आगरालीक्स …आगरा में डॉक्टरों ने बताया कि महिलाओं के एग की गुणवत्ता को स्टेम सेल से कैसे सही किया जा सकता है। जिन महिलाओं के अंडाणु नहीं बन रहे हैं, उनमें स्टेम सेल के रिजल्ट बहुत अच्छे हैं। मगर, देश में स्टेम सेल पर बहुत कम काम हो रहा है, इसके लिए स्त्री रोग विशेषज्ञों को आगे आना चाहिए। रविवार को होटल क्लार्क शिराज में दो दिवसीय एंडोगायनी व यूरोगायनी कार्यशाला के समापन पर डॉक्टरों को सम्मानित किया गया।
आगरा ऑब्स एंड गायनिक सोसायटी (एओजीएस) और डॉ कमलेश टंडन हॉस्पिटल एंड टेस्ट टयूब बेबी सेंटर द्वारा आयोजित (आईएजीई व फोग्सी के सहयोग से) कार्यशाला में फोग्सी की सचिव डॉ सुनीता तांदुलवाडकर ने बताया कि बांझपन के केस बढकर 15 फीसद तक पहुंच गए हैं। इसका एक बडा कारण महिलाओं में अंडाणु न बनने या अंडाणु की क्वालिटी खराब होना। इस तरह के केस में स्टेम सेल से अंडाणु तैयार किए जा रहे हैं। 2015 में स्टेम सेल से तैयार अंडाणु से महिला मां बन चुकी है। इसी तरह से महिलाओं में जननांगों की टीबी होने पर गर्भाशय की झिल्ली कमजोर हो जाती है, ऐसे केस में सरोगेसी (किराए की कोख) की जरूरत होती है। ऐसे केस में भी स्टेम सेल से महिलाएं अपने गर्भ से मां बन सकती हैं। उन्होंने कहा कि देश में स्टेम सेल पर बहुत कम काम हो रहा है, इसे तेज करने की जरूरत है। डॉ दिनेश कंसल, दिल्ली ने बताया कि युवतियों में पीरियडस के दौरान तेज दर्द होता है, ऐसे 75 फीसद केस में दवाओं से इलाज संभव है लेकिन 25 फीसद केस में दर्द में राहत नहीं मिलती है। दर्द इतना असहनीय होता है कि ऐसे में गर्भाशय निकालना पडता है, यह पेल्विस बोन में मौजूद पेन फाइबर के कारण होता है। नई तकनीकी से पेन फाइबर को निकाला जा सकता है, जिससे पीरियडस में तेज दर्द होने पर गर्भाशय निकालने की जरूरत न पडे। आयोजन सचिव डॉ अमित टंडन, डॉ वैशाली टंडन ने बताया कि लेप्रोस्कोपिक विधि से ऑपरेशन के साथ ही नई तकनीकी से स्त्री रोग से जुडी बीमारियों का इलाज संभव है। उन्होंने कार्यशाला में शामिल हुए देश भर के स्त्री रोग विशेषज्ञों को धन्यवाद किया। डॉ कमलेश टंडन ने कहा कि इस तरह की कार्यशाला डॉक्टरों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच देती हैं। समापन समारोह में सूचरिंग चैंपियनशिप के विजेता डॉ सुरेंद्र पाठक, डॉ. रूपाली खुराना को सम्मानित किया गया।
15 पेपर किए गए प्रजेंट
कार्यशाला में जूनियर डॉक्टरों ने महिलाओं से सम्बंधिक विभिन्न जटिल बीमारियों पर 15 पेपर प्रजेंट किए। सीनियर डॉक्टरों ने एक बीमारी पर आधार विभिन्न कॉम्पटेटिव वीडियो दिखाकर उसके इलाज पर निदान पर चर्चा की। कांफ्रेंस में आर्गनाइजिंग कमेटी के डॉ. सदस्यों में डॉ. संध्या अग्रवाल, डॉ. सरोज सिंह, डॉ. रिचा सिंह, डॉ. संधी जैन, डॉ. संतोष सिंघल, डॉ. आरएन गोयल, डॉ. सुनीता मल्होत्रा, डॉ. जसनीत कपूर आदि उपस्थित थीं।