आगरालीक्स…शिव से श्रीकृष्ण और कल्कि तक… कत्थक में साकार हुई भारतीय संस्कृति की विराट गाथा. आगरा में कत्थक के जरिए दर्शकों को कराया चारों युगों का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दर्शन
भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और शास्त्रीय नृत्य की अनुपम छटा से सजा कालिंदी इंस्टीट्यूट ऑफ डांस एंड म्यूजिक का 22वां स्थापना दिवस समारोह खंदारी परिसर स्थित जेपी सभागार में भव्यता के साथ आयोजित किया गया। 'युगों की कहानी, कत्थक की जुबानी' थीम पर आधारित मेगा डांस शो में संस्थान की निदेशक रोशनी गिडवानी के कुशल मार्गदर्शन में लगभग 125 बाल एवं युवा कलाकारों ने कत्थक के माध्यम से सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर और कलियुग की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक यात्रा को सजीव कर दर्शकों को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. सुशील गुप्ता, डॉ. गिरधर शर्मा, त्रिलोक सिंह राणा, ओशिन शर्मा एवं ब्रह्माकुमारी अश्विना दीदी द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात माँ सरस्वती की मनोहारी वंदना ने पूरे सभागार को भक्तिमय वातावरण से सराबोर कर दिया।संस्थान की निदेशक रोशनी गिडवानी ने बताया कि युगों की कहानी, कत्थक की जुबानी' केवल एक नृत्य प्रस्तुति नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और सनातन मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक विनम्र प्रयास है। कत्थक केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक चेतना का सशक्त प्रतीक है। इस प्रस्तुति के माध्यम से बच्चों ने चारों युगों के आदर्शों, जीवन मूल्यों और भारतीय परंपराओं को आत्मसात करते हुए मंच पर जीवंत किया है। हमारा उद्देश्य विद्यार्थियों में कला के साथ-साथ संस्कार, अनुशासन, आत्मविश्वास और अपनी संस्कृति के प्रति गर्व की भावना विकसित करना है। 'युगों की कहानी, कत्थक की जुबानी' की शुरुआत सतयुग की प्रस्तुति से हुई। भगवान शिव पर आधारित ऊर्जावान शिव एक्ट, गणेश वंदना और भावपूर्ण रुद्राष्टकम की प्रस्तुति ने दर्शकों को आध्यात्मिक अनुभूति कराई। कलाकारों की भाव-भंगिमाओं, ताल और लय ने सभागार में बार-बार तालियों की गूंज बिखेरी।
त्रेतायुग की प्रस्तुति में भगवान श्रीराम के आदर्शों और मर्यादा का अत्यंत प्रभावशाली मंचन किया गया। राम स्तुति और हनुमान चालीसा पर आधारित कत्थक नृत्य-नाटिका ने भक्ति और वीरता का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया।द्वापर युग की प्रस्तुति महाभारत और भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं पर आधारित रही। श्रीकृष्ण रास लीला की मनोहारी प्रस्तुति ने दर्शकों को वृंदावन की रसमय अनुभूति कराई। युगों की गंभीर प्रस्तुतियों के बीच छोटे-छोटे बच्चों ने 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' की मनोरंजक प्रस्तुति देकर दर्शकों को खूब गुदगुदाया। इसके बाद 'छाप तिलक सब छीनी' पर प्रस्तुत सूफी नृत्य ने आध्यात्मिक प्रेम और सौहार्द का सुंदर संदेश दिया। कार्यक्रम के अंतिम चरण में कलियुग और भगवान कल्कि अवतार की प्रभावशाली प्रस्तुति के माध्यम से अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश दिया गया। कार्यक्रम का समापन अहमदाबाद विमान दुर्घटना में दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत नृत्य-नाटिका के साथ हुआ, जिसने पूरे सभागार को भावुक कर दिया। कार्यक्रम के समापन पर सभी अभिभावकों को सम्मानित किया गया और साथ ही सभी प्रतिभागी बच्चों को पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम का मंच संचालन जीविशा गिडवानी ने किया, जबकि व्यवस्थाओं का संचालन हरीश गिडवानी एवं राहुल ने संभाला।