आगरालीक्स…वास्तु विशेष में जानें शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा को मजबूत करने के लिए ये उपाय…माता का सम्मान भी चंद्र उपाय का हिस्सा
आगरा के वास्तु विशेषज्ञ अंशु पारीक के अनुसार चंद्रमा को मन, भावनाओं, मानसिक शांति, माता, सुख-सुविधाओं और कल्पनाशक्ति का कारक माना जाता है। यदि आपकी कुण्डली चंद्रमा किसी भी तरह से पीड़ित है और वह आपके मनोभाव को प्रभावित करता है तो शरद पूर्णिमा से बेहतर दिन कोई नहीं इसके पाय प्रारम्भ करने के लिए। चंद्रमा कमजोर होने पर व्यक्ति का मन अस्थिर रह सकता है। छोटी-छोटी बातों को लेकर चिंता करना, निर्णय लेने में असमंजस, भावनाओं में बह जाना और एकाग्रता की कमी जैसी प्रवृत्तिय आपकी कुण्डली में चंद्रमा के पीड़ित होने के कारण हो सकती हैं।
शिव पूजन और चंद्र मंत्र का करें जाप
चंद्रमा भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान हैं। इसलिए शरद पूर्णिमा पर भगवान शिव का जलाभिषेक करना और चंद्रदेव का स्मरण करना शुभ है। शिवलिंग पर स्वच्छ जल अर्पित करें चंद्रमा के मंत्र का जाप कर सकते हैं।
चंद्र मंत्र: “ॐ सों सोमाय नमः।”
इस मंत्र का 108 बार जाप एकाग्रता और मानसिक शांति के उद्देश्य से किया जा सकता है। पूजा के समय मन को शांत रखकर प्रार्थना करें और क्रोध, आवेश तथा अनावश्यक चिंता से बचने का संकल्प लें।
दूध, चावल और सफेद वस्तुओं का दान
शरद पूर्णिमा पर जरूरतमंदों को चावल, दूध या अन्य खाद्य सामग्री दान करना शुभ है। इससे धार्मिक आस्था के साथ जरूरतमंद लोगों की सहायता भी होती है। दान अपनी सामर्थ्य के अनुसार करना चाहिए।
माता का सम्मान भी चंद्र उपाय का हिस्सा
चंद्रमा को मां का कारक ग्रह भी माना गया है। इसलिए शरद पूर्णिमा पर माता का आशीर्वाद लेना, उनकी सेवा करना और परिवार के बुजुर्गों का सम्मान करना भी चंद्रमा से जुड़े शुभ फल प्रदान करता है। शरद पूर्णिमा का संदेश केवल चंद्रमा की पूजा तक सीमित नहीं है। यह मन को शांत रखने, संबंधों में मधुरता लाने, जरूरतमंदों की सहायता करने और जीवन में संतुलन बनाए रखने का अवसर भी है।