आगरालीक्स…बच्चे आनलाइन क्लासेज और गेमिंग पर ज्यादा बिता रहे टाइम. बढ़ रही आंखों में समस्याएं…जानिए क्या कहते हैं नेत्र रोग विशेषज्ञ.
बच्चों की आंखों पर पड़ रहा प्रभाव
कोरोना महामारी के कारण 2020—21 के पूरे सेशन में बच्चे स्कूल नहीं गए. बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो इसके लिए स्कूलों द्वारा आनलाइन एजूकेशन का प्रयोग किया गया. इधर आनलाइन क्लासेज और कोरोना महामारी के कारण बाहर ज्यादा न निकलने की अवस्था में बच्चों का पूरा टाइम आनलाइन क्लासेज, टीवी और मोबाइल पर गेमिंग पर ही बीता. इसके कारण बच्चों की आंखों पर ज्यादा प्रभाव देखा गया है. चूंकि अभी भी कई स्कूलों में बच्चों की आनलाइन पढ़ाई जारी है, ऐसे में उनके लिए ये समस्या ज्यादा बढ़ती जा रही है. मोटे तौर पर देखा जाए तो हाल के समय में करीब 40 प्रतिशत बच्चों की आंखों में समस्याएं देखी गई हैं. बच्चों की आंखों में जलन और ड्राइनेस की समस्या सबसे ज्यादा देखी गई है.
क्या कहते हैं चिकित्सक
इस संबंध में आगरा की नेत्र रोग विशेषज्ञ नेहा लवानिया का कहना है कि हाल के समय में लैपटॉप, कम्प्यूटर, मोबाइल का प्रयोग बच्चों में ज्यादा देखा गया है जिसके कारण ये समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं. ध्यान लगाने में समय लगता है, सिर में दर्द होता है और आंखें दूखती हैं. इसके कारण छोटे—छोटे बच्चों को चश्मा लगाने की जरूरत पड़ रही है.
डॉ. नेहा लवानिया ने दिए ये सुझाव
स्क्रीन पर पढ़ाई करते समय बार—बार पलक झपकाना न भूलें.
आंखों में जलन या ड्राईनेस होने पर डॉक्टर से जरूर कंसल्ट करें.
बच्चों को एंटीग्लेयर चश्मों का यूज भी करा सकते हैं. इससे स्क्रीन रिफ्लेक्शन कम हो जाते हैं और आंखों पर दुष्प्रभाव कम होता है.
बच्चों को एक घंटे बाद पांच मिनिट के लिए स्क्रीन से दूर कर दें.
ब्रेक के दौरान बाहर कोई दूर का पेड़ या आसमान में देखने को कहें. इससे आंखों की मसल्स को आराम मिलता है.
हरी सब्जियों का सेवन करें, पपीता, गाजर, आंवला, बादाम यह सब आंखों के लिए फायदेमंद है.
आनलाइन क्लासेज में बच्चों को मोबाइल की अपेक्षा लैपटॉप का प्रयोग कराएं तो ज्यादा बेहतर होगा. इसमें बॉडी पॉजिशन का भी ध्यान रखें.
लैपटॉप पर किसी की भी रोशन नहीं आनी चाहिए जैसे कि ट्यूबलाइट.