Wednesday , 2 September 2026
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Agra News: An engaging discussion on ‘There is a Ghost in My Room: Living with the Supernatural’ held in Agra…#agra

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आगरालीक्स…आगरा में देयर इस ए घोस्ट इन माय रूम: लिविंग विद द सुपरनेचुरल पर हुई रोचक परिचर्चा, रहस्य और विज्ञान के बीच संवाद ने बांधा समां. लिट आगरा के मंच पर विज्ञान, अध्यात्म और अलौकिक अनुभवों पर हुआ सार्थक संवाद

लिट आगरा संस्था द्वारा संजय प्लेस स्थित होटल फेयरफील्ड बाय मैरियट में प्रख्यात कला-संस्कृति उद्यमी एवं लेखक संजय के. रॉय की चर्चित पुस्तक 'देयर इस ए घोस्ट इन माय रूम: लिविंग विद द सुपरनेचुरल ' के विमोचन एवं परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ पुस्तक के विमोचन से हुआ। पुस्तक का लोकार्पण सेंट जॉन्स कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. एसपी सिंह, हरविजय बाहिया, डॉ. रंजना बंसल, डॉ. संदीप अग्रवाल, प्रो. निबीर घोष, डॉ. अशोक शर्मा एवं डॉ. राजीव भाटिया ने संयुक्त रूप से किया।

निधि लाल ने कार्यक्रम संचालन के दौरान लेखक संजय के. रॉय का परिचय देते हुए बताया कि वे देश के अग्रणी सांस्कृतिक उद्यमियों में शामिल हैं। वे टीमवर्क आर्ट्स के प्रबंध निदेशक हैं, जो भारत और विदेशों के अनेक प्रतिष्ठित साहित्य, कला एवं सांस्कृतिक उत्सवों का आयोजन करता है। विश्व के सबसे बड़े साहित्यिक आयोजनों में शामिल जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के संस्थापक सदस्यों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वे सलाम बालक ट्रस्ट के संस्थापक ट्रस्टी हैं तथा कला एवं संस्कृति से जुड़े अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में महत्वपूर्ण दायित्व निभा चुके हैं। संस्कृति के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें ब्रिटेन के यॉर्क विश्वविद्यालय द्वारा मानद डॉक्टरेट से भी सम्मानित किया जा चुका है।

परिचर्चा के दौरान नीलम मेहरोत्रा और सुधा कपूर ने लेखक से परा दुनिया, आत्माओं, अलौकिक अनुभवों और अदृश्य संसार से जुड़े अनेक रोचक प्रश्न किए। उनके उत्तर में संजय के. रॉय ने कहा कि उनकी पुस्तक किसी अंधविश्वास को बढ़ावा देने का प्रयास नहीं है, बल्कि जीवन में घटित उन वास्तविक अनुभवों का ईमानदार दस्तावेज है, जिन्हें उन्होंने स्वयं महसूस किया। उन्होंने बताया कि मात्र पाँच वर्ष की आयु में कोलकाता स्थित अपने पैतृक घर में उन्होंने पहली बार किसी अदृश्य उपस्थिति का अनुभव किया। इसके बाद दिल्ली और फिर भारत तथा विदेशों की यात्राओं के दौरान उन्हें अनेक ऐसे अनुभव हुए, जिन्होंने उन्हें यह सोचने पर विवश किया कि हमारे ज्ञात संसार के समानांतर भी एक ऐसी दुनिया हो सकती है, जिसे विज्ञान अभी पूरी तरह समझ नहीं पाया है।

विज्ञान और पराविज्ञान के संबंध में अपने विचार रखते हुए संजय के. रॉय ने कहा कि विज्ञान का कार्य प्रश्न पूछना और प्रमाण तलाशना है, जबकि मनुष्य के अनेक अनुभव ऐसे होते हैं जिन्हें तत्काल वैज्ञानिक कसौटी पर नहीं कसा जा सकता। उन्होंने कहा कि हर अनजानी घटना को अंधविश्वास कहकर खारिज कर देना भी उचित नहीं और बिना विवेक के हर बात पर विश्वास करना भी सही नहीं। आवश्यकता खुले मन, जिज्ञासा और संवेदनशील दृष्टि से इन अनुभवों को समझने की है। उन्होंने कहा कि भय से अधिक महत्वपूर्ण है समझ और अनुभव, क्योंकि हर रहस्य के पीछे कोई न कोई मानवीय कहानी छिपी होती है।

लेखक ने बताया कि देयर इस ए घोस्ट इन माय रूम: लिविंग विद द सुपरनेचुरल केवल भूत-प्रेत की कहानियों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह एक संस्मरणात्मक यात्रा है, जिसमें स्मृतियां, यात्राएं, मानवीय रिश्ते, हास्य, रोमांच और जीवन के अनुत्तरित प्रश्न एक साथ चलते हैं। पुस्तक यह संकेत देती है कि शायद हमारे संसार के समानांतर भी एक ऐसा आयाम मौजूद है, जहां स्मृतियां, आत्माएं और ऊर्जा किसी न किसी रूप में विद्यमान रहती हैं। उन्होंने कहा कि आत्माओं को केवल डर का प्रतीक नहीं मानते, बल्कि उन्हें स्मृतियों, अधूरी इच्छाओं और मानवीय भावनाओं से जोड़कर देखते हैं। कहीं वे शरारती हैं, कहीं उदास, तो कहीं अशांत। पुस्तक विज्ञान और अध्यात्म, तर्क और अनुभव के बीच संतुलित संवाद स्थापित करती है और पाठक को यह सोचने पर विवश करती है कि क्या वास्तव में हमारी इंद्रियों से परे भी कोई संसार हो सकता है। इस अवसर पर पूजा बंसल एवं अनुपम बोहरा ने पुस्तक के चुनिंदा अंशों का प्रभावशाली पाठ किया। हरविजय बाहिया ने कहा कि आत्मकथा, यात्रा-वृत्तांत और अलौकिक अनुभवों का अनूठा संगम है। इसमें लेखक संजय के रॉय कोलकाता के पैतृक घर से लेकर लुटियंस दिल्ली और भारत सहित विदेशों के अनेक स्थानों पर हुए रहस्यमय अनुभवों का जीवंत वर्णन है। कार्यक्रम में मनीष बंसल, रजनीश खंडेलवाल, विनोद महेश्वरी, पूनम सचदेवा, राशि गर्ग, कविता अग्रवाल, मोहित महाजन, श्वेता बंसल, दिव्या गोयल आदि उपस्थित रहे।

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