आगरालीक्स…इस वीडियो में आवाज नहीं है, लेकिन इसमें वर्जनाओं के खिलाफ शोर है। 28 को मैंस्ट्रुअल हाईजीन डे है, एकजुट होकर समाज से पूछें मासिक धर्म क्यों है टैबू लड़के भी दें साथ, वीडियो के लिए क्लिक करें.
पीरियड्स आने पर आफिस या स्कूल न जाना, सैनेटरी पैड को छुपाकर रखना, पुरूषों के सामने तो इस पर बात भी न करना। जैसे पीरियड्स का नाम लेना कोई अपराध है। अगर शहरों और कस्बों में ऐसा है तो सोचिए ग्रामीण क्षेत्रों में क्या हाल होगा।
मल्होत्रा नर्सिंग एंड मैटरनिटी होम कीं डाॅ. नीहारिका मल्होत्रा फेडरेशन आॅफ आॅब्सटेट्रिकल एंड गायनेकोलाॅजिकल सोसायटी आॅफ इंडिया (फाॅग्सी) यंग टेलेंट कमेटी की चेयरपर्सन हैं, स्मृति संस्था कीं निदेशक रहते हुए स्कूलों में टीन एज गर्ल्स को एजूकेट कर रही हैं और साथ ही किशोरी क्लीनिक चला रही हैं। अपने अनुभव साझा करते हुए वे कहती हैं कि हर साल 28 मई को मासिक धर्म स्वच्छता दिवस मनाया जाता है। यह दिवस लोगों को एकत्रित करता है ताकि इस संदेश को दुनिया में पहुंचाया जा सके। पीरियड्स के समय की चुप्पी टूटे। नकारात्मक सामाजिक मानक टूटें। इस साल इस दिवस की थीम है कि हम एक ऐसी दुनिया चाहते हैं जहां किसी महिला या लड़की को अलग न रखा जाए क्योंकि उनको पीरियड्स आते हैं। पीरियड्स के आस-पास का जो स्टिग्मा है उसे तोड़ा जाए और हर औरत को मासिक धर्म प्रोडक्ट आसानी से मिल जाएं और उनकी स्वीकार्यता बढ़ाई जाए। सभी लड़कों को भी मासिक धर्म स्वच्छता का मूल ज्ञान होना चाहिए। हम एक समुदाय के रूप में काम करते हुए मासिक धर्म स्वच्छता को बढ़ावा देंगे क्योंकि अगर यह स्वच्छता न रखी जाए तो महिला को कई तरह के संक्रमण, बांझपन यहां तक कि कैंसर होने तक का खतरा है।