आगरालीक्स… महाशिवरात्रि पर परमपिता परमेश्वर शिव की पूजा-पाठ का शुभ समय। महाव्रत का पारण किस दिन और समय पर करें। जाने विविध जानकारी।
फाल्गुन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का है महत्व

श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान एवं गुरु रत्न भण्डार वाले ज्योतिषाचार्य पंडित हृदय रंजन शर्मा के मुताबिक भगवान भोले नाथ के भक्तों के लिये महाशिवरात्रि का व्रत विशेष महत्व रखता है। यह पर्व फाल्गुन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन मनाया जाता है।
कोई भी व्यक्ति रख सकता है व्रत
इस वर्ष यह उपवास 08 मार्च शुक्रवार के दिन का रहेगा। इस दिन का व्रत रखने से भगवान भोले नाथ शीघ्र प्रसन्न होकर, उपवासक की मनोकामना पूरी करते हैं। इस व्रत को सभी स्त्री-पुरुष, बच्चे, युवा, वृद्धों के द्वारा किया जा सकता है।
रात्रि जागरण से अश्वमेघ यज्ञ के समान फल
महाशिवरात्रि के दिन विधिपूर्वक व्रत रखने पर तथा शिवपूजन,रुद्राभिषेक, शिवरात्रि कथा, शिव स्तोत्रों का पाठ व “ॐ नम: शिवाय” का पाठ करते हुए रात्रि जागरण करने से अश्वमेघ यज्ञ के समान फल प्राप्त होता हैं। व्रत के दूसरे दिन यथाशक्ति वस्त्र-क्षीर सहित भोजन, दक्षिणादि प्रदान करके संतुष्ट किया जाता हैं
चार प्रहर पूजन अभिषेक विधान
1-प्रथम प्रहर- सायं 6:48 से रात्रि 9:58 तक
2-द्वितीय प्रहर- रात्रि 9:58 से रात्रि 1:08 तक
3-तृतीय प्रहर- रात्रि 1:08 से रात्रि 4:18 तक
4-चतुर्थ प्रहर- रात्रि 4:18 से प्रातः 6:58 बजे तक पहर की गणना अपने स्थानीय सूर्योदय से करना विधि सम्मत है।
महाशिवरात्रि 2024 शुभ मुहूर्त
महाशिवरात्रि शुक्रवार 2024 तिथि : 08 मार्च 2024
चतुर्दशी तिथि आरंभ : शुक्रवार 08 मार्च रात्रि 09:58 बजे से
चतुर्दशी तिथि समाप्त : शनिवार 09 मार्च सायंकाल 06:18पर
निशिथ काल पूजा : 08 मार्च दिन शुक्रवार की रात्रि, 24:07 से 24:57
पारण का समय : प्रातः 06:46 से 10:26 (09मार्च 2024)
महाशिवरात्रि व्रत पूजन विधि
-महाशिवरात्रि के दिन गंगा स्नान कर भगवान शिव की आराधना करने वाले भक्तों महाशिवरात्रि व्रत पूजन विधि के अनुसार करने से इच्छित फल, धन, सौभाग्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
-महाशिवरात्रि व्रत का सबसे प्रमुख भाग उपवास होता है। सबसे पहले पानी में गंगाजल डाल कर स्नान करें।
-स्नान आदि ने निवृत्त होने के बाद हाथ में अक्षत और गंगाजल लेकर महाशिवरात्रि व्रत का संकल्प लें।
-संकल्प लेने के बाद सफेद वस्त्र धारण करें और किसी भी शिव मंदिर में जाकर शिवजी का पंचामृत से अभिषेक कराएं।
-शंकर जी का अभिषके करने के लिए पंचामृत में दूध, दही, शहद, गंगाजल और काले तिल का उपयोग करें।
-पंचामृत से अभिषेक के बाद शिवलिंग का विधि पूर्वक पूजन करें शिवलिंग बेल-पत्र, गाजर, बेर, धतूरा, भांग, सेंगरी और जनेव जरूर चढ़ाएं।
-भगवान शिव जी का अभिषेक करने के पश्च्यात शिवपरिवार को केसर का तिलक करें और सफेद फूल की माला अर्पित करें।
-महाशिवरात्रि पर भगवान का तिलक करने के बाद उन्हें स्वच्छ वस्त्र अर्पित करें और धूप-दीप शिवजी की पूजा करें।
-शिव चालीसा का पाठ करने के बाद शिव जी की आरती करना ना भूलें।
-आरती करने के बाद उत्तर दिशा की तरफ मुख करके ॐ नमः शिवाय मंत्र का 108 बार जाप करें। रात्रि में शिव जी का जागरण करना अनिवार्य है।
-शिव आराधना में लीन रहते हुए अगली सुबह शिवजी को फल का भोग लगा कर स्वयं भी फल का सेवन कर व्रत खोलें।