आगरालीक्स…आगरा के राजदेवम में चल रही कथा में जया किशोरी जी ने सुनाई श्रीकृष्ण की मनमोह लेने वाली बाललीलाएं…गोवर्धन पूजा का भी किया भक्तिमय वर्णन
कभी मैया यशोदा से चांद को खिलौना समझ उसे मांगने की जिद तो कभी राधा से ब्याह कराने की हठ। माखन चोरी, ओखल लीला, गोवर्धन पूजा जैसी लीलाओं ने जहां भक्तों को भाव विभोर कर दिया वहीं बालक कृष्ण के पूतना वध व अन्य राक्षसों का वध करने पर कथा स्थल राधा-कृष्ण के जयकारों से गूंजायमान उठा। श्रीकृष्ण के दर्शन करने पहुंचे शिवजी के प्रसंग का वर्णन हुआ भक्तों का मन भी भक्ति में झूमने नाचने लगा। श्रीश्याम परिवार सेवा ट्रस्ट द्वारा फतेहाबाद रोड स्थित राजदेवम आयोजित में श्रीमद्भावत कथा के पांचवे दिन व्यास पीठ से बैठकर कथा वाचक पूज्यश्री जया किशोरी ने गोवर्धन पूजा व श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का भक्तिमय वर्णन किया। इस अवसर पर छोटे-छोटे बच्चे कन्हैया और राधा के रूप में सज संवरकर पहुंचे। कहा कि भगवान ने जो भी लीलाएं की वह जग कल्याण के लिए कीं। अभिभावकों से कहा कि जिस तरह माता यशोदा श्रीकृष्ण की हर छोटी छोटी बात ध्यान से सुनती थीं। आप भी सुनें। बच्चों की बेकार की और छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज न करें। अन्यथा बड़े होने पर वह आपसे बड़ी बड़ी बातों को छिपाएंगे। बच्चों को समय दें।
नंद भवन में उड़ रही धूल, धूल मोहे प्यारी लगे…, श्याम सपनों में आता क्यों नहीं, प्यारी सूरत दिखाता क्यों नहीं…, राधिका गोरी से बिरज की छोरी से मैया करा दे मेरो ब्याह… जैसे भजनों का भक्तों ने खूब नन्द लिए और भक्ति में नृत्य किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से बाबू रोशनलाल गुप्ता, राजकुमार गुप्ता, राधा गुप्ता, विकास मांगलिक, जयश्री मांगलिक, अनिल गुप्ता, विनीत मांगलिक, ऋषिक मांगलिक, अर्पित गुप्ता, अंजू मांगलिक, तनु मांगलिक, रेखा गुप्ता, आकांक्षा गुप्ता, अलका गुप्ता, नीता गुप्ता, साक्षी गुप्ता, अर्चना गुप्ता, नितेश शिवहरे, राखी शिवहरे, प्रदीप गुप्ता ,सुनील गुप्ता, राजीव गुप्ता यश गुप्ता, अमन गुप्ता, रानी गुप्ता विनीता गुप्ता आदि उपस्थित थीं।

विदेशी ठप्पा लगे बिना हम अपनी चीजों पर भी विश्वास नहीं करते
कन्हैया और माता यशोदा के संवाद का वर्णन करते हुए पूज्यश्री जया किशोरी ने कहा कि गौमाता की हर चीज उपयोगी है। परन्तु हम तब तक अपनी चीजों को नहीं मांनते जब तक न पर विदेसी ठप्पा न लग जाए। हाल ही किसी देश में पत्तियों से प्लेट बनाकर कहा कि बहुत रिसर्च करके ईको फ्रैंडली प्लेट बनाई हैं। जिस पर हमनें भी तालियां बजाईं। लेकिन लोगों को हमारे देश की पत्तल नहीं दिखती। जब दुनियां में शिक्षा ठीक से शुरू भी नहीं हुई थी, तब भारत में साढ़े सात लाख गुरुकुल थे। सब तोड़ दिए गए। विदेशी आपको आपकी ही चीज पैकेजिंग बदल कर दे रहे हैं। बिल्कुल दीपावली की सोन पापड़ी की तरह। विदेशो में खोज कर बताया जा रहा है मंत्रों का उच्चारण सबसे बेहतर मेडिटेशन है। जिसे हमारे ऋषि मुनि सदियों से कर रहे हैं। युवाओं से कहा कि अपने शास्त्र पढ़िए और अपनी चीजों पर विस्वास करना सीखिए।
आगरा। धन कमाना हो या घर के काम करना। पति पत्नी दोनों का काम है। ग्लावों द्वारा गाय चराने जाने और गोपियों द्वारा दूध दही बेचने जाने के काम की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि बेटियों और बेटों दोनों को पैसा कमाने के साथ घर के काम भी सिखाएं। सब करना आना चाहिए। बेटे बेटी दोनों को धन कमाना, खाना बनाना, घर को बांधकर चलना, रिश्ते बनाना सबी आना चाहिए। यही समानता है। एक दूसरे पर जिम्मेदारी थोपना नहीं। तभी परिवार चलता और सम्भलता है।