आगरालीक्स…शारदीय नवरात्र में अष्टमी और नवमी तिथि का कन्फ्यूजन दूर करें. जानें किस दिन है अष्टमी और किस दिन महानवमी. व्रत पारण भी जानें
11 अक्टूबर से शुरू हुए शारदीय नवरात्र 20 अक्टूबर तक चलेंगे. लोगों को इस बार अष्टमी और महानवमी की तिथि को लेकर संकोच है. उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि किस दिन अष्टमी तिथि का व्रत रखें और किस दिन नवमी का व्रत. इसको लेकर ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा ने आगरालीक्स के साथ तिथियों को साझा किया है. ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी ने बताया की महासप्तमी 17 और 18 अक्टूबर को मान्य होगी और दोनों दिन मां कालरात्रि की आराधना की जाएगी.
अष्टमी (माता महागौरी) का व्रत 18 अक्टूबर रविवार को मान्य होगा, पूजा 19 अक्टूबर सोमवार को होगी. जो श्रद्धालु अष्टमी पूजन, कन्या पूजन, हवन करते है वे 19 अक्टूबर को ही करेंगे.
महानवमी तिथि -: महानवमी की 19 अक्टूबर की सुबह 10:51 बजे शुरू होगी. नवमी तिथि लगते ही दोपहर का नवमी पूजन, हवन और रात्रि कालीन साधना इसी दिन संपन्न की जाएगी. जो श्रद्धालु उदयातिथि को प्रमुख मानते हैं, वे 20 अक्टूबर की सुबह नवमी पूजन, कन्या भोज और हवन का अनुष्ठान कर सकते हैं, क्योंकि दोपहर 12:50 बजे तक नवमी तिथि विद्यमान रहेगी. इसके बाद विजयादशमी दशहरा का पर्व मान्य होगा.
व्रत पारण का समय : नवरात्रि व्रत का पारण 20 अक्टूबर 2026 को नवमी पूजन और कन्या भोज संपन्न करने के पश्चात् दोपहर 12:50 बजे से पूर्व कर लेना शास्त्रसम्मत रहेगा।
मुर्गे पर सवार होकर जाएंगी माँ दुर्गा –
जब मातारानी मंगलवार या शनिवार को विदा होती हैं और कैलाश जाती हैं तो उनका वाहन मुर्गा होता है. इस बार शारदीय नवरात्रि का समापन 20 अक्टूबर 2026 मंगलवार को है. ग्रंथों में मंगलवार और शनिवार को देवी का प्रस्थान चरणायुध वाहन बताया गया है. इस मान्यता के अनुसार मां दुर्गा का प्रस्थान मंगलवार को चरणायुध पर होगा. मुर्गे पर माता की विदाई शुभ नहीं मानी जाती है. इस वाहन को शोक, आपसी कलह, और प्राकृतिक आपदाओं का प्रतीक माना जाता है, समाज में उथल-पुथल, मानसिक अशांति और आंशिक कष्टों की स्थिति बन सकती है.