आगरालीक्स…शारदीय नवरात्र में दूसरे दिन मंगलवार को होगी मां ब्रहृमचारिणी की पूजा. जानें पूजा विधि और माता और उनकी शक्ति के बारे में
मां का चोला (सफेद) भोग. मिश्री, चीनी ,पंचामृत ,शुभ रंग(हरा) लौंग इलायची सुपारी सात पान के पत्ते ,मिश्री इन सब को दान करने से पूजा करने वाले की आयु बढ़ती है*
आश्विन शुक्ल पक्ष द्वितीया मंगलवार चित्रा नक्षत्र ,ब्रहा योग और बालव करण के शुभ संयोग में 27 सितंबर 2022 को मां दुर्गा की दूसरी शक्ति मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है. मां दुर्गा की नव शक्तियों का दूसरा स्वरूप ही मां ब्रह्मचारिणी है. यहॉ ब्रह्म शब्द का अर्थ तपस्या है. ब्रह्मचारिणी अर्थात तप का आचरण करने वाली. ब्रह्मा जी की शक्ति होने से मां का यह स्वरूप ब्रह्मचारिणी नाम से लोक प्रसिद्ध हुआ. इनका उद्भव ब्रह्मा जी के कमंडल से माना जाता है. ब्रह्मा जी सृष्टि के सृजक हैं. माता ब्रह्मचारिणी उनकी शक्ति हैं. ब्रह्मचारिणी देवी का स्वरूप पूर्ण ज्योतिर्गमय एवं अत्यंत भव्य है. जब मानस पुत्रों से सृष्टि का विस्तार नहीं हो सका तो ब्रह्मा जी की इसी शक्ति ने सृष्टि का विस्तार किया. इसी कारण स्त्री को सृष्टि का कारक माना गया है.

देवी ब्रह्मचारिणी भक्ति ,ज्ञान, वैराग्य औरध्यान की अधिष्ठात्री है.इनकेएक हाथ में कमंडल और दूसरे में रुद्राक्ष की माला है. करमाला स्फटिकऔर ध्यान योग नवरात्रि की दूसरी अधिष्ठापन शक्ति है. मां दुर्गा के उपासक इस दिन जितना ध्यान करेंगे उतना ही उन्हें श्रेष्ठ फल प्राप्त होगा. नारदजी के उपदेश से भगवान शंकर जी को प्राप्त करने के लिए अत्यंत कठिन तपस्या की थी. इन्होंने इसी तपस्या के कारण इन्हें तपश्चारिणी अर्थात ब्रह्मचारिणी नाम से अभिहित किया गया. इसदिन साधक का मन स्वाधिष्ठान चक्र में स्थित होता है इस चक्र में अवस्थित मन वाला योगी माता की कृपा और भक्ति प्राप्त करता है.
मंत्र -या देवी सर्व भूतेषु शक्ति रूपेण संस्थितानमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यैनमो नमः
प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य परमपूज्य गुरुदेव पंडित हृदय रंजन शर्मा अध्यक्ष श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरू रत्न भंडार पुरानी कोतवाली सर्राफा बाजार अलीगढ़यूपी .WhatsApp नंबर-9756402981,7500048250