आगरालीक्स…अधिक मास में आने वाली पद्मिनी एकादशी 27 मई को. संतान प्राप्ति के लिए करें इस एकादशी का व्रत. बहुत शुभ है यह एकादशी. जानकारी दे रही हैं ज्योतिषाचार्य अंशु पारिख..
अधिकमास चल रहा है और इस मास में पड़ने वाली पद्मिनी एकाशदी 27 मई को है. श्रीहरि विष्णु की उपासना के लिए पद्मिनी एकादशी के व्रत को अत्यंत शुभ माना गया है. यह एकादशी केवल अधिक मास में आती है, इसलिए इसे दुर्लभ और अत्यंत फलदायी माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत और पूजा करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति, सुख-समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है. जिन लोगों को संतान प्राप्ति में दिक्कत हो रही है, वह लोग पद्मिनी एकादशी का व्रत करके संतान प्राप्ति की मनोकामना पूर्ण कर सकते हैं.पद्मिनी एकादशी की पौराणिक कथा
पुराणों के अनुसार प्राचीन समय में महिष्मती नगरी में कृतवीर्य नामक राजा राज्य करते थे. उनके पास धन-दौलत और वैभव की कोई कमी नहीं थी. लेकिन संतान न होने के कारण राजा और उनकी रानी दुखी रहते थे. राजा की प्रमुख रानी का नाम पद्मिनी था, जो भगवान विष्णु की परम भक्त थीं. संतान प्राप्ति के लिए राजा और रानी ने कई यज्ञ और अनुष्ठान किए, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली. इसके बाद दोनों वन में जाकर कठोर तपस्या करने लगे. वर्षों की तपस्या के बाद भी जब उन्हें संतान सुख नहीं मिला, तब रानी पद्मिनी को महान पतिव्रता अनुसूया के दर्शन हुए. रानी ने उनसे अपनी समस्या बताई. तब अनुसूया ने उन्हें अधिक मास में आने वाली पद्मिनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी. उन्होंने बताया कि यह व्रत भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है और इसे विधि-विधान से करने पर सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. रानी पद्मिनी ने श्रद्धा और नियमपूर्वक पद्मिनी एकादशी का व्रत रखा. उन्होंने भगवान विष्णु की पूजा की, उपवास रखा और पूरी रात भजन-कीर्तन करते हुए जागरण किया. रानी की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु प्रकट हुए और उन्हें वरदान मांगने को कहा. रानी ने संतान प्राप्ति की इच्छा जताई. भगवान विष्णु ने उन्हें तेजस्वी और पराक्रमी पुत्र होने का आशीर्वाद दिया. कुछ समय बाद रानी ने एक वीर पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम कृतवीर्य अर्जुन रखा गया. आगे चलकर वह महान योद्धा और प्रतापी राजा बना.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पद्मिनी एकादशी का व्रत करने से हजारों यज्ञों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है. यह व्रत विशेष रूप से सुख-समृद्धि, संतान सुख और मानसिक शांति देने वाला माना जाता है. ज्योतिषाचार्य अंशु पारिख के अनुसार अधिक मास में किए गए जप, तप और दान का फल कई गुना बढ़ जाता है. इस दिन सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है. तुलसी दल, पीले फूल, धूप और दीप अर्पित करना शुभ माना जाता है. श्रद्धालु विष्णु सहस्रनाम और गीता पाठ भी करते हैं. साथ ही अन्न, वस्त्र और जल का दान करना भी पुण्यदायी माना गया है. पद्मिनी एकादशी केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और भक्ति का पर्व भी है. यही कारण है कि श्रद्धालु इस एकादशी का पूरे वर्ष इंतजार करते हैं और इसे पूरी श्रद्धा व आस्था के साथ मनाते हैं.