आगरालीक्स…आगरा ही है वह भूमि जहां महादेव ने किए बाल कृष्ण के प्रथम दर्शन. यमुना तट पर चल रही कथा में महंत योगेश पुरी ने कहा—आगरा का प्राचीन नाम अग्रवन
यमुना नदी तट पर आयोजित श्री मनःकामेश्वर मंदिर मठ के श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिवस भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाएं, गोवर्धन लीला और छप्पन भोग प्रसंग सुन श्रद्धालु भक्तिरस में डूब गए। कथा मंडपम में “नंद बाबा के घर परमानंद भयो” और “गोवर्धनधारी गिरधारी लाल की जय” के जयकारों से वातावरण गुंजायमान हो उठा। कथा व्यास श्री महंत योगेश पुरी ने छप्पन भोग का महत्व बताते हुए कहा कि यह केवल भोग नहीं, बल्कि ब्रज संस्कृति का मंगलाचरण और उत्सव है। भगवान कहते हैं— “जो मेरा जिस प्रकार से भजन करता है, मैं भी उसका उसी प्रकार से भजन करता हूं।” उन्होंने कहा कि जिस प्रकार नंद बाबा और मां यशोदा के घर परमानंद हुआ, उसी प्रकार प्रत्येक भक्त के घर भी ईश्वर का आनंद अवतरित हो सकता है। भगवान श्रीकृष्ण का अंश हर घर में जन्म ले सकता है, किंतु उसके लिए भाव मां यशोदा जैसा निर्मल और नंद बाबा जैसा पावन होना चाहिए।आगरा ही है वह भूमि जहां महादेव ने किए बाल कृष्ण के प्रथम दर्शन
श्री महंत योगेश पुरी ने कथा में एक विशेष आध्यात्मिक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, तब स्वयं भगवान शिव उनके दर्शन की अभिलाषा लेकर ब्रज की ओर आए। जिस भूमि पर महादेव ने सबसे पहले चरण रखे, वह वर्तमान का आगरा ही है, जिसका प्राचीन नाम अग्रवन था और जो ब्रज के 84 वनों में प्रथम वन माना गया है।
उन्होंने कहा कि महादेव ने जहां आसन लगाया, वही स्थान आज श्री मनःकामेश्वर मंदिर के रूप में प्रसिद्ध है। इसी कारण आगरा को शिव नगरी कहना पूर्णतः उचित और मान्य है। उन्होंने बताया कि आगरा की चारों दिशाओं में महादेव के मंदिर और उनके साथ भैरव मंदिर स्थित हैं, जबकि मध्य में श्री मनःकामेश्वर नाथ विराजमान हैं।
कथा के दौरान महंत योगेश पुरी ने भगवान श्रीकृष्ण की माटी लीला का वर्णन करते हुए बताया कि जब मां यशोदा ने बालक कृष्ण के मुख में तीनों लोकों के दर्शन किए, तब उन्हें ज्ञात हुआ कि यह कोई साधारण बालक नहीं, स्वयं परमब्रह्म हैं।
ऊखल लीला का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान भक्तों के प्रेम में बंधते हैं। मां यशोदा के वात्सल्य भाव ने स्वयं ईश्वर को भी रस्सियों में बंधने पर विवश कर दिया।

गोवर्धन लीला से दिया प्रकृति संरक्षण का संदेश
श्री गिरिराज जी धारण प्रसंग सुनाते हुए महंत योगेश पुरी ने गांव, गौ, ग्राम्य संस्कृति और प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पूजा के माध्यम से प्रकृति, पर्वत, गौवंश और पर्यावरण के महत्व को स्थापित किया था। आज भी समाज को उसी संदेश को अपनाने की आवश्यकता है।
छप्पन भोग और सेवा बनी आकर्षण
पांचवें दिवस छप्पन भोग सेवा गोपाल बंसल एवं शालिनी बंसल द्वारा की गई। वहीं श्रद्धालुओं के लिए ठंडे दूध की प्याऊ सेवा बाबू रोशन लाल गुप्ता, विनोद कुमार गुप्ता सर्राफ एवं सुरेंद्र कुमार गुप्ता द्वारा प्रतिदिन संचालित की जा रही है। हितार्थ परिवार द्वारा व्यवस्था संभाली जा रही है।
दैनिक यजमानों ने किया व्यास पूजन
दैनिक यजमान के रूप में अश्विनी रावत, आकाश रावत, अतुल गर्ग, सुनीता गुप्ता, रवि वर्मा, देवेंद्र जैन, सिद्धार्थ परिवार, उषा राजकुमार एवं लव गुप्ता ने व्यास पूजन किया।
एआरटीओ शिवम यादव एवं अनूप यादव ने संध्या यमुना आरती उतारी। दीपों की रौशनी, शंखध्वनि और भजनों के मध्य यमुना नदी तट का दृश्य श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद प्रदान करता रहा।
शनिवार को महारास और रुक्मिणी विवाह उत्सव
मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने बताया कि शनिवार को महारास कथा एवं श्री कृष्ण-रुक्मिणी विवाह उत्सव का आयोजन होगा।