आगरालीक्स… नवम सिद्धिदात्री कई सुखद संयोग में कल बुधवार को मनेगी। जानें पूजा-विधि एवं कन्या लांगुरा जिमाने के शुभ मुहूर्त सहित कई फलदायी उपाय..
शूल योग कौलव करण का है सुखद संयोग

श्री गुरु ज्योतिष संस्थान एवं गुरु रत्न भंडार वाले ज्योतिषाचार्य पंडित हृदय रंजन शर्मा के मुताबिक बुधवार आश्लेषा नक्षत्र शूल योग कौलव करण के सुखद संयोग में 17 को ही रामनवमी , दुर्गा नवमी मनाई जायेगी। अतः इसी में माता सिद्धिदात्री की पूजा पाठ मान्य होगी।
व्रति कल ही व्रत खोलेंगे
व्रत रखने वालों का आज व्रत है। 17 अप्रैल को दिन हवन, यज्ञ, अनुष्ठान ,दुर्गा सप्तशती का पाठ ,कन्या लांगुर जिमाने के उपरांत ही व्रति अपना व्रत खोलेंगे
मां का चोला लाल रंग का, शुभ रंग बैगनी
मां का चोला (लाल) रंग का शुभ रंग (बैंगनी ) भोग में पसंद नारियल,हलुवा ,चना, पूड़ी का भोग लगाने से हर प्रकार की खुशहाली सुख समृद्धि प्राप्त होती है
देवी भगवती का नौवां स्वरूप सिद्धिदात्री का है

नवरात्रियों में जिन नौ दुर्गाओकी आराधना की जाती है वह मूलतः एक ही है किंतु लौकिक रूपमेंनवदुर्गा(नौदेवी) कहा जाता है आखिरी दिन शक्ति के जिसरूप की आराधना की जाती है वह मां सिद्धिदात्री की आराधना ही हैं इनके आशीर्वाद के बिना व्यक्ति की मनोकामना पूर्ण नहीं होती। यह माता महालक्ष्मी जी का स्वरुप हैं इनकी आराधना के साथ ही नवरात्र व्रत का पारण होता है। मां की उपासना के साथ दुर्गा जी के मंत्र से ध्यान करना चाहिए ध्यान के बाद दुर्गा सप्तशती का पाठ एवं श्रेष्ठ निर्माण मंत्र
ॐ ऐंग हीलीम क्लीम चामुंडायै विच्चै
इस मंत्र की यथासंभव 2,5,7,9 या 11 माला हवन करना चाहिए हवन सामग्री में शहद गुगल और दशांगका प्रयोग अवश्य करें कन्या पूजन कर उन्हें भोजन कराएं और दक्षिणा देकर विदा करें इस प्रकार मां सिद्धिदात्रीकी कृपा आपके परिवार पर वर्षभरबनी रहेगी
पूजा विधि एवं कन्या-लांगुरा जिमाने के शुभ मुहूर्त
विश्व प्रसिद्ध चौघड़िया मुहूर्त अनुसार प्रातः 06:05 बजे से प्रातः 09:05बजे तक “लाभ और अमृत” के दो बहुत ही बेहतरीन चौघड़िया मुहूर्त उपलब्ध होंगे इसमें सन्यासी एवं नौकरीपेशा लोगों के लिए बहुत ही सर्वोत्तम मुहूर्त कहलाए जाएंगे इसके बाद में सुबह 10:43 से दोपहर 12:30 तक” शुभ “का बहुत ही उत्तम मुहूर्त रहेगा इसके बाद दोपहर 01:54से सांय काल 05:05 बजे तक तीन बहुत शानदार चौघड़िया मुहूर्त आ रहे है।
इन लोगों को मिलेगी पूजा अर्चना से राहत
इसमें व्यापारी वर्ग के लोग एवं वह लोग जो रोग दोषो से पीड़ित हैं .या जिन कन्याओं की विवाह शादी में दिक्कत,अडचन, परेशानियां हैं या जिन माताओं बहनों के संतानमै बाधा है उन लोगों के लिए यह मुहूर्त सर्वोत्तम कहा जाएगा इसमें पूजा पाठ करने से समस्त प्रकार के दुखों समाप्त हो जाते हैं
पूजा विधि
प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पूजा घर को साफ शुद्ध करें पूजा स्थल को चूने खड़िया से पोते इसके बाद 9 वर्ष तक की एक कन्या से उसके हाथ का शुभ पोते हुए स्थान पर हल्दी ,चंदन या रोलीथापा जरूर लगवाएं जिसे स्वयं मां का स्वरूप मानते हैं कन्या को यथायोग्य दक्षिणा और उपहार देकर विदा करें उसके पैर छूए आशीर्वाद लें इसके बाद हवन, यज्ञ, पूजा, पाठ एवं दुर्गा सप्तशती का पाठ मंत्र जाप करें।
कन्या-लांगुरा का जूठा प्रसाद ग्रहण करें
इसके पश्चात कन्या-लागुरा को भोजन कराएं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें व्रत रखने वाले लोग कन्या-लांगुरा के भोजन की जूठन में से थोड़ा सा प्रसाद स्वरूप भोजन अवश्य लें यह मां का प्रसाद समझकर हीले इससे व्रत रखने वालों की समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति होती है क्योंकि पूजा-पाठ का मतलब केवल हमारी सच्ची आस्था और विश्वास से होता है