आगरालीक्स….नाग पंचमी और सावन का तीसरा सोमवार कल. 23 साल बाद 8 शुभ संयोग में एक साथ पड़ेंगे नाग पंचमी और सावन सोमवार, जानिए क्यों है खास –
देवों के देव महादेव का अतिप्रिय श्रावण मास इस बार एक अद्भुत और दुर्लभ महासंयोग लेकर आया है। सावन का तीसरा सोमवार और नाग पंचमी एक ही दिन पड़ रहे हैं। यह संयोग 23 वर्ष बाद बना है, जो धार्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी माना जा रहा है। ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी के अनुसार इससे पहले वर्ष 2003 में नागपंचमी सोमवार को पड़ी थी और अब फिर 17 अगस्त 2026 को यही योग बन रहा है। सोमवार का दिन स्वयं भगवान शिव को समर्पित है और नाग देवता शिव के गले का हार हैं, इसलिए इस दिन का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 51 मिनट से सुबह 8 बजकर 29 मिनट तक रहेगा. यानी श्रद्धालुओं को पूजा के लिए करीब 2 घंटे 37 मिनट का शुभ समय मिलेगा।
तीसरे सावन सोमवार पर बनेंगे 08 शुभ संयोग –
ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी ने बताया की 17 अगस्त को सावन सोमवार के साथ शुभ योग, रवि योग, नाग पंचमी, सिंह संक्रांति, स्कंद षष्ठी, कर्क राशि में त्रिग्रही योग, हंसराज योग और बुधादित्य योग जैसे कई महत्वपूर्ण संयोग बन रहे हैं। इनका संयोग इस दिन की धार्मिक महत्ता को और बढ़ा रहा है।
शुभ योगः तीसरे सावन सोमवार की शुरुआत शुभ योग से होगी। यह योग 18 अगस्त की रात 3 बजकर 29 मिनट तक प्रभावी रहेगा। इसके बाद शुक्ल योग प्रारंभ हो जाएगा। शुभ योग में पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठान और नए कार्यों की शुरुआत करना मंगलकारी माना जाता है।
रवि योगः 17 अगस्त को सुबह 5 बजकर 51 मिनट से रवि योग शुरू होगा और सुबह 8 बजकर 4 मिनट तक रहेगा। ज्योतिष में रवि योग को बाधाओं और नकारात्मक प्रभावों को दूर करने वाला शुभ योग माना जाता है।
सिंह संक्रांतिः तीसरे सोमवार के दिन सुबह 8 बजकर 3 मिनट पर सूर्य कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। इसी समय सिंह संक्रांति होगी। इसका पुण्यकाल सुबह 5 बजकर 51 मिनट से 8 बजकर 4 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में स्नान, दान और धार्मिक कार्य करने से पुण्य प्राप्त होने की मान्यता है।
स्कंद षष्ठीः 17 अगस्त को शाम 5 बजे के बाद षष्ठी तिथि शुरू होगी। प्रदोष काल में स्कंद षष्ठी की पूजा की जाती है। इस अवसर पर भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय की आराधना होती है। सावन सोमवार और स्कंद षष्ठी का संयोग शिव परिवार की पूजा के लिहाज से विशेष माना जा रहा है।
हंसराज योगः इस समय देवगुरु बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में स्थित हैं। गुरु की इस स्थिति के कारण हंसराज योग का निर्माण हो रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं में इसे ज्ञान, उन्नति, सफलता और शुभ परिणाम देने वाला योग माना जाता है।
बुधादित्य योगः कर्क राशि में सूर्य और बुध की युति से बना बुधादित्य योग 17 अगस्त को सुबह 8 बजकर 3 मिनट तक रहेगा। इसके बाद सूर्य के सिंह राशि में प्रवेश करने के साथ यह योग समाप्त हो जाएगा।
त्रिग्रही योगः कर्क राशि में सूर्य, बुध और गुरु की मौजूदगी से त्रिग्रही योग बन रहा है। हालांकि सूर्य के सुबह 8 बजकर 3 मिनट पर सिंह राशि में प्रवेश करते ही यह संयोग समाप्त हो जाएगा।
नाग पंचमी का संयोगः तीसरे सावन सोमवार के आसपास नाग पंचमी का पर्व भी पड़ रहा है, जिससे सावन के इस धार्मिक क्रम की विशेषता और बढ़ जाती है। नाग देवता की पूजा और भगवान शिव की आराधना को इस अवधि में विशेष महत्व दिया जाता है।
इस दिन क्यों खास होती है भगवान शिव की पूजा ?
सनातन धर्म में नागों का भगवान शिव से विशेष संबंध माना गया है. ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी के अनुसार भगवान शिव अपने गले में वासुकि नाग को धारण करते हैं, इसलिए नाग पंचमी के दिन शिव पूजा का महत्व और भी बढ़ जाता है. मान्यता है कि इस दिन शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और आक अर्पित करने से भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं. कहा जाता है कि इस दिन श्रद्धा से पूजा करने वाले भक्तों पर शिव और नाग देवता दोनों की कृपा बनी रहती है.
तीसरा सावन सोमवार 2026 जलाभिषेक मुहूर्त –
17 अगस्त को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 24 मिनट से 5 बजकर 8 मिनट तक रहेगा।
इसके बाद सुबह 5 बजकर 51 मिनट से 7 बजकर 30 मिनट तक अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त रहेगा।
वहीं शुभ-उत्तम मुहूर्त सुबह 9 बजकर 8 मिनट से 10 बजकर 47 मिनट तक है।
अभिजीत मुहूर्त दिन में 11 बजकर 59 मिनट से दोपहर 12 बजकर 51 मिनट तक रहेगा।
इन शुभ अवधियों में भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजा-अर्चना की जा सकती है। हालांकि धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव की पूजा या शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए किसी विशेष मुहूर्त का इंतजार जरूरी नहीं होता। श्रद्धापूर्वक किसी भी समय शिव आराधना की जा सकती है।