
कार्यशाला में मुख्य अतिथि डॉ. अनुपम छाबड़ा, मुंबई ने कहा कि रक्त अवयवों और सिंगल डोनर प्लेटलेट्स से डब्ल्यूबीसी निकाल देने से कई फायदे हैं। इससे मरीजों को फ्रेबाइल नॉन हीमोलिटिक ट्रांसफ्यूजन रिएक्शन बुखार नहीं आता है, ऑटो एंटीबॉडीज डेवलप होने की आशंका नहीं रहती है। इसके साथ ही कई अन्य फायदे भी हैं। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सुभाष चंद्र गुप्ता ने कहा कि ब्लड डोनर की पूरी जांच और उसका ब्योरा लेने के बाद ही मरीज को ब्लड चढ़ाना चाहिए। एक चूक से मरीज की जान पर बन सकती है। एसएन की स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सरोज सिंह ने कहा कि होल ब्लड के बजाय कंपोनेंट चढ़ाने के लिए जागरूक किया जाना चाहिए।
इस दौरान वरिष्ठ न्यूरो सर्जन डॉ. आरसी मिश्रा, डॉ. संदीप अग्रवाल, संस्था के अध्यक्ष विष्णु भगवान गोयल, संरक्षक अशोक अग्रवाल फरह वाले, निदेशक अशोक अग्रवाल, महासचिव संजीव कुमार जैन डॉ. आरपी मंगल, सहायक औषधि आयुक्त पीके मोदी, मीडिया प्रभारी कुमार ललित आदि मौजूद रहे।
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