आगरालीक्स…तुलसीदास जी के समस्त काव्यों में लोकमंगल की भावना. रामचरित मानस शुरू से अंत तक समन्वय का काव्य…आगरा के नागरी प्रचारिणी सभा में मनाई तुलसी जयंती…
नागरी प्रचारिणी सभा आगरा द्वारा आयोजित तुलसी जयंती के अवसर पर कार्यक्रम की मुख्य वक्ता केंद्रीय हिन्दी संस्थान की प्रो. बीना शर्मा ने कहा कि लोकमंगल के लिए आवश्यक है कि समाज में परस्पर प्रेमभाव हो, समन्वय की भावना हो. रामचरित मानस प्रारंभ से अंत तक समन्वय का काव्य है. जाहं परिवार के सदस्यों के बीच परस्पर प्रेमभाव, मेल भाव होता है, वहां परिवार में मंगल ही मंगल होता है.
समारोह के अध्यक्ष एंव सभा के सभापति डॉ. खुशीराम शर्मा ने कहा कि रामचरित मानस में तुलसीदास जी ने राजा और प्रजा के बीच, गुरु और शिष्य के बीच, गृहस्थी और सन्यासी के बीच विभिन्न धर्मावलम्बियों के बीच परस्पर समन्वय दिखाया है. सभा के महामंत्री प्रो. चंद्रशेखर शर्मा ने कहा कि साहित्य की रचना समाज के हित के लिए ही की जाती है और तुलसीदास जी ने समस्त काव्य लोकमंगल की भावना से ही रचा है. इसलिए उन्होंने अपने महाकाव्य का विषय राम कथा को चुना था. कथा जो सकल लोकहितकारी.
समारोह का संचालन करते हुए प्रो. कमलेश नागर ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास की भक्ति भावना मुख्य रूप से दास्य भाव और दैन्य भाव पर आधारित थी. उनकी भक्ति में बाहृय आडंबरों के लिए कोई स्थान नहीं था, बल्कि हृदय की निर्मलता और अनन्य प्रेम का प्रधान्य था.
कार्यक्रम का आरंभ स्वर कोकिला और अंतरराष्ट्रीय कवि डॉ. शशि तिवारी की सरस्वती वंदना से हुआ. अंत में सभा के उपसभापति आगरा कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. विनोद माहेश्वरी ने धन्यवाद देते हुए कहा कि रामचरित मानस सिर्फ राम की कथाभर नहीं है बल्कि राम कथा के बहाने तत्कालीन समाज का बहुत यथार्थ और सचिव चित्रण है.
इस अवसर पर डॉ. मधु भारद्वाज, नीरज जैन, डॉ. मधुरिमा शर्मा, डॉ. ब्रज बिहारीलाल वर्मा, डॉ. नीलम भटनागर, डॉ. अनार सिंह, रजनी सिंह, सुरेंद्र वर्मा, लखमीचंद, डॉ. रामेंद्र शर्मा, डॉ. अशोक अश्रु, शीलेंद्र शर्मा, दुर्गविजय सिंह, डॉ. केशव शर्मा, डॉ. यशोयष्ठा, रमेश पंडित, देवेश वाजपेयी, डॉ. शीलेंद्र कुमार वशिष्ठ, राजीव सक्सेना, रामअवतार शर्मा, नंद नंदन गर्ग आदि ने अपने विचार व्यक्त किए.