आगरालीक्स…सावन की अमावस्या 12 अगस्त को लग रहा साल 2026 का आखिरी सूर्यग्रहण. जानिए क्या भारत में दिखेगा ग्रहण. सूतक और 12 राशियों पर प्रभाव भी जानें
इस साल सावन का महीना ज्योतिष और खगोल दोनों दृष्टि से बेहद खास रहने वाला है। ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी ने बताया की वैदिक पंचांग के अनुसार सावन का महीना 30 जुलाई 2026, गुरुवार से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगा। इसी सावन मास में 15 दिन के अंदर साल के दो बड़े ग्रहण लगने जा रहे हैं। ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी के अनुसार सावन महीने की अमावस्या, 12 अगस्त 2026 को साल का आखिरी और सबसे बड़ा सूर्यग्रहण लगेगा, वहीं इसके 15 दिन बाद सावन पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन, 28 अगस्त को साल का आखिरी चंद्र ग्रहण लगेगा।
कब है ग्रहण ?
ज्योतिष गणना के अनुसार सावन अमावस्या जिसे हरियाली अमावस्या भी कहते हैं, इस बार 12 अगस्त 2026, बुधवार को पड़ रही है। ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी ने बताया की अमावस्या तिथि की शुरुआत 12 अगस्त की रात 01:55 बजे से होगी और देर रात तक रहेगी। इसी दिन साल का अंतिम सूर्यग्रहण लगेगा।
ग्रहण का समय (भारतीय समयानुसार) –
साल का अंतिम सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को रात 9 बजकर 4 मिनट से शुरू होगा और कुछ पंचांगों के अनुसार रात 09:05 बजे से। यह ग्रहण 13 अगस्त की सुबह 04:25 बजे तक रहेगा। कुल अवधि 7 घंटे 21 मिनट की होगी। खगोलीय दृष्टि से यह Total Solar Eclipse है जो 12 अगस्त 2026 को लगेगा। यह यूरोप, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, पुर्तगाल और कनाडा में पूर्ण रूप से दृश्य होगा।
भारत में सूतक काल मान्य होगा या नहीं ?
शास्त्रों के अनुसार सूर्य ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से 12 घंटे पहले लग जाता है। इस हिसाब से सूतक 12 अगस्त सुबह 09:04 बजे से लगेगा। लेकिन राहत की बात यह है कि यह सूर्य ग्रहण भारत में किसी भी जगह से दृश्य नहीं होगा। इसलिए धर्मशास्त्र के अनुसार भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। मंदिरों के कपाट बंद नहीं होंगे और पूजा-पाठ पर रोक नहीं लगेगी।
ज्योतिषीय दृष्टि से क्यों है खास ?
अमावस्या पर ही सूर्यग्रहण : ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या के दिन लगता है। सावन अमावस्या पर सूर्यग्रहण का संयोग पितृकार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
राशि और नक्षत्र : यह ग्रहण कर्क राशि में लगेगा। कर्क राशि के स्वामी चंद्रमा हैं, जो मन के कारक हैं। इस दिन राहु-केतु का विशेष प्रभाव बना रहेगा।
90 दिन तक असर : ज्योतिष मान्यता है कि सूर्यग्रहण का प्रभाव लगभग 90 दिनों तक रहता है।
12 राशियों पर प्रभाव – किसे रहना है सावधान ?
ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी ने बताया की सावन अमावस्या पर लगने वाले इस अंतिम सूर्य ग्रहण का सभी राशियों पर असर पड़ेगा। कुछ राशियों के लिए यह शुभ फलदायी होगा तो कुछ के लिए सावधानी बरतने की जरूरत है।
शुभ प्रभाव वाली 5 राशियां : इस हरियाली अमावस्या के सूर्यग्रहण से 5 राशियों के लिए खुशखबरी के योग बन रहे हैं। इनमें वृषभ, मिथुन, सिंह, तुला और मकर राशि के जातकों को धन लाभ, नौकरी में प्रमोशन और रुके काम पूरे होने के योग हैं।
सावधान रहने वाली राशियां : कर्क, वृश्चिक और मीन राशि वालों पर ग्रहण का प्रभाव भारी पड़ सकता है। इन जातकों को इस दौरान वाद-विवाद, स्वास्थ्य और धन के लेन-देन में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। मान-सम्मान को ठेस लग सकती है।
इस दिन क्या करें, क्या न करें – ज्योतिष उपाय
चूंकि यह हरियाली अमावस्या भी है, इसलिए इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण, पौधारोपण, दान और पूजन का विशेष महत्व बताया गया है।
ग्रहण के दिन करें ये उपाय –
ग्रहण काल में “ॐ नमः शिवाय” और “ॐ आदित्याय नमः” मंत्र का मानसिक जाप करें।
ग्रहण समाप्त होने के बाद गंगाजल से स्नान कर पूरे घर में छिड़काव करें।
इस दिन पीपल, बरगद या तुलसी का पौधा लगाना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।
गरीबों को सफेद वस्त्र, चावल और तिल का दान करें।
गर्भवती महिलाएं ग्रहण काल में घर से बाहर न निकलें और नुकीली वस्तुओं का प्रयोग न करें।
नोट – यह सूर्यग्रहण साल का दूसरा और आखिरी सूर्यग्रहण है। इससे पहले पहला सूर्यग्रहण 17 फरवरी 2026 को लग चुका है।
12 अगस्त 2026 को बनेंगे 4 बड़े दुर्लभ संयोग – 100 साल में पहली बार ऐसा होगा –
सावन अमावस्या पर लगने वाला यह सूर्यग्रहण सिर्फ एक खगोलीय घटना नहीं, ज्योतिष के हिसाब से महासंयोगों वाला दिन है।
हरियाली अमावस्या + पूर्ण सूर्यग्रहण का संयोग –
वैदिक पंचांग के अनुसार 12 अगस्त 2026 को हरियाली अमावस्या है। ज्योतिषाचार्य पंडित हृदय रंजन शर्मा जी के अनुसार इसी दिन साल का दूसरा और आखिरी पूर्ण सूर्यग्रहण लगेगा। अमावस्या पर ही सूर्यग्रहण लगता है, लेकिन सावन की अमावस्या पर पूर्ण सूर्यग्रहण का लगना बेहद दुर्लभ माना जाता है।
एक ही पक्ष में दो ग्रहण का दुर्लभ योग –
ज्योतिषाचार्य पंडित हृदय रंजन शर्मा जी के अनुसार श्रावण में इस वर्ष एक ही पक्ष में दो ग्रहण का दुर्लभ योग बन रहा है। 12 अगस्त को हरियाली अमावस्या पर खग्रास सूर्य ग्रहण और 28 अगस्त को श्रावणी पूर्णिमा / रक्षाबंधन पर खंडग्रास चंद्र ग्रहण होगा। एक पखवाड़े में सूर्य और चंद्र दोनों ग्रहणों का आना कई दशकों में एक बार होता है और इसे प्रकृति और राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत माना जाता है।
- चतुर्ग्रही योग और नवपंचम राजयोग –
इस ग्रहण की सबसे बड़ी खासियत इसके योग हैं। MoneyControl के अनुसार इस ग्रहण की अवधि 7 घंटे 21 मिनट की होगी और इस दौरान राहु-केतु का असर बना रहेगा। ग्रहण के दौरान चतुर्ग्रही योग और नवपंचम योग बनेगा।
कर्क राशि में 4 ग्रहों की युति : यह ग्रहण बुधवार के दिन सावन माह की अमावस्या को कर्क राशि में होगा। कर्क में सूर्य, चंद्र, बुध और शुक्र की युति से चतुर्ग्रही योग बन रहा है।
राहु-केतु का प्रभाव : चंद्रमा के राहु-केतु के एक्सिस पर होने से इस ग्रहण को पिशाच योग युक्त भी कहा जा रहा है, जो मानसिक उथल-पुथल बढ़ाएगा।
सावन शिवरात्रि के अगले ही दिन ग्रहण –
11 अगस्त को सावन शिवरात्रि है और ठीक अगले दिन 12 अगस्त को हरियाली अमावस्या और सूर्यग्रहण है। शिवरात्रि पर किया गया जलाभिषेक और अगले दिन पितरों के लिए किया गया तर्पण – यह क्रम पितृदोष और कालसर्प दोष की शांति के लिए सबसे उत्तम माना गया है।
इस संयोग का क्या फल होगा ?
यह पूर्ण सूर्यग्रहण है, जिसकी अधिकतम अवधि 2 मिनट 18 सेकंड तक दिन में अंधेरा छा जाएगा। इसे 100 साल का सबसे प्रभावी ग्रहण कहा जा रहा है।
भारत में दृश्य नहीं होने से सूतक नहीं लगेगा, इसलिए भक्त हरियाली अमावस्या का व्रत, पौधारोपण और पितृ पूजन पूरे उत्साह से कर सकेंगे।
ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी ने बताया की इस दिन पौधा लगाना, पितरों को जल देना और शिवलिंग पर काले तिल मिश्रित जल चढ़ाना इस दुर्लभ संयोग के दुष्प्रभाव को शुभ प्रभाव में बदल देता है।