आगरालीक्स… आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के तहत आगरा में हुए 160 बैनामों को क्लीन चिट मिल गई है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने जांच के आदेश दिए थे, सपा सरकार में बने एक्सप्रेस वे के लिए जमीन अधिग्रहण में कोई गडबडी न होने की रिपोर्ट आगरा के एडीएम, भूमि अध्याप्ति नगेंद्र शर्मा ने उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) को सौंप दी है।
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 302 किमी लंबे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे का निर्माण कराया था। इसके लिए आगरा में 371.76 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया। इसमें से आगरा के फतेहाबाद तहसील अंतर्गत 24 गांवों में 276.0208 हेक्टेयर और सदर तहसील अंतर्गत आठ गांवों में 95.7431 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया। सरकार बदलते ही सीएम योगी आदित्यनाथ ने 02 किमी लंबे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के तहत आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, औरैया, कन्नौज, हरदोई, कानपुर नगर, उन्नाव और लखनऊ में हुए जमीन अधिग्रहण की जांच कराई गई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आगरा में 160 बैनामे हुए थे, इसमें से सदर तहसील अंतर्गत 17 और फतेहाबाद तहसील अंतर्गत 143 बैनामा हुए।
यूपीडा को सौंपी रिपोर्ट
एडीएम, भूमि अध्याप्ति नगेंद्र शर्मा का मीडिया से कहना है कि आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के लिए आगरा में हुए 160 बैनामों की जांच पूरी हो गई है, इसमें कोई गडबडी नहीं मिली है। जांच सात बिंदुओं पर की गई थी, इसमें देखा गया था कि जिन लोगों से जमीन खरीदी गई, वे आगरा के रहने वाले थे और वहां के किसान थे या नहीं, जमीन अधिग्रहण के बाद जो पैसा मिला, वह किसी और के पास तो नहीं पहुंच गया।
शेष धनराशि बताने से किया इन्कार
जांच में सामने आया है कि जमीन खरीदने वाले और बेचने वाले किसान और आगरा के लोग थे। विक्रेताओं ने धनराशि का प्रयोग बैंक ऋण चुकता व कृषि भूमि खरीदने में किया गया। खाते में अवशेष धनराशि के संबंध में खातेदारों ने बताने से इन्कार कर दिया। ऐसा कोई केस नहीं मिला जिसमें 12 50 एकड से अधिक जमीन खरीदी गई हो।