आगरालीक्स …..आगरा में महाराणा प्रातप की जयंती पर शोभायात्रा निकाली, कहा कि वामपंथी इतिहासकारों ने हिंदुओं का मनोबल गिराने के लिए लिखा कि महाराणा प्रताप हार गए.

वरिष्ठ साहित्यकार हरिमोहन सिंह कोठिया ने कहा कि हल्दीघाटी के युद्ध में अकबर से महाराणा नहीं हारे थे, किंतु वामपंथी इतिहासकारों ने हिंदुओं का मनोबल गिराने के लिए लिखा कि महाराणा प्रताप हार गए।
श्री कोठिया जी ने कहा कि सच्चाई तो यह है कि महाराणा प्रताप 30 वर्ष तक निरंतर अकबर से लड़ते रहे। अंतिम सांस तक स्वतंत्र रहे। आमने सामने के युद्ध में चेतक घोड़े पर सवार महाराणा ने मुगल सेना के छक्के छुड़ा दिए।
वरिष्ठ कवि डॉ. शेष पाल सिंह शेष ने गीत के द्वारा राष्ट्रीय चेतना का भाग जगाया- “उलट-पुलट दे धरती अंबर, शुभ कर देश महान का। रग-रग रोम-रोम में तेरे, रक्त बह रहा राम का। चंद्रगुप्त, विक्रम, भोजों ने गौरव-मान बढ़ाया था। सीता- पद्मनि, दुर्गा माताओं ने तुझको जाया था। वीर शिवा राणा प्रताप ने निज सर्वस्व मिटाया था। झांसी की रानी लक्ष्मी ने अद्भुत शौर्य दिखाया था। जप माला का नहीं, किए जा जप पुरखों के नाम का..”
सीएआरडीसी द्वारा संस्कार भारती के सहयोग से संचालित क्रांति तीर्थ श्रंखला की कड़ी में राष्ट्रपुरुष महाराणा प्रताप की जयंती पर मंगलवार सुबह यमुना किनारा स्थित महाराणा प्रताप प्रतिमा स्थल पर आयोजित कार्यक्रम का संयोजन और संचालन करते हुए राज बहादुर सिंह राज ने क्रांति तीर्थ श्रंखला के उद्देश्य और महत्व पर भी प्रकाश डाला।