आगरालीक्स…आगरा की रहने वाली 17 साल की मेडिकल छात्रा की लाश कोटा के पीजी में मिली. तड़प—तड़प कर तोड़ा दम…सामने आई ये बड़ी वजह. पीजी मालिक पर लगे गंभीर आरोप
राजस्थान के कोटा में पीजी में रह रही आगरा की 17 साल की छात्रा का शव उसके कमरे में पड़ा मिला है. वह यहां रहकर मेडिकल की तैयारी कर रही थी. छात्रा करीब एक सप्ताह से बीमार थी. शनिवार को उसकी पिता से बात हुई थी लेकिन बात होने के एक घंटे बाद से उसका नंबर रिसीव नहीं हो रहा था. बात में पीजी मालिक से कॉन्टैक्ट करने पर पता चला कि वह कमरे में बेहोश है. इस पर छात्रा का कोटा में रहने वाला एक रिश्तेदार वहां पहुंचा और उसे डॉक्टर के पास लेकर गया, लेकिन डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया. रविवार को छात्रा के परिजन भी कोटा पहुंच गए और उन्होंने पीजी मालिक पर छात्रा को बीमार होने के बावजूद डॉक्टर को न दिखाने के आरोप लगाए हैं जबकि पीजी मालिक का कहना है कि उसने लगातार छात्रा के बीमार होने की सूचना उसके परिजनों को दी थी.

आगरा के सिकंदराबाद की रहने वाली 17 साल की छात्रा आयुषी कोटा के एक पीजी में रहकर मेडिकल की तैयारी कर रही थी. आयुषी के पिता के अनुसार शनिवार को सुबह करीब नौ बजे उन्होंने आयुषी को फोन किया. आवाज से बेटी की तबियत खराब लग रही थी. हालांकि पूछने पर उसने अपनी तबियत ठीक बताई. इस पर उन्होंने कहा कि वह बेटी को लेने रविवार को कोटा आ रहे हैं. पिता के अनुसार सुबह नौ बजे बात होने के बाद करीब एक घंटे बाद दोबारा आयुषी को फोन किया गया तो उसने फोन रिसीव नहीं किया. काफी बार कॉल् करने और रिसीव न होने पर पिता ने इसकी जानकारी कॉल् कर पीजी मालिक को दी. इस पर पीजी मालिक कमरे में पहुंचा तो देखा कि वह बेहोश पड़ी हुई है. पिता ने कोटा में ही रहने वाले अपने एक रिश्तेदार को पीजी में भेजा. इस पर रिश्तेदार पीजी पहुंचा और आयुषी को लेकर अस्पताल पहुंचा लेकिन यहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
पीजी मालिक पर लगाए आरोप
बेटी की मौत की जानकारी पर रविवार को परिजन कोटा पहुंच गए. आयुषी के पिता ने पीजी मालिक पर गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस को बताया कि बेटी कई दिन से बीमार थी. उसे उल्टी और दस्त की शिकायत थी. उसने पीजी मालिक से भी कहा था कि वह उसे डॉक्टर को दिखा आए लेकिन उसने डॉक्टर को नहीं दिखाया. आयुषी एक साल से यहं रह रही थी. उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी बेटी को पीजी मालिक के भरोसे ही छोड़ा था लेकिन पीजी मालिक ने उनकी बेटी का ध्यान नहीं रखा और वह किराए को लेकर भी उसे परेशान कर रहा था. उन्होंने कहा कि बेटी को समय पर इलाज मिल जाता तो उसकी जान बच जाती. वहीं इस मामले में पीजी मालिक ने अपने ऊपर लगे सभी आरोप को गलत बताया है. उसका कहना है कि छात्रा के बीमार होने की जानकारी उसने परिजनों को दी थी और कहा था कि उसे यहां से ले जाएं लेकिन वे यहां आए ही नहीं.