आगरालीक्स…ब्रज की महारानी राधारानी का प्राकट्योत्सव कल. तीन शुभ योगों में मनाई जाएगी राधाष्टमी. जानिए पूजा का समय, व्रत और धार्मिक महत्व
राधा अष्टमी का पर्व भक्ति और प्रेम से जुड़ा विशेष अवसर माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं में राधा रानी को प्रेम, त्याग और श्रीकृष्ण के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक बताया गया है. माना जाता है कि कृष्ण नाम से पहले राधा का नाम लेने से भक्ति की पूर्णता होती है. अलीगढ के ज्योतिषाचार्य हृदय रंजन शर्मा जी के अनुसार, हर साल भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर राधा अष्टमी मनाई जाती है. मान्यता है कि इसी पावन दिन राधा रानी ने धरती पर अवतार लिया था. पंचांग के अनुसार, साल 2026 में भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 18 सितंबर, दिन शुक्रवार को दोपहर 1 बजकर 2 मिनट पर शुरू होगी. इसका समापन 19 सितंबर, दिन शनिवार को 3 बजकर 28 मिनट पर होगा. ऐसे में उदयातिथि को ध्यान में रखते हुए राधा अष्टमी का पर्व 19 सितंबर, दिन शनिवार को मनाया जाएगा. इस दिन राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है. ब्रज क्षेत्र में इस पर्व को बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है.
राधा अष्टमी पर पूजा का समय –
ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा ने बताया की राधा अष्टमी के दिन पूजा के लिए मध्याह्न का समय महत्वपूर्ण माना जाता है. पंचांग के अनुसार 19 सितंबर को सुबह 11:01 बजे से दोपहर 1:28 बजे तक राधा रानी की पूजा का शुभ समय रहेगा.
व्रत रखने वाले कब खोलें व्रत?
राधा अष्टमी पर कई भक्त व्रत रखते हैं. व्रत के पारण को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों और धार्मिक परंपराओं में नियम मिलते हैं. पंचांग के अनुसार 20 सितंबर को सुबह 6 बजकर 8 मिनट के बाद व्रत का पारण किया जा सकता है.
3 शुभ योग में राधाष्टमी –
इस साल राधाष्टमी के दिन 3 शुभ योग बन रहे हैं. राधाष्टमी पर आयुष्मान् योग प्रात:काल से लेकर दोपहर 2 बजकर 29 मिनट तक रहेगा. इस योग में आयु में वृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है. दोपहर 2:29 बजे से सौभाग्य योग बनेगा, जो आपके भाग्य को बढ़ाने वाला है. इन दो शुभ योग के अलावा रवि योग राधाष्टमी की मध्य रात्रि यानि 20 सितंबर को 01:43 AM से बनेगा और सुबह 06:08 AM तक रहेगा. रवि योग में सूर्य का प्रभाव अधिक होता है, जिसकी वजह से इस योग में कोई दोष नहीं रह जाता. राधाष्टमी से 16 दिन का महालक्ष्मी व्रत प्रारंभ होते है, जो इस बार 19 सितंबर से 04 अक्टूबर (रविवार) तक चलेगा।
राधा अष्टमी का धार्मिक महत्व
राधा अष्टमी को राधा रानी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है. ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी के अनुसार वैष्णव परंपरा में राधा रानी को श्रीकृष्ण की परम भक्त और उनकी आराध्य शक्ति के रूप में विशेष स्थान प्राप्त है. इसलिए इस दिन राधा-कृष्ण की पूजा और भक्ति करने की परंपरा है.