आगरालीक्स…आगरा में मंदिर के चढ़े हुए फूलों से बनाया जा रहा हर्बल गुलाल. पूरी तरह से केमिकल फ्री, महिलाओं को भी दिया प्रशिक्षण.
आगरा ताज नेचर वॉक समिति और पारिजात फाउंडेशन के सौजन्य से नगर वन बाईपुर में महिलाओं को मंदिर के फूलों से हर्बल गुलाल बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं ने स्वयं गुलाल तैयार किया, जिसकी पैकेजिंग कर उसे बिक्री हेतु उपलब्ध कराया गया। कार्यशाला में पारिजात फाउंडेशन की डॉ अनुराधा चौहान ने मंदिर से फूल एकत्र करने से लेकर प्रोसेसिंग, रंग निर्माण, पैकेजिंग तथा विक्रय मूल्य निर्धारण तक की पूरी प्रक्रिया समझाई। सामाजिक वानिकी विभाग से वन दरोगा टीकम सिंह, उमेश सिंह, अखिलेश और देवेंद्र उपस्थित रहे। प्रशिक्षण में सुनीता, रानी, अनमोल, महेंद्र और प्रमोद ने भाग लिया। इस अवसर पर राजेश कुमार (डी.एफ.ओ.) ने कहा कि महिलाएं हर्बल गुलाल निर्माण से आत्मनिर्भर बन सकती हैं। उन्होंने बताया कि फूलों से बना यह गुलाल पूर्णतः केमिकल-फ्री है, जबकि बाजार में उपलब्ध कई रंगों में हानिकारक रसायन होते हैं जो त्वचा और आंखों में एलर्जी, जलन और गंभीर समस्याएं उत्पन्न कर सकते हैं। प्राकृतिक गुलाल अत्यधिक चमकीले नहीं होते क्योंकि इनमें लेड, क्रोमियम जैसे रसायन नहीं होते।
अलग-अलग सुगंध में तैयार हर्बल गुलाल
गेंदा फूल — चंदन सुगंध
गुलाब — प्राकृतिक सुगंध
बेलपत्र व पालक — खस-खस सुगंध युक्त हरा रंग
फूलों से बने प्राकृतिक घटकों को मिलाकर तैयार यह गुलाल त्वचा से आसानी से साफ हो जाता है और होली के अवसर पर हानिकारक रासायनिक रंगों का सुरक्षित विकल्प है।
आस्था से प्रकृति तक — एक संदेश
मंदिर के फूल केवल आस्था का प्रतीक नहीं, प्रकृति की अमूल्य धरोहर भी हैं।
नदियों में फूल प्रवाहित करने के बजाय उन्हें सुखाकर हमें दें — इन फूलों के बीजों को हम सीड बॉल के माध्यम से प्रकृति में पुनः स्थापित करेंगे।
एक पैकेट की खरीद पर एक पलाश का पौधा रोपा जाएगा।
एक रंग — एक मुस्कान — एक नया पेड़।
प्रकृति को अपनाएँ, सुरक्षित रंगों से होली मनाएँ।