आगरालीक्स.. आगरा में डिवाइन मदर एंड वर्चु बेबी यानि गर्भ से ही बनाएं बच्चे को स्वस्थ और संस्कारवान, रेनबो हॉस्पिटल में शनिवार को डिवाइन मदर एंड वर्च्यु बेबी पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें विशेषज्ञों ने बताया कि पौराणिक कथाओं में हमने अक्सर गर्भ से ही बच्चों के सीखने के बारे में सुना है लेकिन डिवाइन मदर एंड वर्चु बेबी के तमाम उदाहरण आज दुनिया भर में सामने आ रहे हैं। वैज्ञानिक भी इसे मानते हैं। जानी.मानी आईवीएफ विशेषज्ञ और रेनबो आईवीएफ की निदेशक डा जयदीप मल्होत्रा बताती हैं कि मनुष्य की जिंदगी मां के गर्भ में आने के साथ ही शुरू हो जाती है। खान.पान, स्वाद, आवाज, जुबान जैसी चीजें सीखने की बुनियाद हमारे अंदर तभी पड़ जाती हैं। इसकी वजह भी है जो भी वह खाती हैं वह खून के जरिए बच्चे तक पहुंचता है। अफ्रीका के गैंबियन विलेज में हुई एक स्टडी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां देखा गया है कि सूखाग्रस्त इलाकों में जहां मांताओं का खान.पान अच्छा नहीं रहा वहां पैदा होने से पहले बच्चे की मौत की संभावना दस गुना तक ज्यादा थी बजाय ऐसे इलाकों के जो सूखागस्त नहीं थे या जहां खान.पान की कमी नहीं थी।
गर्भावस्था के समय खतरों, सावधानियों और खान.पान के बारे में जानकारी देते हुए रेनबो हॉस्पिटल के निदेशक एवं वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डा नरेंद्र मल्होत्रा ने कहा कि जीवन का सबसे खूबसूरत क्षण तब होता है जब हमारे जीवन में एक नया जीव आता है। हम में से हर कोई इंतजार करता है कि कब हमारे परिवार का विस्तार होगा और वो नया जीव हमारे जीवन में खुशियां लेकर आएगा। लेकिन आज की इस भागती दौड़ती जिंदगी में कहीं न कहीं जहां स्ट्रेस हर जगह पर अपने कदम बिठा चुका है। ऐसे में इस खूबसूरत मोड़ पर भी हम बहुत ज्यादा स्ट्रेस्ड हो जाते हैं। वह प्रक्रिया जब बच्चा हमारे जीवन में आता थाए जब हम बच्चे का स्वागत करते थे। वो जितना कुदरती होता था आज उतना ही तनावग्रस्त और डरावना होने लगा है। इस श्रृंखला में हमारी कोशिश रहेगी कि डिवाइन मदर एंड वर्च्यु बेबी के कॉन्सेप्ट के जरिए हम इन्हीं पहलुओं को लेकर आपके साथ आएं। इस पूरी प्रक्रिया पर लंबे समय से काम कर रहीं डिवाइन संस्कार रिसर्च फाउंडेशन मुंबई की समन्वयक डा शुभदा नील ने बताया कि गर्भकाल से ही अपने बोल, कर्म, खान.पान, विचार, व्यवहार, देखना, सुनना आदि पर विशेष ध्यान दिया जाए तो संस्कारवान संतान प्राप्त की जा सकती है। डा अरुण गुप्ता ने स्तनपान, डा निधि गुप्ता ने गर्भावस्था के दौरान देखभाल पर जानकारी दी।
गर्भवती महिलाओं को दी जानकारी
कार्यशाला में गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारीजनों को भी आमंत्रित किया गया। डा निहारिका मल्होत्रा ने उन्हें बताया गया कि एक संस्कारवान संतान प्राप्त करने के लिए उन्हें क्या करना चाहिए। संगीत, सकारात्मक और रचनात्मक रहने, गर्भ में शिशु से बात करने, पौष्टिक भोजन, योग, ध्यान आदि से संस्कारवान और बुद्धिमान संतान प्राप्त की जा सकती है।

फोग्सी 2018 के एजेंडों में प्रमुखता से शामिल
डा जयदीप बताती हैं कि वैज्ञानिकों के शोध और उनके सकारात्मक नतीजे समाने आने के बाद दुनिया भर में डिवाइन मदर एंड वर्च्यु बेबी की प्रक्रिया पर काम शुरू हुआ है। फेडरेशन आॅफ आॅब्सटेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटी आॅफ इंडिया (फोग्सी) ने भी वर्ष 2018 के अपने एजेंडों में इसे प्रमुखता से शामिल किया है। इस प्रयोग का मकसद गर्भ में पल रहे बच्चे पर संस्कारों और शौर्य गाथाओं का प्रभाव देखना है। रेनबो हॉस्पिटल में भी इसकी शुरुआत की गई है। यहां गर्भ संवाद के जरिए स्वस्थ और बुद्धिमान शिशु पैदा करने में सहायता की जाएगी। इसके लिए गर्भवती महिलाओं के लिए एक विशेष तरह की कक्षाएं शुरू की गई हैं। इसमें गर्भवती महिलाओं को आमंत्रित कर उन्हें गर्भ संस्कार के बारे में बताना और फिर उसके परिणाम देखना शामिल है। गौरतलब है कि डाण् जयदीप वर्ष 2018 के लिए फोग्सी की प्रेसीडेंट चुनी गई हैं। 19 जनवरी को भुवनेश्वर में आयोजित होने जा रहे एक समारोह में वह अध्यक्ष पद पर कार्यभार ग्रहण कर लेंगी।
ये रहे मौजूद
इस अवसर पर डा ऋषभ बोरा, डा केशव मल्होत्रा, डा आरसी मिश्रा, डा मधुसूदन अग्रवाल, डा अनूप खरे, डा राजीव लोचन शर्मा, डा हिमांशु यादव, डा विश्वदीपक, डा समीर भारद्वाज, डा दीप्ति भारद्वाज, डॉ दीक्षा गोस्वामी, डा शैली गुप्ता, डा शोभना, डाण् मनप्रीत शर्मा, डा शैमी बंसल, डा प्रभात कुमार, डा मनोज शर्मा, राकेश आहूजा, लवकेश गौतम, अमृतपाल सिंह चड्ढा, तरुण मैनी, सुदीप पूरी आदि मौजूद थे।