आगरालीक्स….आगरा में नाइट कर्फ्यू पर स्ट्रीट फूड्स वालों का दर्द—समोसे में आलू तब रहेगा जब बनाने वाला जिंदा रहेगा. खबर में जानिए इनकी पीड़ा
आठ बजे बाजार हो जाते हैं बंद
आगरा में कोरोना महामारी ने एक बार फिर से लोगों को तेजी से अपना शिकार बनाना शुरू कर दिया है. कोरोना महामारी का प्रसार न हो इसके लिए आगरा में पुलिस प्रशासन द्वारा कई सख्त कदम भी उठाए जा रहे हैं. आगरा में फिलहाल नाइट कर्फ्यू लगा हुआ है. रात नौ बजे से सुबह छह बजे तक बेवजह लोगों के आने—जाने पर पाबंदी है. नौ बजते ही पुलिस द्वारा रास्ते बैरिकेड कर दिए जाते हैं और उससे एक घंटे पहले ही बाजार बंद हो जाते हैं.
रात में दुकानदारी करने वालों का कामकाज ठप
आगरा में नाइट कर्फ्यू ने उन लोगों को परेशानी में डाल दिया है जिनका काम ही शाम छह बजे के बाद शुरू होता है. आगरा में स्ट्रीट फूडस और फास्ट फूड की दुकान चलाने वालों के सामने इस समय संकट खड़ा हो गया है. रात के आठ बजते ही इन्हें अपनी दुकानें बंद करनी पड़ जाती हैं. इन लोगों का कहना है कि खाने पीने वालों का क्या कसूर. दुकानदारी शुरू होती ही है और नाइट कफ्यू् के कारण थोड़ी देर बाद दुकानें बंद करनी पड़ती हैं. जानिए क्या कहते हैं लोग:—
- प्रतापनगर में फास्ट फूड की शॉप चलाने वाले नितेश का कहना है कि हमारी दुकानदारी तो शाम होने के बाद ही शुरू होती है. अक्सर फैमिली वाले या कपल आदि शाम के समय ही खाना खाने आते हैं. लेकिन इस समय नाइट कर्फ्यू के कारण काफी नुकसान झेलना पड़ रहा है. रात नौ बजे दुकान बंद करनी पड़ती है. हमारा बनाने वाला सामान कच्चा होता है जिसके कारण रोजाना हमारा माल खराब हो रहा है. उसे फेंकना पड़ रहा है. इनका कहना है कि अगर नाइट कर्फ्यू नौ बजे की जगह रात 10 बजे से शुरू हो तो काफी राहत मिल सकती है.
- खंदारी पर आईसक्रीम की ठेल लगाने वाले विशाल का कहना है कि नाइट कर्फ्यू के कारण हमारी तो पूरी सेल ही चरमरा गई है. दिन में आइसक्रीम की कोई बिक्री नहीं होती. हम लोग शाम 6 बजे के बाद ही बाजार में ठेल लेकर निकलते हैं और रात 11 से 12 बजे तक रहते है. हमारा कस्टमर भी रात आठ बजे के बाद ही आता है लेकिन नाइट कर्फ्यू के कारण सब कुछ ठप हो गया है. विशाल का कहना है कि समझ में नहीं आ रहा है कि अब क्या किया जाए.
- सेंट जॉन्स चौराहा पर टिकिया—भल्ले की ठेल लगाने वाले श्याम सिंह का कहना है कि मैं पिछले 10 सालों से यहां अपनी ढकेल लगा रहा हूं. लेकिन पिछले साल छह से सात महीने घर ही रहना पड़ा. सब्जी बेचनी पड़ी. दीवाली के बाद लगा कि फिर से ठीक हो रहा है तो दोबारा टिकिया भल्ले की चाट लगाना शुरू कर दिया. अब एक बार फिर से कोरोना आ गया है. नाइट कर्फ्यू के कारण दुकानदारी हो ही नहीं पा रही.
प्रशासन से मांग—टाइम बढ़े तो मिले राहत
इन लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन द्वारा नाइट कर्फ्यू का टाइम रात नौ बजे से न होकर रात दस बजे से शुरू कर दिया जाए तो काफी राहत मिल सकती है. वैसे तो कोरोना के कारण अब कस्टमर भी आने से कतरा रहा है लेकिन जो थोड़ा बहुत आता है उसके लिए ही अगर थोड़ा सा टाइम बढ़ जाए तो हमारी दुकानदारी चल सकती है.