आगरालीक्स …..(कृति शर्मा), जिंदगी में जो आप चाहते हैं वह होता है। यहां तक के मौत भी, एक ऐसे ही बुजुर्ग दंपती जिन्होंने एक साथ अंतिम सांस ली। नौ साल की उम्र में पिता चल बसे। कुछ करने का जुनून, ईमानदारी, हौसला और हिम्मत से वह कर दिखाया जो अक्सर युवा सपनों में सोचते हैं। (पुण्यतिथि विशेष)
मेरे दादा जी रामधनी शर्मा, ओल्ड अवधेश पुरी कमला नगर और दादी विमला देवी ने 3 मई 2021 को ब्रह्म मुहूर्त में अंतिम सांस ली। जब में कक्षा छह में थी, दादाजी ने अपनी आत्मकथा लिखने के लिए कहा, वे बोलते थे और मैं लिखती थी। उनकी जिंदगी के कुछ ऐसे ही किस्से हैं जो आज आप सभी के साथ साझा करना चाहती हूं, ये मुझे प्रेरणा देते हैं, सच कहूं तो मेरे दादाजी मेरे आदर्श हैं। दादाजी रामधनी शर्मा का जन्म खंदौली के गांव मलूपुर में हुआ था, वे कक्षा चार में पढ़ते थे उनके पिता जी यानी मेरे पर दादा का का निधन हो गया।

शिक्षक ने उत्तर पुस्तिका फाड़ दी, सच पता चला तो सात से सीधे 10 में प्रमोट कर दिया
दादाजी बताते हैं कि वे कक्षा सात में पढ़ते थे, इंग्लिश की परीक्षा थी। उन्होंने निर्धारित समय से पहले परीक्षा कर ली और बैठ गए। उसी समय शिक्षक आए, उन्हें लगा कि रामधनी शर्मा नकल कर रहे हैं, उन्होंने उनकी उत्तर पुस्तिका ली और फाड़, डांट लगाई और स्कूल से जाने के लिए कह दिया। उन्होंने शिक्षक को समझाना चाहा कि वे नकल नहीं कर रहे थे लेकिन वे सुनने के लिए तैयार नहीं थे। वे स्कूल से घर जाने लगे, शिक्षक ने उनकी उत्तर पुस्तिका के फटे हुए पन्ने उठाए, देखा तो सभी उत्तर सही थे। उन्होंने चपरासी को भेजकर मेरे दादाजी को बुलाया और एक चैलेंज दिया, कहा कि पेपर खत्म होने में जितना समय रह गया है, उसी समय में तुम्हे पेपर देना है क्या तैयार हो। वे तैयार हो गए और पास भी हो गए। इससे खुश होकर शिक्षक ने मेरे दादाजी को सातवीं कक्षा से सीधे 10 वीं कक्षा में प्रमोट कर दिया।
एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट में एकाउंटेंट रहे, ईमानदार ऐसे कि कंबल भी बस में छूट गए
दादाजी बताते हैं कि वे एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट में एकाउंटेंट के पद पर कार्यरत रहे। वे एक गोदाम का निरीक्षण करने पहुंचे, वहां बोेरियां कम मिली, गोदाम संचालक ने उन्हें रिश्वत देनी चाही उन्होंने साफ इन्कार कर दिया और कहा कि कल तक का समय है तुम बोरियां पूरी कर लो, कार्रवाई नहीं होगी। अगले दिन दादाजी पहुंचे तो बोरियां पूरी थी, सर्दियों के दिन थे। वह बहुत पीछे पड़ा और उनकी ईमानदार छवि को देखते हुए दो कंबल भेट किए, उन्होंने लेने से इन्कार किया। लेकिन वह नहीं मांना, उन्होंने मन रखने के लिए बेमन से कंबल ले लिए। वे बस में घर जाने के लिए बैठ गए, कंबल बस में ही छोड़कर घर आ गए।
पत्नी से प्यार इतना कि एक साथ ली अंतिम सांस
दादाजी हमेशा दादी के साथ ही खाना खाते थे वे अक्सर कहते थे कि हम दोनों एक साथ अंतिम सांस लें। हुआ भी कुछ ऐसा ही 3 मई 2021 की भोर में दादाजी और दादी ने एक साथ अंतिम सांस ली, आज वे हमारे बीच में नहीं हैं लेकिन उनके किस्से हमारे पूरे परिवार की जिंदगी का आदर्श हैं।
कृति शर्मा,
पुरानी अवधेशपुरी कमला नगर आगरा