आगरालीक्स…राखी बांधने के सर्वोत्तम मूहूर्त. रक्षाबंधन पर सुबह, दोपहर और शाम को बन रहे तीन सबसे शुभ मुहूर्त. चंद्रग्रहण का नहीं होगा प्रभाव
इस बार रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त को मनाया जाएगा. यूं तो इस दिन चंद्रग्रहण भी रहेगा लेकिन पूरे भारत में चंद्रग्रहण नहीं दिखाई देगा. ऐसे में इसके सूतक भी मान्य नहीं होंगे. वहीं अशुभ भद्रा का साया भी इस बार रक्षाबंधन पर देखने को नहीं मिल रहा है जिसके कारण राहुकाल के डेढ़ घंटे को छोड़कर पूरे दिन बहनें अपने भाइयों को राखी बांध सकती हैं. इसमें भी कुछ सर्वोत्तम मुहूर्त हैं जिनमें राखी बांधना सबसे अच्छा रहेगा. इसकी जानकारी दे रहे हैं ज्योतिषाचार्य पंडित हृदय रंजन शर्मा जी.
रक्षाबंधन श्रावणी उपाकर्म विशेष शुक्रवार 28 अगस्त 2026 –
भद्रा – 28 अगस्त को नहीं है।
राखी बांधने का शुभ मुहूर्त –
सर्वश्रेष्ठ प्रातः काल मुहूर्त : सुबह 05:57 बजे से 09:48 बजे तक (अवधि: 3 घंटे 51 मिनट)।
अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त : सुबह 09:10 बजे से सुबह 10:29 बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त (दोपहर) : दोपहर 12:04 बजे से 12:53 बजे तक।
नोट – राहुकाल 10:30 AM – 12:03 PM इस समय राखी बांधने से बचें। भूलकर भी इस समय राखी मत बांधना।
इस वर्ष पूर्णिमा तिथि 28 अगस्त की सुबह 09:48 बजे तक ही है, इसलिए सुबह का यह समय राखी बांधने के लिए सबसे श्रेष्ठ माना गया है।
सुबह राखी नही बांध पाए तो क्या करें
कई परिवारों में नौकरी, यात्रा या अन्य कारणों से सुबह राखी बांधना संभव नहीं हो पाता। ऐसे लोगों के लिए भी राहत की बात है। ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी के अनुसार –
दोपहर – 12:39 से शाम 05:00 बजे तक
सायंकाल – 05:23 से 06:58 तक
शाम – 06:44 से रात्रि 09:02 तक
यानी सुबह का मुख्य मुहूर्त निकल जाने के बाद भी परिवार इस बार भद्रा न होने के कारण दोपहर से लेकर रात तक के समय में भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर रक्षाबंधन का पर्व मना सकता है।
चंद्रग्रहण का भारतवर्ष में नहीं पड़ेगा प्रभाव
रक्षाबंधन वाले दिन विदेशों में दृश्य खंडग्रास चंद्र ग्रहण पड़ेगा. जो भारतीय समय अनुसार 28 अगस्त 2026 श्रावण शुक्ल पक्ष पूर्णिमा के दिन प्रातः Am.8:04 से दिन में 11:22 मिनट तक विदेश में खंडग्रास चंद्र ग्रहण होगा. यह ग्रहण कनाडा ,अमेरिका, मेक्सिको, ग्रीनलैंड, कोलंबिया, सूरीनाम ,पेरू, ब्राजील, चिली ,अर्जेंटीना, रूस ,नॉर्वे, स्वीडन ,ब्रिटेन, जर्मनी ,फ्रांस, स्पेन ,इटली आदि देशों में देखा जाएगा. भारत में किसी भी स्थान से किसी भी जगह यह ग्रहण नहीं दिखाई देगा. अतः पूरे भारत वर्ष में इसके किसी भी प्रकार के सूतक पातक दोष मान्य नहीं होंगे. माताएं बहनें इस ग्रहण को लेकर ना डरे अपने दिमाग में भ्रम ना रखे. इसका कोई प्रभाव नहीं होगा.