आगरालीक्स…. रमा एकादशी 21 अक्टूबर शुक्रवार को है। यह एकादशी कार्तिक कृष्ण पक्ष की एकादशी है। इस ग्यारस का महत्व अधिक होता है। जानिये व्रत व शुभ मुहूर्त।
कार्तिक माह भगवान विष्णु को है समर्पित

श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान एवं गुरू रत्न भंडार वाले ज्योतिषाचार्य गुरुदेव पंडित हृदयरंजन शर्मा बताते हैं कि कार्तिक का महीना भगवान विष्णु को समर्पित होता है। हालांकि भगवान विष्णु इस समय शयन कर रहे होते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी को ही वे चार मास बाद जागते हैं। लेकिन कृष्ण पक्ष में जितने भी त्योहार आते हैं उनका संबंध किसी न किसी तरीके से माता लक्ष्मी से भी होता है।
माता लक्ष्मी का एक नाम रमा भी है
दिवाली पर तो विशेष रूप से लक्ष्मी पूजन तक किया जाता है। इसलिये माता लक्ष्मी की आराधना कार्तिक कृष्ण एकादशी से ही उनके उपवास से आरंभ हो जाती है। माता लक्ष्मी का एक अन्य नाम रमा भी होता है इसलिये इस एकादशी को रमा एकादशी भी कहा जाता है।
सुख-समृद्धि और बैकुंठ की प्राप्ति संभव
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार जब युद्धिष्ठर ने भगवान श्री कृष्ण से कार्तिक मास की कृष्ण एकादशी के बारे में पूछा तो भगवन ने उन्हें बताया कि इस एकादशी को रमा एकादशी कहा जाता है। इसका व्रत करने से जीवन में सुख समृद्धि और अंत में बैकुंठ की प्राप्ति होती है।
💥रमा एकादशी व्रत तिथि व शुभ मुहूर्त
🍁एकादशी तिथि प्रारम्भ- 20 अक्टूबर (गुरुवार) सांय 04 बजकर 04 मिनट से।
🍁एकादशी तिथि समाप्त- 21 अक्टूबर (शुक्रवार) सांय 05: बजकर 22 मिनट तक।
🌷एकादशी व्रत पारण-22 अक्टूबर, शनिवार, प्रातः 06 बजकर 41 मिनट से 08 बजकर 55 मिनट तक।
🔥 उद्देश्य ==कार्तिक मास में तो प्रात: सूर्योदय से पूर्व उठने, स्नान करने और दानादि करने का विधान है। इसी कारण प्रात: उठकर केवल स्नान करने मात्र से ही मनुष्य को जहां कई हजार यज्ञ करने का फल मिलता है, वहीं इस मास में किए गए किसी भी व्रत का पुण्यफल हजारों गुणा अधिक है। रमा एकादशी व्रत में भगवान विष्णु के पूर्णावतार भगवान जी के केशव रूप की विधिवत धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्प एवं मौसम के फलों से पूजा की जाती है।
मनोकामनाएं होती हैं पूरी
व्रत में एक समय फलाहार करना चाहिए तथा अपना अधिक से अधिक समय प्रभु भक्ति एवं हरिनाम संकीर्तन में बिताना चाहिए। शास्त्रों में विष्णुप्रिया तुलसी की महिमा अधिक है इसलिए व्रत में तुलसी पूजन करना और तुलसी की परिक्रमा करना अति उत्तम है। ऐसा करने वाले भक्तों पर प्रभु अपार कृपा करते हैं जिससे उनकी सभी मनोकामनाएं सहज ही पूरी हो जाती हैं।