आगरालीक्स.. आगरा में बच्चे तोंदू हो रहे हैं, मोटापे के शिकार बच्चों ने वजन कम नहीं किया तो सर्जरी से उनका पेट का आकार छोटा करना पड सकता है। आगरा में सर्जन की कार्यशाला 13 वीं सोसायटी आफ लेप्रोस्कोपिक सर्जन्स आफ इंडिया कांफ्रेंस और 12 वीं इंडियन हर्निया सोसायटी में बच्चों के मोटापे से लेकर पित्त की थैली, गुर्दा की नली के स्टोन पर चर्चा की गई।
आगरा के सचखंड हास्पिटल में प्रो एसडी मौर्या और डा सिदृार्थ धर ने सीबीडी स्टोन की सर्जरी की। देश के 18 सेंटरों पर लाइव प्रसारण हुआ, उन्होंने बताया कि दूरबीन विधि से सीबीडी का स्टोन करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। जिससे सीबीडी को कोई नुकसान ना हो। इसके लिए सधे साध होने चाहिए। यहां दूसरी सर्जरी यूरेट्रिक गुर्दा की नलिका के स्टोन की हुई, इस पर चर्चा की गई। मोटापा कम करने के लिए बेरिएट्रिक सर्जरी पर देश विदेश के सर्जन ने चर्चा की, उन्होंने बताया कि हर मरीज के लिए बेरिएट्रिक सर्जरी भी अलग होनी चाहिए। चेयरपर्सन एसएन के प्राचार्य डा संजय काला ने बताया कि बच्चों में 18 साल की उम्र के बाद बैरिएट्रिक सर्जरी की जानी चाहिए। इस सर्जरी में पेट की क्षमता 1 50 लीटर को कम कर 50 से 60 एमएल कर दिया जाता है, साथ ही भूख लगने वाले हार्मोन का स्तर भी कम हो जाता है। इससे 100 किलो वजन वाले बच्चों का वजन एक साल में 45 किलोग्राम तक पहुंच सकता है। सेल्सा, आगरा के अध्यक्ष डा सुनील शर्मा ने बताया कि दो दिवसीय कार्यशाला में दूसरे दिन 15 आपरेशन किए गए। इन पर चर्चा की गई। डा अमित श्रीवास्तव, डा समीर कुमार, डा शैलेष पुम्तांबेकर, डा राजेश भोजवानी, जयपुर, डॉ एच एल राजपूत , डॉ अपूर्वा चतुर्वेदी व ऋषि श्रीवास्तव मौजूद रहे।
पाइल्स के आपरेशन में गोल्ड स्टेंडर्ड नहीं है स्टेपलर सर्जरी
पाइल्स के आपरेशन में स्टेपलर सर्जरी का चलन बढ रहा है, इसे लेकर चर्चा की गई। चेयरपर्सन व सेल्सा आगरा के अध्यक्ष डा सुनील शर्मा ने बताया कि पाइल्स में स्टेपलर सर्जरी गोल्ड स्टेंडर्ड ट्रीटमेंट नहीं है।
मेडिकल शिक्षा में शामिल हो दूरबीन विधि से सर्जरी
शारदा यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो एमसी मिश्रा और डॉ वीरेंद्र बंसल ने कहा कि मेडिकल शिक्षा के पाठयक्रम में दूरबीन विधि शामिल की जानी चाहिए। यह बदलते दौर की मांग है, मेडिकल छात्रों को लेप्रोस्कोपिक विधि के बारे में पढाया जाना चाहिए।