आगरालीक्स…आगरा की रामलीला में हुआ श्रीराम का भव्य राज्याभिषेक. स्वर्ण सिंहासन पर विराजे राम, हनुमान ने सीना चीरकर दिखाए हृदय में बसे भगवान
लंका विजय के बाद अयोध्या लौटे प्रभु श्रीराम का भव्य राज्याभिषेक हुआ तो रामलीला मैदान श्रद्धा, उल्लास और जय श्रीराम के जयघोषों से गूंज उठा। स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का सर्वप्रथम राज्याभिषेक तिलक सुंदरधाम, गोवर्धन के महंत नारायण दास ने किया। लक्ष्मण जी और सीता जी को तिलक श्री रामलीला कमेटी अध्यक्ष एवं विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल और महामंत्री राजीव अग्रवाल ने किया । राज्याभिषेक की भव्य लीला और हनुमान जी की अनन्य भक्ति के भावपूर्ण प्रसंगों के साथ श्रीरामलीला के मंचन का समापन हुआ।
गुरु वशिष्ठ ने किया प्रथम तिलक, गूंज उठी रामचरितमानस की चौपाई
शुक्रवार को रामलीला मैदान में प्रभु श्रीराम के राज्याभिषेक की लीला का मंचन किया गया। वनवास की अवधि पूरी कर लंका विजय के बाद अयोध्या लौटे श्रीराम के स्वागत में समूची नगरी आनंदित थी। सभी की सहमति से प्रभु श्रीराम को राजगद्दी पर विराजमान कराया गया। गुरु वशिष्ठ की भूमिका में पंडित वेद प्रकाश प्रचेता ने मंत्रोच्चारण किया और प्रभु श्री राम का राज्याभिषेक तिलक सुंदरधाम, गोवर्धन के महंत नारायण दास ने किया। इसके बाद श्रीरामलीला कमेटी के अध्यक्ष विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, महामंत्री राजीव अग्रवाल सहित अन्य पदाधिकारियों ने प्रभु का तिलक किया। इस दौरान व्यास पीठ से गोस्वामी तुलसीदास रचित रामचरितमानस की चौपाई गूंज उठी— प्रथम तिलक बसिष्ठ मुनि कीन्हा। पुनि सब बिप्रन्ह आयसु दीन्हा॥ सुत बिलोकि हरषीं महतारी। बार बार आरती उतारी॥ चौपाई के सस्वर पाठ के बीच राज्याभिषेक का दृश्य श्रद्धालुओं को भावविभोर कर गया। प्रभु श्रीराम को राजसिंहासन पर विराजमान देखकर अयोध्यावासियों की प्रसन्नता और माताओं के वात्सल्य का सुंदर चित्रण मंचन में देखने को मिला।
हनुमान जी की अनन्य भक्ति ने मोहा मन
राज्याभिषेक की लीला के दौरान हनुमान जी ने माता जानकी से उनके मस्तक पर लगे सिंदूर के बारे में पूछा। माता सीता ने बताया कि वह प्रभु श्रीराम की प्रसन्नता और मंगलकामना के भाव से सिंदूर लगाती हैं। यह सुनकर हनुमान जी ने सोचा कि यदि थोड़े से सिंदूर से प्रभु प्रसन्न होते हैं, तो पूरे शरीर पर सिंदूर लगाने से वे और भी प्रसन्न होंगे। इसी भाव से उन्होंने अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया। इसके बाद हनुमान जी ने अपना सीना चीरकर दिखाया कि उनके हृदय में प्रभु श्रीराम और माता जानकी विराजमान हैं। इस भक्तिमय प्रसंग ने दर्शकों को भावुक कर दिया। मैदान जय श्रीराम और जय बजरंगबली के जयघोषों से गूंज उठा।
रामलीला में आज: हवन एवं स्वरूपों की विदाई
रामलीला के मीडिया प्रभारी राहुल गौतम ने बताया कि शनिवार, 24 अक्टूबर को सुबह 10 बजे श्री मनः कामेश्वर मंदिर बाराद्वारी पर हवन एवं श्री राम चरित मानस का पारायण एवं श्री राम हनुमान मंदिर, रामलीला मैदान से दोपहर 12 बजे स्वरूपों का विदाई समारोह आयोजित किया जाएगा।