आगरालीक्स…उठ जाग सवेरे जी, तेरे नाम जपन द वेला… सत्संग में बही गुरुग्रंथ साहेबजी की महिमा..आगरा में पहली बार आए भाई साहेब गुरुप्रीत सिंह (रिंकू वीरजी)…
अमृत वेला करने की शपथ दिलवाई
जो सोया है, कभी न कभी तो जागेगा। महत्व उसका है जो समय पर जागे। जिनका मन जाग गया, उनका शरीर अमृत वेला में नहीं सो सकता। जागा हुआ मन जानता है मेरे साथ जाने वाली वस्तु कौन सी है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि काम छोड़कर सिर्फ नाम जपते रहे। ग्रंथों में सबसे ऊपक कर्म है। अच्छे कर्म करने वाले लोग थोड़े से कीर्तन से ही तर जाते हैं। गुरु नानक अंत तक हल चलाते रहे हमें कर्म का महत्व सिखाने के लिए। अमृतवेला का महत्व समझाते हुए यह बात मुम्बई से पहली बार आगरा आए भाई साहेब गुरुप्रीत सिंह (रंकू वीरजी) ने फतेहाबाद रोड स्थित होटल केनसीसी में आयोजित अमृतवेला कार्यक्रम में सभी श्रद्धालुओं से अमृतवेला करने की शपथ भी दिलवाई।
अमृतवेला 24 घंटे में सिर्फ 2.30 घंटा गुरुनानक जी को दे दो
कहा कि पूरा दिन अपने काम को दो। जो चाहे करो। अमृतवेला 24 घंटे में सिर्फ 2.30 घंटा गुरुनानक जी को दे दो। रात 12 बजे से लेकर 6 बजे तक अमृत वेला होता है। यदि आपका रात देर तक का काम है तो रात 12 बजे नहाधोकर ढाई घंटे अपने गुरु को अवश्य दो। सुबह 3-6 का मृतवेला सर्वश्रेष्ठ है। सैकड़ों वर्षों से ऋषि मुनि जंगलों और पहाड़ों की गुफाओं में आज भी अपने शरीर को सम्भाले बैठे हैं सिर्फ दर्शन के लिए। अमृतवेला सम्भालने वाले को प्रत्यक्ष दर्शन अवश्य होते हैं। नाम का ज्ञान वो अवस्था है जो गुरुनानक जी का साथ महसूस कराए। इस अवस्था को सिर्फ अमृतवेला को साध कर ही प्राप्त किया जा सकता है। अमृतवेला में नाम जपने से मन व शरीर के सभी रोग दूर हो जाते हैं। इस अवसर पर गुरुग्रंथ साहेब के शबद के संगीतमय कीर्तन ने सभी श्रद्धालुओं को भक्ति में डुबो दिया। संचालन संजय पुरसनानी ने किया.
बच्चों को मृतवेला से लग करना उन्हें जहर देना समान
भाई साहेब गुरुप्रीत सिंह जी ने कहा कि जो माता पिता जानबूझ कर बच्चों को देर तक सोने दे रहे हैं, वो उन्हें जहर दे रहे है। बच्चों को किताबी शिक्षा के साथ नाम से भी जोड़ रहे हैं। सिर्फ 15 मिनट का समय अमृतवेला को देना बच्चों के लिए अमृत समान है।
जोड़ा घर में श्रद्धालुओं के चूते चप्पल उठाकर कारसेवक हुए धन्य
आगरा। भगवान के द्वार पर कोई छोटा बड़ा नहीं था। संगत में पहुंचने वाले सभी श्रद्धालुओं के सेवादारों ने जूते चप्पल अपने हाथ से उठाए। जूते चप्पलों की व्यवस्था में लगे दर्जनों सेवादारों का कहना था कि भगवान के किसी भी कार्य में सहयोग करना जीवन को धन्य कर कर देता है।
स्वागत के लिए हर की दिखा ललायित
आगरा। भाई साहेब गुरुप्रीत सिंह के कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने के साथ ही संगत में मौजूद हर श्रद्धालु उनके स्वागत के लिए ललायित दिखा। किसी के हाथ में फूलों का गुच्छा था तो कोई गुलाब का फूल लिए खड़ा था। कोई शॉल पहनाकर आर्शीवाद लेना चाहता था तो कोई चरण स्पर्श करके। इनमें नन्हे मुन्ने बच्चे भी शामिल थे। भाई साहेब के प्रवेश करते ही धन गुरु नानक व बोले सो निहाल सतश्रीअकाल के जयकारों से गूंजने लगा।
श्रद्धालुओं की जिज्ञासा को किया दूर
भाई साहेब गुरुप्रीत सिंह जी ने श्रद्धालुओं के जिज्ञासा भरे सवालों के जवाब भी दिए। गुरु को कैसे पहचाने,
इनकी रही विशेष उपस्थिति
विकास वयानी, विनय, गुरुमुख, मोहित, नरेन्द्र कश्यप, वीर महेन्द्र पाल, सेठी जी, काली भाई, दलजीत सिंह सेतिया, रवि गिडवानी, सुमित चंदानी, दीपक मतलानी, कंचन पुरसनानी, युविका गिडवानी, संगीता कश्यप, ज्योति, पूनम वर्मा आदि उपस्थित थीं।