परिवार द्वारा किया गया, चित्र अनावरण जितेंद्र कुमार जैन, पुष्पेंद्र जैन पथिक, आशोक जैन पूर्व डिप्टी मेयर ने किया और दीप प्रज्वलन विमल कुमार सिंघई, राकेश जैन पार्षद, मनोज जैन बाकलीवाल, सुनील जैन ठेकेदार ने किया.
आर्यिका विज्ञमति माताजी ने धर्म सभा को संबोधितजिसने बात करेंगे, वे उन विश्व गुरु की, जो विश्व गुरु तारणहार हैं। उस काट की नौका पर बैठे हैं, जो स्वयं भी किनारे बहेंगे और उस नौका में जो भी अस्वार होंगे, उनको भी किनारे कर देंगे. बहुत सुंदर अवसर हम सब के बीच में है. संपूर्ण महा विद्याओं के पारगामी प्रत्यक्ष ज्ञान के स्वामी बन करके उन आठ ऋद्धियों को प्राप्त किया, जो ऋद्धियां आसानी से प्राप्त नहीं हुआ करती हैं. उग्र तप करके जिन्होंने अपने आप को देशावधि, परमावधि, सर्वावधि ज्ञान से सुसंस्कृत किया। चार बुद्धियां जिनके पास में चरणचेरी बनकर के प्रति समय विद्यमान रहती हैं. ऐसे गंधार देव जो संपूर्ण मुनि संघ के अधिपति हुआ करते थे. उन 1492 गणधर का आज हम ऐसा स्तवन करने चल रहे हैं जो स्तवन हमारे ज्ञान के ऊपर जो अज्ञान पटल है, उसको उघाड़ने में ऐसा कार्य करना होगा. उनके पास जो बीज बुद्धि है, उनके पास जो पादानुसारी ऋद्धि है, उनके पास जो संभिन्नश्रोत बुद्धि है, यह बुद्धियां अगर उनके पास ना हो, तो निश्चित है वो भगवान की वाणी को कभी झेलने में समर्थ नहीं हो सकते. कोष्ठ बुद्धि उसी प्रकार है जैसे हम अपने स्टोर में हर चीज़ को स्टोर करके रखते हैं कि आपत्ति काल में अथवा जब आवश्यकता होगी, तो तुरंत हर बाज़ार में नहीं जाना पड़ेगा.