आगरालीक्स… आगरा नगर निगम की राजस्व निरीक्षक को एक लाख रिश्वत लेते हुए पकड़े जाने के बाद हाउस टैक्स के नोटिस से अवैध वसूली का खेल खुल गया है। जानें पूरा मामला।
आगरा में नगर निगम द्वारा सांई कंस्ट्रक्शन कंपनी से हाउस टैक्स के लिए सर्वे कराया गया। कंपनी को सर्वे के आधार पर रिवेन्यू बढ़ाने पर भुगतान किया जाना था, पार्षदों का आरोप है कि सर्वे कंपनी के कर्मचारियों ने कई गुणा हाउस टैक्स सर्वे में दिखा दिया। यह भी आरोप है कि आवासीय मकानों को व्यावसायिक दिखा दिया गया। इसी तरह का एक नोटिस कमला नगर ई ब्लॉक के रहने वाले कारोबारी सुभाष चंद्र अग्रवाल को मिला, उनका मार्च 2024 तक हाउस टैक्स जमा है, इसके बाद भी 34 लाख का नोटिस दे दिया गया।
इस तरह दलाल के साथ रिश्वत लेते हुए राजस्व निरीक्षक पकड़ी गई
कारोबारी सुभाष चंद्र अग्रवाल ने नगर निगम में संपर्क किया, आरोप है कि 34 लाख के हाउस टैक्स के नोटिस को खत्म करने के लिए 5 लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई। मध्यस्ता करने के लिए दलाल सुभाष आ गया, उसने दो लाख में निस्तारण तय कर दिया। कारोबारी ने सात जनवरी को रिश्वत मांगने की शिकायत विजिलेंस से कर दी। एसपी विजिलेंस शगुन गौतम ने बताया कि शिकायत मिलने पर जांच की गई, इसमें रिश्वत मांगने की बात सामने आई। नौ जनवरी को राजस्व निरीक्षक शिप्रा गुप्ता को ट्रैप करने की प्लानिंग की गई। राजस्व निरीक्षक ने करोबारी सुभाष चंद्र अग्रवाल को एक लाख रुपये लेकर नगर निगम बुलाया और एक लाख रुपये काम होने के बाद देने के लिए कहा। दोपहर 1.30 बजे कारोबारी एक लाख रुपये लिफाफे में रखकर पहुंच गया, यहां पहले से विजिलेंस की टीम खड़ी थी। राजस्व निरीक्षक शिप्रा गुप्ता दलाल सुभाष के साथ नगर निगम के मेन गेट पर बैरियर के पास आई, जैसे ही कारोबारी सुभाष चंद्र अग्रवाल ने एक लाख कैश का लिफाफा दिया, विजिलेंस टीम ने राजस्व निरीक्षक शिप्रा गुप्ता और दलाल सुभाष सिंह को पकड़ लिया।
दलाल से कराती थी काम
राजस्व निरीक्षक शिप्रा गुप्ता मूलरूप से जोशियाना मोहल्ला फिरोजाबाद की रहने वाली है, चर्चा है कि वह दलाल सुभाष सिंह के माध्यम से ही लेनदेन के सारे काम कराती थी।